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Ramji Ki Aarti: श्रीराम जन्मोत्सव पर पढ़ें संपूर्ण आरती, श्रीराम चंद्र कृपालु भजमन हरण भव भय दारुणम्...

Sun, 06 Apr 2025 06:49 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Sun, 06 Apr 2025 06:49 AM IST
सार

Aarti Shri Ram Ji Ki: आज पूरे देश में राम नवमी की धूम है। भगवान राम की जन्मस्थली अयोध्या के राम मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ जमा है। भगवान राम पूजा विधि-विधान के साथ करने का विशेष महत्व होता है। भगवान राम की पूजा में उनकी आरती जरूरी करनी चाहिए।

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ram navami 2025 shri ram ji ki aarti lyrics in hindi bhagwan ram ki aarti
Ram Navami 2025: - फोटो : freepik

विस्तार

Ram Navami 2025 Shri Ram Ji Ki Aarti Lyrics In Hindi: आज रामनवमी है। यह पर्व पर पूरे देशभर में प्रभु श्रीराम के जन्मोत्सव के रूप में बड़े ही धूम-धाम के साथ मनाया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र नवरात्रि के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का जन्म अयोध्या में राजा दशरथ के यहां हुआ था। हिंदू धर्म में राम नवमी के त्योहार के त्योहार का विशेष महत्व होता है। इस दिन घरों और मंदिरों में भगवान राम की विशेष पूजा-अर्चना और भजन-कीर्तन की जाती है। रामनवमी का पर्व प्रभु राम के आदर्शों पर चलने की प्रेरणा मिलती है। आज पूरे देश में राम नवमी की धूम है। भगवान राम की जन्मस्थली अयोध्या के राम मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ जमा है। भगवान राम पूजा विधि-विधान के साथ करने का विशेष महत्व होता है। भगवान राम की पूजा में उनकी आरती जरूरी करनी चाहिए। आइए जानते हैं प्रभु श्रीराम की आरती श्री राम चंद्र कृपालु भजमन हरण भव भय दारुणम्...
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Ram Navami 2025: राम नवमी पर कैसे करें प्रभु श्रीराम की पूजा, जानिए शुभ मुहूर्त और विधि

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भगवान श्रीराम की आरती Ram Ji Ki Aarti 

श्री राम चंद्र कृपालु भजमन हरण भाव भय दारुणम्।
नवकंज लोचन कंज मुखकर, कंज पद कन्जारुणम्।। 

कंदर्प अगणित अमित छवी नव नील नीरज सुन्दरम्।
पट्पीत मानहु तडित रूचि शुचि नौमी जनक सुतावरम्।।

भजु दीन बंधु दिनेश दानव दैत्य वंश निकंदनम्।
रघुनंद आनंद कंद कौशल चंद दशरथ नन्दनम्।।

सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु उदारू अंग विभूषणं।
आजानु भुज शर चाप धर संग्राम जित खर-धूषणं।।

इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनम्।
मम ह्रदय कुंज निवास कुरु कामादी खल दल गंजनम्।।

छंद 
मनु जाहिं राचेऊ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर सावरों।
करुना निधान सुजान सिलू सनेहू जानत रावरो।।

एही भांती गौरी असीस सुनी सिय सहित हिय हरषी अली।
तुलसी भवानी पूजि पूनी पूनी मुदित मन मंदिर चली।।

।।सोरठा।।
जानि गौरी अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि।
मंजुल मंगल मूल वाम अंग फरकन लगे।।
  
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