फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   chhath festival 2020 Who is the chhathi maiya know the story of Chhath Vrat

Chhath Puja 2020: जानें कौन हैं छठी मईया, छठ व्रत में की जाती है जिनकी पूजा, जानिए क्या है छठ व्रत की कथा

Fri, 06 Nov 2020 03:40 PM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Shashi Shashi Updated Fri, 06 Nov 2020 03:40 PM IST
विज्ञापन
chhath festival 2020 Who is the chhathi maiya know the story of Chhath Vrat
छठ पूजा 2020: यमुना घाट पर छठी मइया की पूजा करते श्रद्धालु - फोटो : अमर उजाला

कार्तिक मास की अमावस्या से 6 दिनों के बाद कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि में छठ का पर्व मनाया जाता है। इस बार छठ का पर्व 20 नवंबर को मनाया जाएगा। दिवाली के छठे दिन इस पर्व को मनाने के कारण भी इसे छठ पर्व कहा जाता है। यह पर्व चार दिनों तक मनाया जाता है। वैसे तो यह पर्व पूरे भारत वर्ष में मनाया जाता है, लेकिन इस व्रत को खासतौर पर बिहार में बहुत ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। छठ का व्रत अत्यंत कठिन होता है। छठ पर्व को महापर्व या महाव्रत भी कहते हैं। जानते हैं कौन हैं छठी मईया क्या और छठ पर्व की पौराणिक कथा...

विज्ञापन

जानें कौन हैं छठी मईया, छठ व्रत में की जाती है जिनकी पूजा 
छठ मईया को सूर्य देव की बहन माना जाता है। छठ के पर्व में इन्हीं की पूजा अर्चना की जाती है। यह भी कहा जाता है कि नवरात्रि में जिस षष्ठी देवी की पूजा की जाती है। मान्यता है कि छठ का व्रत करने से छठी मईया संतान को लंबी आयु का वर देती हैं। छठ पर्व में विशेषतौर पर सूर्य और जल को साक्षी मानकर पूजन किया जाता है। जीवन में जल और सूर्य की महत्ता के कारण छठ पर्व पर नदी, सरोवर आदि के किनारे सूर्य देव की आराधना करते हैं। इस व्रत को करने से संतान दीर्घायु होती है। संतान प्राप्ति के लिए भी यह व्रत किया जाता है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

पढ़िए छठ व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार प्रियव्रत नाम के एक राजा और उनकी पत्नी  मालिनी के कोई संतान नहीं थी। इस बात को लेकर राजा और उसकी पत्नी बहुत दुखी रहा करते थे। संतान प्राप्ति की इच्छा से उन्होंने महर्षि कश्यप द्वारा पुत्रेष्टि यज्ञ करवाया। इस यज्ञ के फलस्वरूप रानी गर्भवती ने गर्भ धारण कर लिया। 
नौ माह के पश्चात जब संतान सुख को प्राप्त करने का समय आया तो रानी को मरा हुआ पुत्र हुआ। इस बात का पता चलने पर राजा को अत्यधिक दुख हुआ। दुख और शोक के कारण राजा ने आत्म हत्या करने का मन बना लिया। लेकिन जैसे ही राजा ने आत्महत्या करने का प्रयास किया उनके सामने एक सुंदर देवी प्रकट हुईं।

विज्ञापन

देवी ने राजा को कहा कि मैं षष्टी देवी हूं। मैं लोगों को पुत्र का सौभाग्य प्रदान करती हूं। इसके अलावा जो सच्चे भाव से मेरी पूजा करता है, मैं उसके सभी प्रकार के मनोरथ को पूर्ण कर देती हूं। यदि तुम मेरी पूजा करोगे तो मैं तुम्हें पुत्र रत्न प्रदान करूंगी। देवी की आज्ञानुसार राजा और उनकी पत्नी ने कार्तिक शुक्ल की षष्टी तिथि के दिन देवी षष्टी की पूरे विधि-विधान से पूजा की। पूजा से प्रसन्न होकर देवी ने उन्हें संतान प्राप्ति का वर दिया जिसके फलस्वरुप राजा और उनकी पत्नी को पुत्ररत्न की प्राप्ति हुई। कहते हैं कि तभी से षष्ठी (छठी) तिथि को छठ पर्व पर छठ मईया का पूजन करके छठ पर्व मनाया जाता है।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed