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Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   kalashtami may 2020 shree bhairav chalisa lyrics in hindi font

कालाष्टमी के दिन भैरव बाबा की इस चालीसा को पढ़ने से पूरी होती हैं मनोकामनाएं

Thu, 14 May 2020 07:55 AM IST
योगेश जोशी धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: योगेश जोशी Updated Thu, 14 May 2020 07:55 AM IST
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kalashtami may 2020 shree bhairav chalisa lyrics in hindi font
श्री भैरव चालीसा

श्री भैरव चालीसा

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  • ।। दोहा ।।

श्री गणपति, गुरु गौरि पद, प्रेम सहित धरि माथ ।
चालीसा वन्दन करों, श्री शिव भैरवनाथ।।
श्री भैरव संकट हरण, मंगल करण कृपाल ।
श्याम वरण विकराल वपु, लोचन लाल विशाल।।

  • ।। चौपाई।।

जय जय श्री काली के लाला । जयति जयति काशी।।

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जयति बटुक भैरव जय हारी । जयति काल भैरव बलकारी।।
जयति सर्व भैरव विख्याता । जयति नाथ भैरव सुखदाता।।
भैरव रुप कियो शिव धारण । भव के भार उतारण कारण।।
भैरव रव सुन है भय दूरी । सब विधि होय कामना पूरी ।।
शेष महेश आदि गुण गायो । काशी-कोतवाल कहलायो।।
जटाजूट सिर चन्द्र विराजत । बाला, मुकुट, बिजायठ साजत।।
कटि करधनी घुंघरु बाजत । दर्शन करत सकल भय भाजत।।
जीवन दान दास को दीन्हो । कीन्हो कृपा नाथ तब चीन्हो।।
वसि रसना बनि सारद-काली । दीन्यो वर राख्यो मम लाली।।
धन्य धन्य भैरव भय भंजन । जय मनरंजन खल दल भंजन।।
कर त्रिशूल डमरु शुचि कोड़ा । कृपा कटाक्ष सुयश नहिं थोड़ा।।
जो भैरव निर्भय गुण गावत । अष्टसिद्घि नवनिधि फल पावत।।
रुप विशाल कठिन दुख मोचन । क्रोध कराल लाल दुहुं लोचन।।
अगणित भूत प्रेत संग डोलत । बं बं बं शिव बं बं बोतल।।
रुद्रकाय काली के लाला । महा कालहू के हो काला।।
बटुक नाथ हो काल गंभीरा । श्वेत, रक्त अरु श्याम शरीरा।।
करत तीनहू रुप प्रकाशा । भरत सुभक्तन कहं शुभ आशा।।
रत्न जड़ित कंचन सिंहासन । व्याघ्र चर्म शुचि नर्म सुआनन।।
तुमहि जाई काशिहिं जन ध्यावहिं । विश्वनाथ कहं दर्शन पावहिं।।
जय प्रभु संहारक सुनन्द जय । जय उन्नत हर उमानन्द जय।।
भीम त्रिलोकन स्वान साथ जय । बैजनाथ श्री जगतनाथ जय।।
महाभीम भीषण शरीर जय । रुद्र त्र्यम्बक धीर वीर जय ।।
अश्वनाथ जय प्रेतनाथ जय । श्वानारुढ़ सयचन्द्र नाथ जय।
निमिष दिगम्बर चक्रनाथ जय । गहत अनाथन नाथ हाथ जय ।।
त्रेशलेश भूतेश चन्द्र जय । क्रोध वत्स अमरेश नन्द जय ।।
श्री वामन नकुलेश चण्ड जय । कृत्याऊ कीरति प्रचण्ड जय ।।
रुद्र बटुक क्रोधेश काल धर । चक्र तुण्ड दश पाणिव्याल धर ।।
करि मद पान शम्भु गुणगावत । चैंसठ योगिन संग नचावत ।।
करत कृपा जन पर बहु ढंगा । काशी कोतवाल अड़बंगा ।।
देयं काल भैरव जब सोटा । नसै पाप मोटा से मोटा ।।
जाकर निर्मल होय शरीरा। मिटै सकल संकट भव पीरा।।
श्री भैरव भूतों के राजा । बाधा हरत करत शुभ काजा।।
ऐलादी के दुःख निवारयो । सदा कृपा करि काज सम्हारयो। ।
सुन्दरदास सहित अनुरागा । श्री दुर्वासा निकट प्रयागा ।।
श्री भैरव जी की जय लेख्यो । सकल कामना पूरण देख्यो।।

  • दोहा

जय जय जय भैरव बटुक, स्वामी संकट टार ।

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कृपा दास पर कीजिये, शंकर के अवतार।।
जो यह चालीसा पढ़े, प्रेम सहित सत बार ।
उस घर सर्वानन्द हों, वैभव बड़े अपार।।

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