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अहोई अष्टमी पर दुर्लभ संयोग, संतान की खुशहाली और समृद्धि के लिए जरूर करें ये उपाय

Fri, 30 Oct 2026 05:19 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Fri, 30 Oct 2026 05:19 PM IST
सार

संतान की सुख-समृद्धि और संपन्नता के लिए हर वर्ष कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को अहोई अष्टमी का त्योहार मनाया जाता है। अहोई अष्टमी पर कुछ उपायों को करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।

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Ahoi Ashtami 2026 Vrat Puja Muhurat Upay Importance and Significance in Hindi
अहोई अष्टमी उपाय - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

हिंदू धर्म में हर वर्ष कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जानी वाली अहोई अष्टमी का विशेष महत्व होता है। संतान की खुशहाली और परिवार में सुख-समृद्धि की कामना के लिए अहोई अष्टमी का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन माताएं संतान की लंबी आयु ,बेहतर स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना के लिए अहोई माता की पूजा करती हैं। अहोई अष्टमी पर माताएं दिनभर उपवास रखती हैं, फिर पूजा शुभ मुहूर्त में पूजा और कथा सुनती है। इसके अलावा इस दिन तारों को दर्शन करने और अर्घ्य देकर व्रत खोलने की परंपरा हैं। आइए जानते हैं तिथि, पूजा मुहूर्त और उपाय।
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कब है अहोई अष्टमी 2026?
द्रिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 01 नवंबर को दोपहर 2 बजकर 51 मिनट पर शुरू होगी। और इसका अंत 2 नवंबर 2026 को दोपहर 01 बजकर 10 मिनट तक रहेगा। इस तरह से अहोई अष्टमी का व्रत 1 नवंबर को रखा जाएगा। 
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अहोई अष्टमी पूजा शुभ मुहूर्त 2026
  • पूजा का शुभ मुहूर्त- शाम 4 बजकर 59 मिनट से लेकर 6 बजकर 15 मिनट तक
  • तारों के दर्शन का समय- शाम 5 बजकर 22 मिनट के करीब 
  • चंद्रोदय का समय- रात 11 बजकर 05 मिनट पर
अहोई अष्टमी पर शुभ संयोग
इस बार अहोई अष्टमी पर कई तरह के शुभ संयोगों का निर्माण होने वाला है। अहोई अष्टमी पर पुष्य नक्षत्र का संयोग बन रहा है, वहीं चंद्रमा कर्क राशि में रहेगा। पुष्य नक्षत्र को ज्योतिष में बहुत ही शुभ और मंगलकारी नक्षत्रों में माना जाता है। 
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अहोई अष्टमी के उपाय
- अहोई अष्टमी पर संतान की तरक्की और सुख-समृद्धि के लिए दूध और चीना का उपाय बहुत ही शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पर्व अहोई माता को दूध और चीन का भोग लगाना बहुत ही शुभ और मंगलकारी माना जाता है। अहोई माता की पूजा के बाद इस प्रसाद को संतान को पिलाएं। ऐसा करने से संतान की शिक्षा में आ रही अड़चनें दूर होंगी और पढ़ाई में मन लगेगा। 

- बुरी नजर से बचने के लिए और संतान की खुशहाली के लिए अहोई अष्टमी पर माता को पूरी और हलवे का भोग लगाएं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसे करने से संतान पर नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है। 


- संतान की लंबी आयु और मंगलकामना के लिए अहोई अष्टमी पर व्रत रखें और विधि-विधान के साथ माता की पूजा करें। फिर शाम को पूजा, कथा और तारों के दर्शन करते हुए अर्घ्य दें। इससे संतान को जीवन में सुख-समृद्धि और महत्वपूर्ण लक्ष्य हासिल होते हैं। 

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