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Navratri 2025 Kanya Pujan: अष्टमी-नवमी पर कन्या पूजन का महत्व, जानिए विधि और नियम

Sat, 27 Sep 2025 12:21 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Sat, 27 Sep 2025 12:21 PM IST
सार

Navratri 2025 Kanya Pujan: शास्त्रों के अनुसार नवरत्रि के अंतिम दिनों, विशेषकर अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या पूजन का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन बालिकाओं को देवी स्वरूप मानकर उनकी पूजा करने से भक्त को अपार पुण्य और मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
 

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Navratri 2025 Kanya Pujan Significance On Ashtami and Navami Kanya Pujan Importance
navratri kanya pujan - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Navratri 2025 Kanya Pujan:   नवरत्रि का पर्व देवी शक्ति की उपासना का विशेष अवसर है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। शास्त्रों के अनुसार नवरत्रि के अंतिम दिनों, विशेषकर अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या पूजन का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन बालिकाओं को देवी स्वरूप मानकर उनकी पूजा करने से भक्त को अपार पुण्य और मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
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नवरत्रि में कन्या पूजन से जुड़ी पौराणिक कथा
पौराणिक शास्त्रों के अनुसार, इंद्र देव ने ब्रह्मा जी के कहने पर कन्या पूजन किया था। दरअसल, इंद्रदेव देवी मां को प्रसन्न करना चाहते थे। अपनी इच्छा को लेकर इंद्रदेव ब्रह्मा जी के पास पहुंचे और उन्हें माता दुर्गा को प्रसन्न करने का उपाय पूछा। ब्रह्मा जी ने इंद्रदेव से कहा कि, देवी माता को प्रसन्न करने के लिए आपको कन्याओं का पूजन करना चाहिए और उन्हें भोजन कराना चाहिए। ब्रहाा जी की सलाह के बाद इंद्रदेव ने माता की विधि-विधान से पूजा करने के बाद कुंवारी कन्याओं का पूजन किया और उन्हें भोजन करवाया। इंद्रदेव के सेवा भाव को देखकर माता प्रसन्न हुईं और उन्हें आशीर्वाद दिया। ऐसा माना जाता है कि, तभी से कन्या पूजन की परंपरा शुरू हुई।
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कन्या पूजन की विधि
कन्याओं का आमंत्रण – अष्टमी या नवमी की सुबह 2 से 9 वर्ष की कन्याओं को घर बुलाया जाता है। परंपरा के अनुसार, इनके साथ एक छोटे बालक को भी आमंत्रित करना शुभ माना गया है, जिसे लंगूर कहा जाता है।
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पांव धोना और आसन देना – घर आने के बाद सबसे पहले कन्याओं के पाँव धोकर उन्हें स्वच्छ आसन पर बैठाया जाता है। यह भाव प्रकट करता है कि उन्हें देवी का स्वरूप मानकर पूजित किया जा रहा है।

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पूजन और तिलक – कन्याओं को अक्षत, पुष्प, रोली और चंदन से तिलक कर पूजा की जाती है। इसके बाद उनकी आरती उतारी जाती है। इस समय ‘या देवी सर्वभूतेषु कुमारी रूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः’ मंत्र का जप करना विशेष फलदायी माना गया है।


भोजन कराना – कन्याओं को पूड़ी, हलवा, काला चना और खीर जैसे व्यंजन परोसे जाते हैं। यह प्रसाद स्वरूप भोजन उन्हें प्रसन्न करता है और इसे अत्यंत शुभ माना जाता है।

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उपहार और दक्षिणा – भोजन के बाद कन्याओं को फल, मिठाई, वस्त्र, चुनरी, खिलौने या उनकी रुचि के अनुसार उपहार दिए जाते हैं। साथ ही, दक्षिणा देकर उन्हें आदरपूर्वक विदा किया जाता है।

कन्या पूजन में ध्यान रखने योग्य बातें
  • कन्याओं को आमंत्रित करते समय पवित्र भाव और स्वच्छता का ध्यान रखें।
  • पूजा के दौरान बालिकाओं को स्नेह और सम्मान दें, किसी प्रकार की उपेक्षा न करें।
  • भोजन सात्विक और स्वच्छ होना चाहिए। तामसिक चीजों का सेवन इस दिन पूर्णत: वर्जित है।
  • उपहार देते समय बच्चों की खुशी का ध्यान रखें और उन्हें प्रसन्न मन से विदा करें।
  • कन्या पूजन केवल परंपरा के निर्वाह के लिए न करें, बल्कि सच्चे भाव से करें।
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