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गंगा दशहरा पर बन रहा है महासंयोग, घर पर ही इस विधि से करें गंगा पूजन
Sat, 30 May 2020 08:58 PM IST
मुकेश कुमार
डिजिटल डेस्क, अमर उजाला, आगरा
डिजिटल डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sat, 30 May 2020 08:58 PM IST
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ganga dussehra 2020
- फोटो : अमर उजाला
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कोरोना संकट के बीच सोमवार को गंगा दशहरा का पर्व मनाया जाएगा। हालांकि इस बार लॉकडाउन के कारण गंगा के घाटों पर धार्मिक आयोजन नहीं हो सकेंगे। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार अपने-अपने घरों पर ही गंगा पूजन और जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करने से भी गंगा स्नान का फल प्राप्त होगा।
ज्योतिषाचार्य रामचंद्र शर्मा वैदिक ने बताया कि गंगाजी का अवतरण ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को हुआ था, जो गंगा दशहरा पर्व के नाम से प्रसिद्ध है। इस वर्ष गंगा दशहरा पर सात महायोगों का महासंयोग बन रहा है। सोमवार को दशमी तिथि दोपहर दो बजकर 57 मिनट तक रहेगी।
पौराणिक मान्यता अनुसार गंगाजी का अवतरण 10 महायोगों में हुआ था। ये महायोग ज्येष्ठ मास, शुक्ल पक्ष, दशमी तिथि, बुधवार, हस्त नक्षत्र, व्यतीपात योग, गर करण, आनन्द योग, कन्या राशि का चन्द्रमा व वृषभ राशि का सूर्य हैं। इन 10 महायोगों के साथ हस्त नक्षत्र व सोमवार का भी विशेष महत्व है।
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ज्योतिषाचार्य रामचंद्र शर्मा वैदिक ने बताया कि गंगाजी का अवतरण ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को हुआ था, जो गंगा दशहरा पर्व के नाम से प्रसिद्ध है। इस वर्ष गंगा दशहरा पर सात महायोगों का महासंयोग बन रहा है। सोमवार को दशमी तिथि दोपहर दो बजकर 57 मिनट तक रहेगी।
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पौराणिक मान्यता अनुसार गंगाजी का अवतरण 10 महायोगों में हुआ था। ये महायोग ज्येष्ठ मास, शुक्ल पक्ष, दशमी तिथि, बुधवार, हस्त नक्षत्र, व्यतीपात योग, गर करण, आनन्द योग, कन्या राशि का चन्द्रमा व वृषभ राशि का सूर्य हैं। इन 10 महायोगों के साथ हस्त नक्षत्र व सोमवार का भी विशेष महत्व है।
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ये हैं सात महायोग
ज्योतिषाचार्य रामचंद्र शर्मा वैदिक
- फोटो : अमर उजाला
इस वर्ष एक जून को 10 महायोगों में से सात महायोग सोमवार को उपस्थित हो रहे हैं। ये ज्येष्ठ मास, शुक्ल पक्ष, दशमी तिथि, हस्त नक्षत्र, गर करण, कन्या का चन्द्रमा व वृषभ राशि का सूर्य व दोपहर 1.16 बजे के बाद व्यतिपात योग गंगा दशहरा पर्व की शोभा को बढ़ा रहा है।
इन महायोगों में गंगा स्नान व पूजन से 10 प्रकार के पापों, तीन कायिक, चार वाचिक व तीन मानसिक पापों का नाश होता है। इसीलिए यह पर्व गंगा दशहरा के नाम से प्रसिद्ध है। गंगाजी के पूजन में 10 की संख्या का ही महत्व है। जैसे 10 पूजा उपचारों से पूजन, 10 ब्राह्मणों की पूजा व 10 दान। गंगा स्नान में 10 गोते लगाने से 10 प्रकार के पापों का नाश होता है।
ज्योतिषाचार्या रामचंद्र शर्मा वैदिक ने कहा कि इस वर्ष कोरोना महामारी के कारण गंगा घाट पर अनावश्यक भीड़ करने से बचें। अपने-अपने घरों पर ही गंगा मैया की पूजा करें और जल में गंगा जल मिलाकर स्नान करें। इससे गंगा स्नान का फल प्राप्त होगा।
इन महायोगों में गंगा स्नान व पूजन से 10 प्रकार के पापों, तीन कायिक, चार वाचिक व तीन मानसिक पापों का नाश होता है। इसीलिए यह पर्व गंगा दशहरा के नाम से प्रसिद्ध है। गंगाजी के पूजन में 10 की संख्या का ही महत्व है। जैसे 10 पूजा उपचारों से पूजन, 10 ब्राह्मणों की पूजा व 10 दान। गंगा स्नान में 10 गोते लगाने से 10 प्रकार के पापों का नाश होता है।
ज्योतिषाचार्या रामचंद्र शर्मा वैदिक ने कहा कि इस वर्ष कोरोना महामारी के कारण गंगा घाट पर अनावश्यक भीड़ करने से बचें। अपने-अपने घरों पर ही गंगा मैया की पूजा करें और जल में गंगा जल मिलाकर स्नान करें। इससे गंगा स्नान का फल प्राप्त होगा।