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Sawan 2020: शिवजी को क्यों नहीं चढ़ाया जाता है शंख से जल, जानिए पूरी कथा

Tue, 14 Jul 2020 05:03 PM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Shashi Shashi Updated Tue, 14 Jul 2020 05:03 PM IST
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Sawan 2020 Do you know why Shiva is not offered water from the conch shell
सावन 2020: वेद मन्त्रों के द्वारा ही शिव का पूजन,अभिषेक, जप, यज्ञ आदि करके प्राणी शिव की कृपा सहजता से प्राप्त कर लेता है।

आपने देखा होगा कि शिव जी का अभिषेक कई चीजों से किया जाता है। शिवलिंग पर हमेशा जल की धारा गिरती रहती है लेकिन कभी भी शिव जी को शंख से जल अर्पित नहीं किया जाता है। जबकि सभी देवी-देवताओं को शंख से जल अर्पित किया जाता है। भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी को शंख बहुत प्रिय हैं। फिर भी शिव जी की पूजा में शंख का उपयोग नहीं किया जाता है। क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों है। आइए जानते हैं।



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Sawan 2020 Do you know why Shiva is not offered water from the conch shell
shivling

दैत्यराज दंभ की कोई संतान नहीं थी उसने संतान प्राप्ति के लिए विष्णु जी की कठिन तपस्या की। दंभ की तपस्या से प्रसन्न होकर विष्णु जी ने उससे वरदान मांगने को कहा, तब दंभ ने ऐसे पुत्र का वरदान मांगा जो तीनों लोकों के लिए अजेय और महापराक्रमी हो। भगवान श्रीहरि के वरदान से दंभ के यहां एक पुत्र ने जन्म लिया, जिसका नाम शंखचूड़ था। शंखचूड़ ने ब्रह्माजी को प्रसन्न करने के लिए घोर तपस्या की। उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मदेव प्रकट हुए और वर मांगने के लिए कहा। तब शंखचूड़ ने कहा कि मुझे वरदान दीजिए कि मैं देवताओं के लिए अजेय हो जाऊं। तब ब्रह्माजी ने उसे श्रीकृष्णकवच दिया।

 

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ब्रह्मा जी ने शंखचूड़ की तपस्या से प्रसन्न होकर वर देने के बाद,शंखचूड को धर्मध्वज की कन्या तुलसी से विवाह करने की आज्ञा दे दी। ब्रह्मा की आज्ञा से तुलसी और शंखचूड का विवाह संपन्न हुआ। लेकिन वरदान मिलने के बाद दैत्यराज शंखचूड ने तीनों लोकों पर अपना स्वामित्व स्थापित कर लिया। सभी देवता उससे त्रस्त होकर भगवान श्रीहरि से सहायता मांगने पहुंचे। लेकिन शंखचूड का जन्म स्वयं विष्णु जी के वरदान से हुआ था। इसलिए सभी ने शिव जी से प्रार्थना की। लेकिन परंतु श्रीकृष्ण कवच और तुलसी के पतिव्रत धर्म के कारण शिवजी भी उसका वध नहीं कर पा रहे थे।

 

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इस समस्या का समाधान करने के लिए भगवान विष्णु ने ब्राह्मण रूप धारण किया और शंखचूड से उसका श्रीकृष्णकवच दान में ले लिया। इसके बाद उन्होंने शंखचूड़ का रूप धारण करके तुलसी के शील का हरण कर लिया। जिसके बाद शिव जी अपने त्रिशुल से शंखचूड़ को भस्म कर दिया। ऐसी मान्यता है कि कहा उसकी हड्डियों की भस्म से शंख की उत्पत्ति हुई। इसलिए शिव जी की पूजा में शंख निषेध हैं लेकिन शंखचूड़ के विष्णु भक्त होने के कारण माता लक्ष्मी और श्रीहरि को शंख का जल बहुत प्रिय है।

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