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अपनी शक्ति का उपयोग कर इंसान खुद भी चमत्कार कर सकता है

फीचर डेस्क, अमर उजाला Updated Fri, 23 Feb 2018 05:57 PM IST
power is described as a miracle of mathematics, This is physically different
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प्राचीन ग्रंथों में शक्ति को गणित के चमत्कार रूप में बताया गया है। यह शक्ति भौतिक रूप से अलग होती है। आकाश में दिखाई देने वाला सूर्य तो अग्नि का विराट पिंड है। उसकी शक्ति असीम है। आध्यात्म और विज्ञान का ब्यौरा जुटाते हुए लेखक डॉ. हरि देसाई ने लिखा है कि मनुष्य हाथ से जितनी देर में एक अंक लिखता है, उतनी देर में कंप्यूटर सोलह अंकों वाली किसी भी संख्या के गुणनफल, लघुत्तम और समापरवर्तक रूप निकाल सकता है।
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आदमी ज्यादा से ज्यादा पांच हजार शब्द याद रख सकता है, पर कंप्यूटर उतनी ही देर में साठ हजार शब्द याद कर लेता है। कोई व्यक्ति एक बार में कठिनाई से छह भाषाएं याद रख सकता है, पर कंप्यूटर एक बार में तीन सौ से ज्यादा भाषाएं सीख और याद कर सकता है। यही नहीं, वह किसी व्यक्ति द्वारा दी जा रही भाषा का एक ही समय में 16 भाषाओं में अनुवाद कर सकता है। कंप्यूटर को ऑपरेट करने के लिए भी एक जीता जागता इंसान चाहिए, लेकिन अपनी शक्ति का उपयोग कर इंसान खुद ही इस तरह का चमत्कार रच सकता है। प्राचीन ग्रंथों में इस शक्ति को गणित शक्ति के चमत्कार के रूप में बताया है।

पुराणों में गणेश सत्ता के रूप में जिस दैवीय शक्ति और उसके अनुग्रह का विवरण मिलता है, उसे शक्ति के संसर्ग या गणेश के अनुग्रह के रूप में ही देखना चाहिए। शक्ति भौतिक रूप से अलग है। उसकी उपासना के लिए जिस विधि-विधान को अपनाया जाता है, वह दरअसल इस सूक्ष्म शक्ति से लाभ उठाने का अपना विज्ञान है। डॉ. देसाई के अनुसार, सूर्यशक्ति के सामने अनुग्रह भाव से प्रतिदिन नियमित दस मिनट के लिए भी संपर्क में आएं, तो इस विकास का चमत्कारिक अनुभव देखा जा सकता है।

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