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Pitru Paksha 2023: पंडित उपलब्ध न होने पर कैसे करें पिंडदान? यहां जानिए जरूरी नियम
Mon, 02 Oct 2023 03:15 PM IST
आशिकी पटेल
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: आशिकी पटेल
Updated Mon, 02 Oct 2023 03:15 PM IST
सार
Pitru Paksha 2023: भगवान सूर्य को जगत का पंडित कहा गया है। इसलिए शास्त्रों के अनुसार, यदि पंडित नहीं है तो सूर्य को ही पंडित मानते हुए पितरों के मोक्ष के लिए पिंडदान किया जा सकता है।
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Pitru Paksha 2023: पंडित नहीं तो सूर्यदेव
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पं. ज्ञानदेव आचार्य
Pitru Paksha 2023: शास्त्रों में किसी पंडित द्वारा ही पिंडदान कराए जाने का विधान है, लेकिन यदि पंडित उपलब्ध न हो तो आप क्या करेंगे? ऐसे में हमारे शास्त्रों ने स्वयं भी पिंडदान करने का अधिकार दिया है। भगवान सूर्य को जगत का पंडित कहा गया है। पंडित का तात्पर्य है परम ब्रह्मज्ञानी और सूर्य से बड़ा ज्ञानी किसी और को नहीं माना गया है। इसलिए सूर्य को पंडित की संज्ञा दी गई है। ऐसे में भगवान सूर्य को ही पंडित मानते हुए पितरों के मोक्ष के लिए पिंडदान किया जा सकता है।
इसके लिए किसी भी पावन तीर्थ स्थल पर जल धारा में खड़े होकर हाथ में जौ, तिल, चावल, दाल लेकर जल के साथ पितृ आत्माओं का नाम लेकर भगवान सूर्य को अर्पित करें। कम-से-कम ग्यारह बार प्रत्येक पितृ आत्मा के लिए अंजुलि प्रदान करें। इसके अलावा जल में कच्चा दूध, चावल के लड्डू, अदरक, सूखे आंवले और कच्ची सूत के धागे बहते जल में प्रवाहित करें। दीपदान भी करें और तिलक, अक्षत, पुष्प और मिठाई भी अर्पित करें। पितरों के नाम से एक-एक नारियल भी जल में प्रवाहित करें। पिंडदान करने से पहले इस बात का अवश्य ध्यान रखें कि शरीर पर सिले हुए वस्त्र धारण न करें। श्राद्ध कर्ता को स्नान करके पवित्र होकर धुली हुई धोती धारण करनी चाहिए।
Pitru Paksha 2023: पाना चाहते हैं पूर्वजों की कृपा, तो पितृपक्ष में करें इन नियमों का पालन
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सफेद या पीले वस्त्र
पिंडदान करने के लिए सफेद या पीले वस्त्र ही धारण करें। वैसे तो पिंडदान करने का अधिकार पुरुषों को ही है, लेकिन यदि किसी परिवार में पिंडदान करने के लिए पुरुष नहीं हैं, तो महिलाएं भी संकल्पित श्राद्ध और पिंडदान कर सकती हैं। मगर पिंडदान करते समय महिलाओं को भी सफेद या पीले वस्त्र धारण करने चाहिए।
पितृपक्ष में क्या करें?
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Pitru Paksha 2023: शास्त्रों में किसी पंडित द्वारा ही पिंडदान कराए जाने का विधान है, लेकिन यदि पंडित उपलब्ध न हो तो आप क्या करेंगे? ऐसे में हमारे शास्त्रों ने स्वयं भी पिंडदान करने का अधिकार दिया है। भगवान सूर्य को जगत का पंडित कहा गया है। पंडित का तात्पर्य है परम ब्रह्मज्ञानी और सूर्य से बड़ा ज्ञानी किसी और को नहीं माना गया है। इसलिए सूर्य को पंडित की संज्ञा दी गई है। ऐसे में भगवान सूर्य को ही पंडित मानते हुए पितरों के मोक्ष के लिए पिंडदान किया जा सकता है।
इसके लिए किसी भी पावन तीर्थ स्थल पर जल धारा में खड़े होकर हाथ में जौ, तिल, चावल, दाल लेकर जल के साथ पितृ आत्माओं का नाम लेकर भगवान सूर्य को अर्पित करें। कम-से-कम ग्यारह बार प्रत्येक पितृ आत्मा के लिए अंजुलि प्रदान करें। इसके अलावा जल में कच्चा दूध, चावल के लड्डू, अदरक, सूखे आंवले और कच्ची सूत के धागे बहते जल में प्रवाहित करें। दीपदान भी करें और तिलक, अक्षत, पुष्प और मिठाई भी अर्पित करें। पितरों के नाम से एक-एक नारियल भी जल में प्रवाहित करें। पिंडदान करने से पहले इस बात का अवश्य ध्यान रखें कि शरीर पर सिले हुए वस्त्र धारण न करें। श्राद्ध कर्ता को स्नान करके पवित्र होकर धुली हुई धोती धारण करनी चाहिए।
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Pitru Paksha 2023: पाना चाहते हैं पूर्वजों की कृपा, तो पितृपक्ष में करें इन नियमों का पालन
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सफेद या पीले वस्त्र
पिंडदान करने के लिए सफेद या पीले वस्त्र ही धारण करें। वैसे तो पिंडदान करने का अधिकार पुरुषों को ही है, लेकिन यदि किसी परिवार में पिंडदान करने के लिए पुरुष नहीं हैं, तो महिलाएं भी संकल्पित श्राद्ध और पिंडदान कर सकती हैं। मगर पिंडदान करते समय महिलाओं को भी सफेद या पीले वस्त्र धारण करने चाहिए।
पितृपक्ष में क्या करें?
- पशु-पक्षियों को भोजन कराएं। गरीबों और ब्राह्मणों को सामर्थ्य के अनुसार दान करें।
- घर में किसी भी प्रकार के शुभ कार्य या नए कार्य का शुभारंभ श्राद्ध के दौरान नहीं करना चाहिए।
- पितृ स्तोत्र का पाठ करें। इससे भी पितर प्रसन्न होते हैं।
- धर्म ग्रंथों के अनुसार, तर्पण का जल सूर्योदय से आधे प्रहर तक अमृत, एक प्रहर तक मधु, डेढ़ प्रहर तक दुग्ध, साढ़े तीन प्रहर तक जल रूप से पितृ को प्राप्त होता है।
- तिल, कुश सहित जल हाथ में लेकर पितृतीर्थ यानी अंगूठे की ओर से धरती पर छोड़ने से पितरों को तृप्ति मिलती है।