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षटतिला एकादशी पर भगवान विष्णु को कैसे करें प्रसन्न, जानिए इस दिन क्या करें क्या न करें

Mon, 05 Feb 2024 12:09 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Mon, 05 Feb 2024 12:09 AM IST
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Shattila Ekadashi 2024 Date What To Do On Magh Ekadashi Significance News in Hindi
माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को षटतिला एकादशी के नाम से जाना जाता है। - फोटो : अमर उजाला

सनातन धर्म में एकादशी व्रत का बहुत महत्व माना गया है। माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को षटतिला एकादशी के नाम से जाना जाता है। माघ मास भगवान विष्णु को अतिप्रिय है। माघ मास में व्रत, पूजा और  स्नान करने वाले मनुष्यों पर भगवान विष्णु प्रसन्न रहते है और उन्हें सुख-सौभाग्य, धन-संतान और मोक्ष प्रदान करते है। इसलिए इस एकादशी का और भी महत्व बढ़ जाता है। षटतिला एकादशी को उपवास करके तिलों से ही स्न्नान, दान, तर्पण, हवन, भोजन और पूजन करना चाहिए। फिर द्वादशी को प्रातःकाल विधि-विधान से भगवान वैकुण्ठ की पूजा-अर्चना करे। फिर ब्राह्मणों को भोजन करा दक्षिणा देने से प्राणी इहलोक में मनोवांछित फल भोगकर अंत में विष्णु पद प्राप्त कर लेता है,ऐसा शास्त्रों का कथन है। आइए जानते है कि धार्मिक मत के अनुसार भगवान विष्णु को प्रसन्न करने व पुण्यों की प्राप्ति के लिए इस दिन क्या करें क्या न करें।

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  • इस दिन प्रातः स्नान वाले जल कुछ बूंद गंगाजल और तिल मिला लें और उसके बाद ‘ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः’ मंत्र का जप करते हुए स्नान करें। ऐसा करने से सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है और आध्यात्मिक ऊर्जा का विकास होता है।
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  • षट्तिला एकादशी के दिन व्रत करने वाले और न व्रत रखने वाले सभी को तिल के तेल से मालिश करना बहुत शुभ रहता है। ऐसा करने से शरीर निरोग होता है और सर्दी से उत्पन्न विकार दूर होते हैं।
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  • इस दिन तिलोदक करते हैं यानि पंचामृत में तिल मिलाकर भगवान विष्णु को स्नान कराते हैं  जिससे दुर्भाग्य दूर होता है। साथ ही इस दिन आप दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों को तिल मिश्रित जल का तर्पण करने से उनका आशीर्वाद मिलता है और परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।
  • शास्त्रों के अनुसार तिल से हवन करना बहुत शुभ बताया गया है।इस दिन हवन करने से पहले गाय के घी में काले तिलों को मिला लें और फिर ‘ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः’ मंत्र का जप करते हुए हवन करें।ऐसा करने से आर्थिक समस्याएं दूर होती हैं,समृद्धि आती है।सफ़ेद तिल से लक्ष्मी या श्री सूक्त का हवन करने से माता लक्ष्मी की अति शीघ्र कृपा होती है।
  • शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि जो भी व्यक्ति इस दिन तिलों का दान करता है, उसे स्वर्ग की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि एकादशी के दिन जितने तिलों का दान किया जाता है, उतने ही पाप नष्ट हो जाते हैं और उतने ही सालों के लिए स्वर्ग लोक में स्थान प्राप्त होता है।काले तिल का दान करने से शनि दोष शांत होता है।
  • इस दिन सायंकाल के समय तिल युक्त भोजन बनाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को भोग लगाएं। साथ ही गरीब व जरूरतमंद को तिल से बनी हुई चीजों का भोजन कराएं। साथ ही व्रती को भी तिलयुक्त फलाहार करना चाहिए। ऐसा करने से भगवान विष्णु का आशीर्वाद मिलता है।

क्या न करें

  • चावल,प्याज लहसुन और तामसिक भोजन का बिल्कुल भी प्रयोग ना करें।
  • काम क्रोध, लोभ और मोह के अहंकार से दूर रहें।
  • परिवार में लड़ाई-झगड़ा या क्लेश न होने दें।
  • षटतिला व्रत में झूठ नहीं बोलना चाहिए बड़ों का अनादर नहीं करना चाहिए।
  • किसी का झूठा भोजन न करें और न ही किसी को अपना झूठा खिलाएं।
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