इस माला से जपें ईष्ट और गुरु का मंत्र, मिलेगी मन की ताकत, बढ़ेगा तिजोरी का धन
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रुद्राक्ष की माला
शैव परंपरा को मानने वाले साधक भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए विशेष रूप से रुद्राक्ष की माला का प्रयोग करते हैं। रुद्राक्ष एक फल की गुठली है, जिसकी उत्पत्ति भगवान शिव के आंसुओं से मानी जाती है। शिव साधकों का विश्वास है कि यह पवित्र बीज संसार के समस्त दु:खों को दूर करने की ताकत रखत है। यही कारण है कि शिव की साधना में रुद्राक्ष की माला मंत्र जाप के लिए विशेष रूप से प्रयोग में लाई जाती है। मान्यता कि रुद्राक्ष की माला से मंत्र जाप करने देवाधिदेव भगवान शिव बहुत जल्दी प्रसन्न होते हैं।
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तुलसी की माला
सनातन परंपरा में तुलसी के पौधे को अत्यंत पवित्र माना गया है। वैष्णव परंपरा के साधक इसकी पत्तियों का प्रयोग न सिर्फ भगवान के प्रसाद के लिए बल्कि इसकी लकड़ी से बनी माला का जप के लिए विशेष रूप से करते हैं। मान्यता है कि तुलसी तुलसी की माला धारण करने और भगवान विष्णु और कृष्ण की कृपा प्राप्त होती है और इससे जप करने पर साधक के यश और कीर्ति में वृद्धि होती है। कई यज्ञ करने के बारबर पुण्य प्रदान करने वाली इस माला को धारण करने के लिए तमाम तरह के नियम-संयम का पालन करना पड़ता है।
हल्दी की माला
हिंदू धर्म में किसी भी पूजा, शुभ कार्य आदि में हल्दी का विशेष रूप से प्रयोग किया जाता है। भोजन में प्रयोग लाई जाने वाली हल्दी सेहत से ही नहीं सौभाग्य से भी जुड़ी हुई है। भगवान श्री गणेश और देवगुरु बृहस्पति हल्दी की माला से जप करने पर शीघ्र प्रसन्न होते हैं। संतान एवं ज्ञान की प्राप्ति के लिए इस माला से विशेष रूप से जप किया जाता है। हल्दी की माला से मां बगलामुखी का जप करने से उनकी शीघ्र कृपा होती है।
चंदन की माला
देवी-देवताओं के तिलक के लिए विशेष रूप से प्रयोग में लाए जाने वाले चंद की तासीर ठंडी होती है। प्रसाद के रूप में माथे पर लगाया जाने वाला चंदन मन और तन दोनों को शीतलता प्रदान कर दैवीय कृपा दिलाता है। इसी चंदन की माला का वैष्णव परंपरा में साधना के दौरान मंत्र जप में विशेष रूप से प्रयोग किया जाता है। जैसे शक्ति की साधना में लाल चंदन की माला से तो वहीं भगवान कृष्ण के मंत्र का जप सफेद चंदन की माला से किया जाता है। इस माला के मंत्र जप से मनोकामना बहुत जल्दी पूर्ण होती है।