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आज मना लें पितरों को, वर्ना रूठ कर चले जाएंगे पितृलोक

Fri, 04 Oct 2013 08:28 AM IST
टीम डिजिटल
टीम डिजिटल Updated Fri, 04 Oct 2013 08:28 AM IST
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last day of pitri paksha and their importance

आज है पितृ विसर्जनी अमावस्या। शास्त्रों में कहा गया है कि आज के दिन शाम तक पितर धरती पर रहते हैं। शाम होने पर पितर अपने लोक लौट जाते हैं। आज के दिन का जो लोग लाभ नहीं उठाते हैं उन्हें साल भर पितरों की नाराजगी के कारण मानसिक, आर्थिक एवं शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

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इस दिन उन सभी मृतकों का श्राद्घ किया जाता है जिनकी अकाल मृत्यु हुई हो या जिनकी मृत्यु की तिथि की जानकारी नही हो। इसदिन सभी पितर अपने परिजनों के घर के द्वार पर बैठे रहते हैं। जो व्यक्ति इन्हें अन्न जल प्रदान करता है उससे प्रसन्न होकर पितर खुशी-खुशी आशीर्वाद देकर अपने लोक लौट जाते हैं।
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इस मौके का लाभ उठाना चाहिए और पितरों को प्रसन्न करने के लिए आज उनका श्राद्ध और तर्पण अवश्य करना चाहिए। अगर ऐसा नहीं करते हैं तो शास्त्रों में बताये गये कुछ सामान्य उपायों से भी पितरों को प्रसन्न कर सकते हैं।
 
मेहमानों को भोजन कराएं
आज आपके घर पर कोई भिखारी अथवा अतिथि आये तो उसे भोजन अवश्य कराएं। शास्त्रों में कहा गया है कि पितृ विसर्जनी अमावस्या के दिन अपनी संतान के हाथ से अन्न जल पाने के लिए पितृगण कोई भी रूप धारण करके संतान के घर आते हैं। पितृ अमावस्या के दिन संतान से अन्न जल नहीं मिलने पर पितर दुःखी होते हैं।
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ब्राह्मणों को भोजन
शास्त्रों में कहा गया है कि ब्राह्मण, कौआ, गाय, कुत्ता, और बिल्ली को भोजन देने से भोजन का अंश पितरों तक पहुंच जाता है। पितरों को प्रसन्न करने के लिए आज अपनी इच्छानुसार किसी को भी भोजन कराएं। सर्वपितृ विसर्जनी अमावस्या की खास बात यह भी है कि जिन पितरों की मृत्यु की तिथि नहीं मालूम होती है। इस दिन उन सभी के नाम से श्राद्ध किया जा सकता है।


सर्व पितृ विसर्जन अमावस्या के दिन ब्रह्मण अथवा अन्य चार जीवों को भोजन करवाने से सभी पितर संतुष्ट होते हैं। शास्त्रों के अनुसार जिनकी कुण्डली में पितृ दोष है उन्हें पितरों को प्रसन्न करने के लिए ब्रह्मणों को भोजन करना चाहिए। अपनी श्रद्धानुसार दान देकर इन्हें संतुष्ट करना चाहिए। इससे साल भर पितृ दोष के कारण जीवन में आने वाली कठिनाईयों में कमी आती है।

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