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भगवान जगन्नाथ को क्यों लगाया जाता है खिचड़ी का भोग, पढ़ें मां कर्मा बाई की ममता से जुड़ी कथा
Thu, 26 Jun 2025 12:44 PM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Thu, 26 Jun 2025 12:44 PM IST
सार
Jagannath Puri 2025: श्रीजगन्नाथ मंदिर में की जाने वाली अधूरी मूर्ति की पूजा हो और हर वर्ष होने वाली रथयात्रा या फिर कर्मा बाई जैसी भक्ति से भरी कथाएं- सब भगवान जगन्नाथ की ‘भाव के भूखे’स्वरूप को दर्शाती हैं।
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- फोटो : पीटीआई (फाइल)
विस्तार
Jagannath Puri Rath 2025: भारतवर्ष के चार धामों में से एक पुरी स्थित श्रीजगन्नाथ धाम हिंदू धर्म का अत्यंत पवित्र तीर्थस्थल है। यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसके साथ जुड़े चमत्कार और पौराणिक कथाएं भी भक्तों को आकर्षित करती हैं। उड़ीसा राज्य के तटवर्ती नगर पुरी में स्थित यह मंदिर भगवान श्रीकृष्ण के अवतार श्रीजगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा को समर्पित है। यह माना जाता है कि भगवान स्वयं यहां निवास करते हैं और अपने भक्तों के प्रेम से अत्यधिक प्रभावित होते हैं। मंदिर में की जाने वाली अधूरी मूर्ति की पूजा हो, हर वर्ष होने वाली रथयात्रा या फिर कर्मा बाई जैसी भक्ति से भरी कथाएं- सब भगवान जगन्नाथ की ‘भाव के भूखे’स्वरूप को दर्शाती हैं। ऐसी ही एक पौराणिक कथा है भगवान श्रीकृष्ण की परम भक्त कर्मा बाई जी की, जिन्होंने अपने प्रेम और निष्ठा से भगवान को अपने घर बुला लिया और खिचड़ी खिलाकर प्रभु को प्रसन्न कर दिया।
क्या है खिचड़ी के भोग की पौराणिक कथा
1. भक्त कर्मा बाई की प्रेम भक्ति और खिचड़ी का प्रारंभ
कर्मा बाई जी जगन्नाथ पुरी में भगवान श्रीकृष्ण को पुत्र रूप में भजती थीं। एक दिन उन्होंने प्रभु को अपने हाथों से कुछ विशेष बनाकर खिलाने की इच्छा व्यक्त की। भगवान ने कहा- "माँ, जो भी बनाया हो, दे दो, मुझे बहुत भूख लगी है।" उस दिन कर्मा बाई ने खिचड़ी बनाई थी। भगवान बड़े चाव से खिचड़ी खा गए और बोले-"माँ, मुझे तो खिचड़ी बहुत पसंद आई, अब तुम रोज यही बनाना।" इस प्रकार, रोज प्रभु सुबह-सुबह आकर खिचड़ी का भोग लगाने लगे।
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2. महात्मा की आपत्ति और कर्मा बाई की दुविधा
एक दिन एक महात्मा कर्मा बाई के घर आए। उन्होंने देखा कि कर्मा बाई बिना स्नान-पूजन के सीधे खिचड़ी बना रही हैं। उन्होंने टोका कि यह नियम विरुद्ध है। कर्मा बाई ने उत्तर दिया-"महाराज, स्वयं भगवान रोज भूखे आते हैं, इसलिए पहले उनके लिए खिचड़ी बनाती हूँ।" लेकिन महात्मा ने उन्हें समझाया कि पहले स्नान और पूजा होनी चाहिए। अगले दिन कर्मा बाई ने वैसा ही किया।
अगले दिन जब भगवान आए तो उन्हें खिचड़ी मिलने में देर हुई। जब खिचड़ी मिली, तो जल्दी में खाकर बिना पानी पिए मंदिर लौट गए। मंदिर में पुजारी ने देखा कि भगवान के मुख पर खिचड़ी लगी है। पूछने पर प्रभु बोले—"मैं रोज कर्मा बाई के घर खिचड़ी खाकर आता हूँ, लेकिन आज देरी हो गई। पुजारी जी, जाकर उस महात्मा को समझाइए कि उन्होंने मेरी माँ को गलत समझाया।"
एक दिन कर्मा बाई के प्राण निकल गए। जब मंदिर के पट खुले तो भगवान की आँखों में आँसू थे। पुजारी ने पूछा तो प्रभु बोले-"मेरी माँ आज इस लोक को छोड़कर चली गई है। अब मुझे कौन खिचड़ी बनाकर खिलाएगा?" पुजारी ने वचन दिया-"प्रभु, आज से आपको पहले खिचड़ी का ही भोग लगेगा।" तभी से आज तक श्रीजगन्नाथ मंदिर में खिचड़ी का भोग लगाया जाता है।
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क्या है खिचड़ी के भोग की पौराणिक कथा
1. भक्त कर्मा बाई की प्रेम भक्ति और खिचड़ी का प्रारंभ
कर्मा बाई जी जगन्नाथ पुरी में भगवान श्रीकृष्ण को पुत्र रूप में भजती थीं। एक दिन उन्होंने प्रभु को अपने हाथों से कुछ विशेष बनाकर खिलाने की इच्छा व्यक्त की। भगवान ने कहा- "माँ, जो भी बनाया हो, दे दो, मुझे बहुत भूख लगी है।" उस दिन कर्मा बाई ने खिचड़ी बनाई थी। भगवान बड़े चाव से खिचड़ी खा गए और बोले-"माँ, मुझे तो खिचड़ी बहुत पसंद आई, अब तुम रोज यही बनाना।" इस प्रकार, रोज प्रभु सुबह-सुबह आकर खिचड़ी का भोग लगाने लगे।
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एक दिन एक महात्मा कर्मा बाई के घर आए। उन्होंने देखा कि कर्मा बाई बिना स्नान-पूजन के सीधे खिचड़ी बना रही हैं। उन्होंने टोका कि यह नियम विरुद्ध है। कर्मा बाई ने उत्तर दिया-"महाराज, स्वयं भगवान रोज भूखे आते हैं, इसलिए पहले उनके लिए खिचड़ी बनाती हूँ।" लेकिन महात्मा ने उन्हें समझाया कि पहले स्नान और पूजा होनी चाहिए। अगले दिन कर्मा बाई ने वैसा ही किया।
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3. प्रभु की व्याकुलता और पुजारी को सत्य का ज्ञानअगले दिन जब भगवान आए तो उन्हें खिचड़ी मिलने में देर हुई। जब खिचड़ी मिली, तो जल्दी में खाकर बिना पानी पिए मंदिर लौट गए। मंदिर में पुजारी ने देखा कि भगवान के मुख पर खिचड़ी लगी है। पूछने पर प्रभु बोले—"मैं रोज कर्मा बाई के घर खिचड़ी खाकर आता हूँ, लेकिन आज देरी हो गई। पुजारी जी, जाकर उस महात्मा को समझाइए कि उन्होंने मेरी माँ को गलत समझाया।"
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4. कर्मा बाई की विदाई और प्रभु की भावुकताएक दिन कर्मा बाई के प्राण निकल गए। जब मंदिर के पट खुले तो भगवान की आँखों में आँसू थे। पुजारी ने पूछा तो प्रभु बोले-"मेरी माँ आज इस लोक को छोड़कर चली गई है। अब मुझे कौन खिचड़ी बनाकर खिलाएगा?" पुजारी ने वचन दिया-"प्रभु, आज से आपको पहले खिचड़ी का ही भोग लगेगा।" तभी से आज तक श्रीजगन्नाथ मंदिर में खिचड़ी का भोग लगाया जाता है।