फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Spirituality ›   Yog-Dhyan ›   Asana means to sit in the body without meditation, without stability

जानिए कौनसा आसन आपको देगा सबसे ज्यादा फायदा

Thu, 23 Nov 2017 08:59 AM IST
स्वामी प्रकाशमुनि
स्वामी प्रकाशमुनि Updated Thu, 23 Nov 2017 08:59 AM IST
विज्ञापन
Asana means to sit in the body without meditation, without stability

आसन का अर्थ किसी तरह का शारीरिक अभ्यास नहीं है। इसका अर्थ ध्यान के लिए शरीर को स्थिरता से बिना हिलाए-डुलाए बैठना है। आशय सिर्फ बैठने की विधि से नहीं, उस स्थान और वातावरण से है, जहां ध्यान किया जाए। पातंजल योगदर्शन की मानें, तो शरीर को थकाने वाले अभ्यासों से, स्थिरता और सुविधा से बैठने पर ज्यादा आध्यात्मिक लाभ होता है।

विज्ञापन


इन निर्देशों को मानें तो योग साधना के लिए सिद्धासन, सर्वांगासन, पद्म्सन आदि पैरों को मोड़ने-तोड़ने के विधि-विशेष को नहीं मानना चाहिए, बल्कि उस वातावरण का संकेत समझना चाहिए, जहां उपासना या ध्यान धारण किया जाना है। साधना में मन न लगने, जी ऊबने , चित्त के चंचल रहने की शिकायत साधकों को प्रायः रहती है। इसके आंतरिक कारणों के अलावा वातावरण का प्रभाव खासतौर पर रहता है।

विज्ञापन

Asana means to sit in the body without meditation, without stability

जिस श्रद्धा-विश्वास से साधना की जानी चाहिए, उसका समावेश न हुआ, तो साधन छुट-पुट कर्मकांडों के सहारे न हो सकेगा। कठ, श्वेताश्वतर, छांदोग्य आदि शंकराचार्य के भाष्य लिखे प्रमुख उपनिषदों स्वामी विवेकानंद के राजयोग, श्रीअरविंद के योग समन्वय  और योगदर्शन के पातंजल सूत्रों पर हरिहरानंद आरण्यक, स्वामी ओमानंद, तीर्थ स्वामी सत्यानंद सरस्वती आदि की टीकाओं में आसनों का कहीं इतना विस्तार नहीं है कि वही योग की चर्चा मान ली जाए।

आठ अंगोेें में से एक बहिरंग साधन के रूप में उल्लेखित आसन का संबंध आसानी से और बिना हिले-डुले बैठने से ही है। वह सिर्फ पैरों का नहीं पूरे शरीर का होता है। कमर सीधी, आंखें अधखुली, चित्त शांत और शरीर की स्थिति स्थिर रहनी चाहिए। मात्र ध्यान करना हो, तो दोनों हाथ गोदी में रहना चाहिए। जप और पूजा पाठ के कर्मकांड करना हो, तो ठीक, वरना हाथों को स्थिर ही रखना चाहिए।

Asana means to sit in the body without meditation, without stability

इस तरह स्थिर और सुविधा से बैठने का शरीर और मन पर असर पड़ता है। उत्तानपाद, मत्स्यासन, मयूरासन, शीर्षासन आदि चौरासी या कम ज्यादा संख्या में गिनाए जाने वाले आसन शारीरिक व्यायाम हैं। आरोग्य रक्षा की दृष्टि से इनका व्यायाम जैसा ही महत्त्व है। इन्हें आध्यात्मिक साधनाओं में शामिल नहीं किया जाता। साधना के लिए बैठने में सुखासन उपयुक्त है। इसे किसी भी साधना में बिना किसी संकोच के किया जा सकता है। 

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed