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जिसे आप खूबसूरत समझते हैं वही दूसरे को अच्छी नहीं लगती, क्यों?
भविष्य पुराण
Updated Thu, 26 Jun 2014 12:08 PM IST
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अनुशास्ता को अपने बगीचे से बहुत प्रेम था। जैसे ही समय मिलता, वह बगीचे में पहुंच जाता और वहां फूल-पौधों को संवारने में इस तरह खो जाता कि समय का भी ध्यान नहीं रहता। दिन-दिन भर वह वहीं रहता। एक-एक पौधे को गौर से देखता। उन्हें बढ़ता देखकर खुश होता था।
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पौधों में फूल लगते, तो घंटों उनकी शोभा देखता रहता। कोई फूल यदि मुरझा जाता, तो उसे बहुत दुःख होता था। वह बगीचे की दिन-रात सेवा करता था। एक बार फूलों के मौसम में उसके बगीचे में बहुत फूल खिले। अनुशास्ता अपने बाग को देखकर फूला नहीं समा रहा था। एक फूल को तोड़कर उसने हाथ में लेना चाहा, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया।
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वह फूल को डाली से अलग नहीं करना चाहता था। उसका मन इसके लिए तैयार नहीं हो रहा था। लोग आते-जाते उसके बाग की तारीफ कर रहे थे। इस बीच उसका ध्यान उस गाय की ओर गया, जो बगीचे को ललचाई नजरों से निहार रही थी। उसने गाय से पूछा, तुम्हें मेरा बगीचा और ये खिले हुए रंग-बिरंगे फूल अच्छे लगते हैं?
गाय ने हामी भरी, तो अनुशास्ता ने कहा, तो आओ, देखो इसे। यह कहकर उसने बगीचे के फाटक खोल दिए। गाय अंदर आ गई। अनुशास्ता ने उससे फिर पूछा, फूल सुंदर हैं न?
गाय ने कहा, अभी ठहरो, बताती हूं। अनुशास्ता फूलों को निहारने लगा। इस बीच दूसरी तरफ से गाय सब फूल चर गई और बोली, लेकिन इससे पेट तो नहीं भर सकता। यह तो कुछ भी नहीं है। अनुशास्ता ने सिर पीट लिया। मन के एक कोने से आवाज आई कि गाय की परख कुछ और थी और मेरी और। तभी तो जिसने मुझे दीवाना बना दिया, वह गाय के लिए तुच्छ ही साबित हुआ।