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हनुमान चालीसा का पाठ करने में कहीं आप भी नहीं करते हैं ऐसी गलतियां? जानें पढ़ने का सही तरीका और फायदे
Sat, 12 Apr 2025 11:45 AM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Sat, 12 Apr 2025 11:45 AM IST
सार
हनुमान चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति को साहस, बल, पराक्रम, बुद्धि, विद्या और कौशल की प्राप्ति तो होती ही है साथ जीवन में आने वाले क्लेश, विकार और हर एक तरह की बाधाएं भी दूर हो जाती हैं।
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हनुमान चालीसा पाठ करने की क्या है सही विधि
- फोटो : adobe stock
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विस्तार
Hanuman Chalisa: आज चैत्र माह की पूर्णिमा तिथि है और इस तिथि पर रामभक्त हनुमानजी के जन्मोत्सव के रूप में देशभर में मनाया जाता है। हिंदू धर्म में हनुमानजी की विशेष रूप से पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हनुमानजी को संकटमोचन और कलयुग का देवता माना जाता है और आज भी इस पृथ्वी पर मौजूद हैं। हिंदू धर्म में हनुमानजी को प्रसन्न करने और हर तरह की बाधाओं और संकटों का निवारण करने के लिए हनुमान चालीसा के पाठ का विशेष महत्व होता है। नियमित रूप से हनुनाम चालीसा का पाठ करना बहुत ही चमत्कारी माना गया है। हनुमान चालीसा की रचना गोस्वामी तुलसीदास जी ने की थी। इस चालीसा में गोस्वामी तुलसीदास जी ने हनुमानजी के साहस, पराक्रम और शौर्य का बहुत ही सुंदर वर्णन किया है। हनुमान चालीसा की चमत्कारी चौपाईयों का जाप करने से हर किसी को लाभकारी होता है। यह बात अब विज्ञान भी मनाने लगा है। अगर हनुमान चालीसा का पाठ सही तरीके से किया जाय तो इसके कई चमत्कारी लाभ मिलते हैं।
हनुमान चालीसा और विज्ञान
हिंदू धर्म में हनुमान चालीसा के पाठ का विशेष महत्व होता है। हिंदू धर्म का पालन करने वाले हर एक व्यक्ति के यहां हनुमान चालीसा का पाठ जरूर होता है या फिर सुना जाता है। हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार हनुमान चालीसा को बहुत ही चमत्कारी माना गया है, इसका पाठ करने से व्यक्ति को साहस, बल, पराक्रम, बुद्धि, विद्या और कौशल की प्राप्ति तो होती ही है साथ जीवन में आने वाले क्लेश, विकार और हर एक तरह की बाधाएं भी दूर हो जाती हैं। यह बात अब विज्ञान की कसौटी पर खरा उतर रहा है।
- आज के वैज्ञानिक और डॉक्टर हनुमान चालीसा को यौगिक ब्रीदिंग मानते हैं। इनका मानना है कि हनुमान न सिर्फ धार्मिक महत्व है बल्कि इसके वैज्ञानिक फायदे भी हैं। कई वैज्ञानिक अध्ययनों में यह बात साबित हो चुकी है कि हनुमान चालीसा का पाठ करने से सांसों के माध्यम से शरीर के कई तरह सिस्टम ठीक हो जाते हैं।
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नासै रोग हरै सब पीरा। तुम रक्षक काहू को डरना।
नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति को रोगों और बीमारियों से मुक्ति मिलती हैं। हनुमान जी को सभी रोगों को हरने वाला देवता माना जाता है। कई वैज्ञानिक तथ्यों में यह बात सामने आई है कि हनुमान चालीसा का पाठ करने से यौगिक ब्रीदिंग से हमारे क्रोमोसोम के टेलीमियर्स की लंबाई बढ़ती है, जिसे व्यक्ति रोगों से मुक्त और लंबी आयु जीता है।
महावीर विक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी।। कंचन वरन विराज सुवेसा। कानन कुण्डल कुंचित केसा।।
हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै। काँधे मूँज जनेऊ साजै। शंकर सुवन केसरीनंदन। तेज प्रताप महा जग वन्दन।।
विद्यावान गुणी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर।। प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया।।
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। विकट रूप धरि लंक जरावा।। भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचंद्र के काज संवारे।।
लाय सजीवन लखन जियाये। श्रीरघुबीर हरषि उर लाये।। रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।। सनकादिक ब्रह्मादि मुनीशा। नारद सारद सहित अहीसा।।
जम कुबेर दिगपाल जहां ते। कवि कोविद कहि सके कहाँ ते।। तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा।।
तुम्हरो मंत्र विभीषन माना। लंकेश्वर भये सब जग जाना।। जुग सहस्र योजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।। दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।
राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे।। सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डरना।।
आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हांक तें कांपै।। भूत पिसाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै।।
नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा।। संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम वचन ध्यान जो लावै।।
सब पर राम तपस्वी राजा। तिनके काज सकल तुम साजा। और मनोरथ जो कोई लावै। सोई अमित जीवन फल पावै।।
चारों युग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा।। साधु-संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे।।
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस वर दीन जानकी माता।। राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा।।
तुम्हरे भजन राम को भावै। जनम-जनम के दुख बिसरावै।। अन्त काल रघुबर पुर जाई। जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई।।
और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेई सर्व सुख करई।। संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।
जै जै जै हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।। जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहिं बंदि महा सुख होई।।
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा।। तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय महँ डेरा।।
दोहा
पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।
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हनुमान चालीसा और विज्ञान
हिंदू धर्म में हनुमान चालीसा के पाठ का विशेष महत्व होता है। हिंदू धर्म का पालन करने वाले हर एक व्यक्ति के यहां हनुमान चालीसा का पाठ जरूर होता है या फिर सुना जाता है। हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार हनुमान चालीसा को बहुत ही चमत्कारी माना गया है, इसका पाठ करने से व्यक्ति को साहस, बल, पराक्रम, बुद्धि, विद्या और कौशल की प्राप्ति तो होती ही है साथ जीवन में आने वाले क्लेश, विकार और हर एक तरह की बाधाएं भी दूर हो जाती हैं। यह बात अब विज्ञान की कसौटी पर खरा उतर रहा है।
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- आज के वैज्ञानिक और डॉक्टर हनुमान चालीसा को यौगिक ब्रीदिंग मानते हैं। इनका मानना है कि हनुमान न सिर्फ धार्मिक महत्व है बल्कि इसके वैज्ञानिक फायदे भी हैं। कई वैज्ञानिक अध्ययनों में यह बात साबित हो चुकी है कि हनुमान चालीसा का पाठ करने से सांसों के माध्यम से शरीर के कई तरह सिस्टम ठीक हो जाते हैं।
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Hanuman Jayanti Wishes: संकट ते हनुमान छुडावै.. मन क्रम बचन ध्यान जो लावै, इन संदेशों से सभी को दें शुभकामनाएं
-हनुमानजी के नाम पवनसुत भी है। ऐसे में हनुमान चालीसा का पाठ करने से ऑक्सीजन का मात्रा का अच्छा नियंत्रण हमारे शरीर में पहुंचता है। हम हवा में खुली ऑक्सीजन के सहारे सांस लेते हैं। ऐसे में पवनसुत वीर हनुमान जी हनुमान चालीसा के माध्यम से हमारे साथ रहते हैं। दरअसल जब हम सामान्य रूप से रहते हैं और इस दौरान सांस लेते और छोड़ते हैं तो ऑक्सीजन हमारे फेफड़ों तक पहुंचती है, वहीं जब हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं तो इस दौरान जो चौपाईयां पढ़ते हैं उस दौरान सांसों का क्रम बेहतर तरीके से चलता है, जिससे फेफड़ों तक ऑक्सीजन बहुत ही अच्छे तरीके से पहुंचती हैं।Hanuman Janmotsav 2025: क्यों मंगलवार और शनिवार को ही होती है बजरंगबली की पूजा? जानें क्या है इससे जुड़ी कथा
- हनुमान चालीसा का पाठ करने के तरीके हैं, अगर सहीं ढ़ंग से इसका पाठ किया जाय तो इसका ज्यादा से ज्यादा फायदा शरीर को होता है। हनुमान चालीसा को जल्दी-जल्दी पढ़ने के बजाय चौपाईयों के अनुसार ही इसे पढ़ना चाहिए। हनुमान चालीसा पाठ करने में सांस अंदर खींचने, सांस रोकने फिर बाहर निकाले के एक चक्र में करीब 16 से 20 सेकंड का समय लेना चाहिए। इस तरह से हम 1 मिनट 3 बार सांस लेंगे। इस तरह से ऑक्सीजन अच्छी तरह से फेफड़ें तक पहुंचती है और शरीर सेहतमंद रहता है।Hanuman Janmotsav 2025 Live: हनुमान जन्मोत्सव के दिन बजरंगबली को प्रसन्न करने के लिए करें हनुमान चालीसा का पाठ
- हनुमान चालीसा में एक चौपाई आती है। " जय हनुमान ज्ञान गुण सागर। जय कपीश तिहुंलोक उजागर। रामदूत अतुलित बलधामा। अंजनी पुत्र पवनसुत नामा।" इस चौपाई का पाठ इस तरह करें। जय हनुमान ज्ञान गुण सागर- सांस खींचे। जय कपीश तिहुंलोक उजागर- सांस रोकें। रामदूत अतुलित बलधामा-सांस बाहर छोड़ें। अंजनी पुत्र पवनसुत नाम- सांस रोंके।नासै रोग हरै सब पीरा। तुम रक्षक काहू को डरना।
नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति को रोगों और बीमारियों से मुक्ति मिलती हैं। हनुमान जी को सभी रोगों को हरने वाला देवता माना जाता है। कई वैज्ञानिक तथ्यों में यह बात सामने आई है कि हनुमान चालीसा का पाठ करने से यौगिक ब्रीदिंग से हमारे क्रोमोसोम के टेलीमियर्स की लंबाई बढ़ती है, जिसे व्यक्ति रोगों से मुक्त और लंबी आयु जीता है।
हनुमान चालीसा
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुं लोक उजागर।। रामदूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।महावीर विक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी।। कंचन वरन विराज सुवेसा। कानन कुण्डल कुंचित केसा।।
हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै। काँधे मूँज जनेऊ साजै। शंकर सुवन केसरीनंदन। तेज प्रताप महा जग वन्दन।।
विद्यावान गुणी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर।। प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया।।
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। विकट रूप धरि लंक जरावा।। भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचंद्र के काज संवारे।।
लाय सजीवन लखन जियाये। श्रीरघुबीर हरषि उर लाये।। रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।। सनकादिक ब्रह्मादि मुनीशा। नारद सारद सहित अहीसा।।
जम कुबेर दिगपाल जहां ते। कवि कोविद कहि सके कहाँ ते।। तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा।।
तुम्हरो मंत्र विभीषन माना। लंकेश्वर भये सब जग जाना।। जुग सहस्र योजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।। दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।
राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे।। सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डरना।।
आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हांक तें कांपै।। भूत पिसाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै।।
नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा।। संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम वचन ध्यान जो लावै।।
सब पर राम तपस्वी राजा। तिनके काज सकल तुम साजा। और मनोरथ जो कोई लावै। सोई अमित जीवन फल पावै।।
चारों युग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा।। साधु-संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे।।
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस वर दीन जानकी माता।। राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा।।
तुम्हरे भजन राम को भावै। जनम-जनम के दुख बिसरावै।। अन्त काल रघुबर पुर जाई। जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई।।
और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेई सर्व सुख करई।। संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।
जै जै जै हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।। जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहिं बंदि महा सुख होई।।
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा।। तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय महँ डेरा।।
दोहा
पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।
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