{"_id":"6704ee040edfba4f6f0bd6c5","slug":"navratri-2024-goddess-maheshwari-is-present-in-person-in-mehuns-village-of-sheikhpura-bihar-2024-10-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"नवरात्र विशेष: बिहार में साक्षात विराजमान हैं मां माहेश्वरी, माता के मंदिर के बारे में यह नहीं जानते होंगे आप","category":{"title":"Spirituality","title_hn":"आस्था","slug":"spirituality"}}
नवरात्र विशेष: बिहार में साक्षात विराजमान हैं मां माहेश्वरी, माता के मंदिर के बारे में यह नहीं जानते होंगे आप
Tue, 08 Oct 2024 02:02 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शेखपुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शेखपुरा
Published by: हिमांशु प्रियदर्शी
Updated Tue, 08 Oct 2024 02:02 PM IST
सार
Navratri 2024: मेहूंस गांव की एक अनूठी और रोचक परंपरा दशहरे के दिन देखी जाती है, जब राम और रावण की सेना के बीच युद्ध का मंचन होता है। खास बात यह है कि राम की सेना में गांव के दलित समाज के लोग होते हैं, जबकि रावण की सेना में सवर्ण समाज के लोग शामिल होते हैं।
विज्ञापन
माहेश्वरी स्थान शेखपुरा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
शेखपुरा जिले का मेहूंस गांव धार्मिक आस्था और परंपराओं का केंद्र है, जहां मां माहेश्वरी का पौराणिक मंदिर स्थित है। यह स्थान शारदीय और वासंतिक नवरात्र में विशेष पूजा-अर्चना के लिए प्रसिद्ध है और सालभर यहां श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती रहती है। इस मंदिर का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व 700 वर्षों से अधिक पुराना है।
विज्ञापन
मां माहेश्वरी के मंदिर का इतिहास
मेहूंस का यह पवित्र स्थान लगभग 700 वर्ष पुराना है। कहा जाता है कि एक ब्राह्मण को मां दुर्गा ने स्वप्न में दर्शन देकर मेहूंस के घने जंगलों में बुलाया था, जहां उन्होंने साक्षात मां माहेश्वरी का आशीर्वाद प्राप्त किया। उस समय इस क्षेत्र में घना जंगल था और कोई आबादी नहीं थी। स्वप्न के अनुसार, ब्राह्मण ने कई दिनों की पैदल यात्रा के बाद मेहूंस के जंगल में पहुंचकर मां के दर्शन किए। तभी से यह स्थान धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हो गया, जिसे आज माहेश्वरी स्थान के नाम से जाना जाता है। कालांतर में यहां गांव बसा और इस स्थान का नाम मेहूंस हो गया। मंदिर में स्थापित भगवती की प्रतिमा अष्टधातु की चार फीट ऊंची है, जो श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बनी हुई है।
विज्ञापन
दशहरा पर सवर्ण और दलितों में होता है राम-रावण युद्ध
मेहूंस गांव की एक अनूठी और रोचक परंपरा दशहरे के दिन देखी जाती है, जब राम और रावण की सेना के बीच युद्ध का मंचन होता है। खास बात यह है कि राम की सेना में गांव के दलित समाज के लोग होते हैं, जबकि रावण की सेना में सवर्ण समाज के लोग शामिल होते हैं। नवमी के दिन यह युद्ध होता है, जिसमें राम की सेना रावण की सेना पर विजय प्राप्त करती है और मां माहेश्वरी मंदिर में प्रवेश करती है। इसके बाद मंदिर में बकरे की बलि दी जाती है, जिसे माता का प्रसाद मानकर पूरे गांव में वितरित किया जाता है। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि यह परंपरा कई दशकों से चली आ रही है, जिसे ग्रामीण पूरी श्रद्धा से निभाते हैं।
विज्ञापन
मंदिर का नवीनीकरण
मेहूंस के इस प्राचीन देवी मंदिर को हाल के वर्षों में नया स्वरूप दिया गया है। गांव के लोगों ने अपने आर्थिक सहयोग से मंदिर का नवीनीकरण किया है। काले पत्थर की मां माहेश्वरी की मूर्ति अब एक भव्य और सुंदर मंदिर में प्रतिष्ठित है। नवरात्र के दौरान यहां भक्तों की भारी भीड़ जुटती है, जो माता का आशीर्वाद लेने के लिए दूर-दूर से आते हैं। मेहूंस का यह मंदिर आसपास के जिलों में भी प्रसिद्ध है और यहां आने वाले श्रद्धालु साल भर अपनी मन्नतें मांगने के लिए आते हैं।
धार्मिक ख्याति और आस्था का केंद्र
मेहूंस का यह मां माहेश्वरी स्थान सिर्फ शेखपुरा जिले तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसकी धार्मिक ख्याति बिहार के कई अन्य जिलों में भी फैली हुई है। मां माहेश्वरी के प्रति लोगों की अटूट आस्था और निष्ठा है और यहां आकर दर्शन करने से लोग अपनी मन्नतों की पूर्ति मानते हैं।