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Hindi News ›   Spirituality ›   Festivals ›   Sakat Chauth 2025 Puja Vidhi Importance Chant These Mantra For Child Life long or Success

Sakat Chauth 2025: सकट चौथ, जानिए महत्व, पूजाविधि और चमत्कारी मंत्र

Thu, 16 Jan 2025 11:18 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Thu, 16 Jan 2025 11:18 AM IST
सार

Sakat Chauth 2025: माघ मास की तिल चौथ का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा और व्रत रखने से सभी प्रकार के संकट दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

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Sakat Chauth 2025 Puja Vidhi Importance Chant These Mantra For Child Life long or Success
सकट चौथ 2025: सकट चौथ पर भगवान गणेश की पूजा और व्रत रखने से सभी प्रकार के संकट दूर होते हैं। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Sakat Chauth 2025: संकष्टी चतुर्थी जिसे तिल चौथ या सकट चौथ के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू धर्म में भगवान गणेश की उपासना का एक महत्वपूर्ण दिन है। यह पर्व हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है, लेकिन माघ मास की तिल चौथ का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा और व्रत रखने से सभी प्रकार के संकट दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। पंचांग के अनुसार, माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 17 जनवरी को सुबह 04 बजकर 06 मिनट पर हो रही है। वहीं, इस तिथि का समापन 18 जनवरी को सुबह 05 बजकर 30 मिनट पर होगा। ऐसे में 17 जनवरी को सकट चौथ का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन तिल और गुड़ का विशेष उपयोग किया जाता है, जो इसे स्वास्थ्य और धार्मिक दृष्टि से और भी पवित्र बनाता है।

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संकष्टी चतुर्थी का महत्व
भगवान गणेश को विघ्नहर्ता, मंगलकर्ता और शुभता का प्रतीक माना जाता है। संकष्टी चतुर्थी पर व्रत रखने से न केवल शारीरिक और मानसिक शांति मिलती है, बल्कि यह जीवन में आने वाली हर बाधा को दूर करने में सहायक होता है। इस दिन गणेशजी और चंद्रदेव की उपासना से संतान को लंबी आयु का वरदान प्राप्त होता है। घर में सुख-शांति का आगमन होता है। बच्चों के जीवन में आ रही परेशानियां दूर होती हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दिन चंद्रदेव को जल देने से संतान को किसी भी बीमारी का सामना नहीं करना पड़ता है और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन व्रत करने और तिल व गुड़ से बनी सामग्री का उपयोग करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस व्रत को विधिपूर्वक करने वाले भक्तों को भगवान गणेश की कृपा से धन, वैभव और सफलता प्राप्त होती है।
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संकष्टी चतुर्थी की पूजा विधि
इस दिन प्रातःकाल स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें। पूजा स्थल को शुद्ध करें और भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र को एक साफ स्थान पर स्थापित करें। भगवान गणेश को दुर्वा, फूल, शमी पत्र ,चंदन और तिल से बने लड्डू अर्पित करें। पूजा के दौरान दीपक जलाएं और भगवान गणेश के मंत्र “ॐ गं गणपतये नमः” का जाप करें।


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पूजा के बाद गणेश आरती करें और तिल व गुड़ से बने प्रसाद का भोग लगाएं। संध्या के समय चंद्रमा को देखकर जल से अर्घ्य अर्पित करें और भगवान गणेश से अपने परिवार के सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य की प्रार्थना करें। चंद्र दर्शन के बाद व्रत का पारण करें और प्रसाद ग्रहण करें।

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इन मंत्रों करें जाप
शिक्षा में सफलता प्राप्त करने के लिए
विद्यार्थी इस दिन 'ॐ गं गणपतये नमः' का 108 बार जप करके प्रखर बुद्धि और उच्च शिक्षा  प्राप्त कर सकते हैं। वहीं संकट और कार्यों में बाधाओं को दूर करने के लिए 'ॐ एक दन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्तिः प्रचोदयात' का जप जीवन के सभी संकटों और कार्य बाधाओं को दूर करेगा।

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