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इस माला से जपें ईष्ट और गुरु का मंत्र, मिलेगी मन की ताकत, बढ़ेगा तिजोरी का धन

Wed, 17 Apr 2019 11:07 AM IST
Madhukar Mishra धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Madhukar Mishra Updated Wed, 17 Apr 2019 11:07 AM IST
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remedies of garland know best mala for mantra jaap
Remedies of garland
दुनिया भर मे तमाम धर्मों में ईश्वर की साधना-आराधना में माला जप का एक विशेष स्थान है। प्राचीन काल में ऋषि-मुनि माला जप के माध्यम से तमाम तरह की सिद्धियां प्राप्त किया करते थे। सनातन परंपरा में 108 मनके की माला से जप का विधान है। प्रत्येक देवता के लिए जहां अलग-अलग माला से जप का विधान है, वहीं ग्रहों ओर देवता के अनुसार अलग-अलग मालाएं धारण करने का अपना महत्व है। मसलन शैव परंपरा को मानने वाले जहां भगवान शिव को समर्पित रुद्राक्ष की माला पहनते हैं तो वहीं वैष्णव परंपरा को मानने वाले तुलसी की माला विशेष रूप से धारण करते हैं। प्रत्येक साधक अपने अराध्य देवी-देवता के अनुसार ही माला धारण करता है। 


अपने आराध्य या गुरु मंत्र के लिए उपयोग में लाई जाने वाली माला के बारे में विस्तार से जानने के लिए आगे की स्लाइड क्लिक करें — 
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Rudraksh Ki Mala

रुद्राक्ष की माला

शैव परंपरा को मानने वाले साधक भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए विशेष रूप से रुद्राक्ष की माला का प्रयोग करते हैं। रुद्राक्ष एक फल की गुठली है, जिसकी उत्पत्ति भगवान शिव के आंसुओं से मानी जाती है। शिव साधकों का विश्वास है कि यह पवित्र बीज संसार के समस्त दु:खों को दूर करने की ताकत रखत है। यही कारण है कि शिव की साधना में रुद्राक्ष की माला मंत्र जाप के लिए विशेष रूप से प्रयोग में लाई जाती है। मान्यता कि रुद्राक्ष की माला से मंत्र जाप करने देवाधिदेव भगवान शिव बहुत जल्दी प्रसन्न होते हैं। 

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Tulsi Ki Mala

तुलसी की माला 

सनातन परंपरा में तुलसी के पौधे को अत्यंत पवित्र माना गया है। वैष्णव परंपरा के साधक इसकी पत्तियों का प्रयोग न सिर्फ भगवान के प्रसाद के लिए बल्कि इसकी लकड़ी से बनी माला का जप के लिए विशेष रूप से करते हैं। मान्यता है कि तुलसी तुलसी की माला धारण करने और भगवान विष्णु और कृष्ण की कृपा प्राप्त होती है और इससे जप करने पर साधक के यश और कीर्ति में वृद्धि होती है। कई यज्ञ करने के बारबर पुण्य प्रदान करने वाली इस माला को धारण करने के लिए तमाम तरह के नियम-संयम का पालन करना पड़ता है। 

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Haldi Ki Mala

हल्दी की माला  

हिंदू धर्म में किसी भी पूजा, शुभ कार्य आदि में हल्दी का विशेष रूप से प्रयोग किया जाता है। भोजन में प्रयोग लाई जाने वाली हल्दी सेहत से ही नहीं सौभाग्य से भी जुड़ी हुई है। भगवान श्री गणेश और देवगुरु बृहस्पति हल्दी की माला से जप करने पर शीघ्र प्रसन्न होते हैं। संतान एवं ज्ञान की प्राप्ति के लिए इस माला से विशेष रूप से जप किया जाता है। हल्दी की माला से मां बगलामुखी का जप करने से उनकी शीघ्र कृपा होती है।

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Chandan Ki Mala

चंदन की माला 

देवी-देवताओं के तिलक के लिए विशेष रूप से प्रयोग में लाए जाने वाले चंद की तासीर ठंडी होती है। प्रसाद के रूप में माथे पर लगाया जाने वाला चंदन मन और तन दोनों को शीतलता प्रदान कर दैवीय कृपा दिलाता है। इसी चंदन की माला का वैष्णव परंपरा में साधना के दौरान मंत्र जप में विशेष रूप से प्रयोग किया जाता है। जैसे शक्ति की साधना में लाल चंदन की माला से तो वहीं भगवान कृष्ण के मंत्र का जप सफेद चंदन की माला से किया जाता है। इस माला के मंत्र जप से मनोकामना बहुत जल्दी पूर्ण होती है। 

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