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Anant Chaturdashi 2023: जानिए अनंत चतुर्दशी पर क्यों बांधा जाता है 14 गांठ वाला सूत्र, जानिए पूजाविधि और महत्व

Wed, 27 Sep 2023 10:31 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Wed, 27 Sep 2023 10:31 AM IST
सार

भाद्रपद मास में शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को अनंत चतुर्दशी कहा जाता है। इस दिन अनंत भगवान (भगवान विष्णु) की पूजा के पश्चात बाजू पर अनंत सूत्र बांधा जाता है। ये कपास या रेशम से बने होते हैं और इनमें चौदह गाँठें होती हैं। अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश विसर्जन भी किया जाता है।

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anant chaturdashi 2023 date vrat importance puja vidhi for worship of lord ananta
anant chaturdashi 2023 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Anant Chaturdashi 2023: अनंत चतुर्दशी व्रत का सनातन धर्म में बड़ा महत्व है, इसे अनंत चौदस के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा होती है। भाद्रपद मास में शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को अनंत चतुर्दशी कहा जाता है। इस दिन अनंत भगवान (भगवान विष्णु) की पूजा के पश्चात बाजू पर अनंत सूत्र बांधा जाता है। ये कपास या रेशम से बने होते हैं और इनमें चौदह गांठें होती हैं। अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश विसर्जन भी किया जाता है इसलिए इस पर्व का महत्व और भी बढ़ जाता है।
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14 गांठ वाले धागे का महत्व
अनंत चतुर्दशी की पूजा में सूत्र का बड़ा महत्व है। यह अनंत सूत्र शुद्ध रेशम या कपास के सूत के धागे को हल्दी में भिगोकर 14 गांठ लगाकर तैयार किया जाता है। इसे हाथ या गले में श्रीअनंत भगवान का ध्यान करते हुए धारण किया जाता है। हर गांठ में श्रीनारायण के विभिन्न नामों से पूजा की जाती है। पहले में अनंत,उसके बाद ऋषिकेश, पद्मनाभ,माधव,वैकुण्ठ,श्रीधर,त्रिविक्रम,मधुसूदन,वामन,केशव,नारायण,दामोदर,और गोविन्द की पूजा होती है। मान्यता है कि इस अनंत सूत्र को बांधने से व्यक्ति प्रत्येक कष्ट से दूर रहता है। जो मनुष्य विधिपूर्वक इस दिन श्री हरि की पूजा करता है उसे सभी पापों से छुटकारा मिल जाता है। इस दिन गणेश विसर्जन भी किया जाता है जिसके चलते इसका महत्व और भी बढ़ जाता है।
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पूजा का विधान
इस दिन कलश स्थापना करके उस पर सुंदर लोटे में कुश रखना चाहिए,यदि कुश उपलब्ध न हो तो दूब रख सकते हैं। भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर के सामने केसर,रोली और हल्दी से रंगे हुए सूत के डोरे रखकर उनकी गंगाजल,गंध,पुष्प,अक्षत,धूप-दीप आदि से पूजा करें। मिष्ठान आदि का भोग लगाएं एवं अनंत भगवान का ध्यान करते हुए सूत्र धारण करें। यह डोरा भगवान विष्णु को प्रसन्न करने वाला तथा अनंत फल देने वाला माना गया है। इस दिन श्री विष्णु सहस्त्रनाम स्तोत्र का पाठ करना बहुत उत्तम माना जाता है। भगवान विष्णु की कृपा के लिए श्री सत्यनारायण की कथा करना बहुत लाभकारी है।

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अनंत सूत्र बांधने के नियम
व्रत रखने वाले पुरुष इसे दाहिने हाथ में और महिलाओं को अपने बाएं हाथ में बांधना चाहिए। इस दिन पूजा करते समय काले और नीले रंग के वस्त्र नहीं पहनने चाहिए। अनंतसूत्र को भगवान विष्णु की पूजा के बाद ही बांधा जाना चाहिए। अनंत सूत्र को बांधने वाले को दिन भर उपवास व्रत रखना चाहिए, इससे भगवान विष्णु की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त होता है। धार्मिक मान्यता है कि अनंत सूत्र बांधने के बाद चौदह दिनों तक तामसिक भोजन नहीं करना चाहिए एवं इस दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। सूत्र बांधते समय ऊं अनंताय नमः मंत्र का जाप करें। मान्यता है कि इसे बांधने से आरोग्य का वरदान मिलता है साथ ही पिछले जन्म और वर्तमान जन्म के पाप नष्ट हो जाते हैं।
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