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Radha Ashtami 2024: इस साल राधा अष्टमी पर बन रहा है खास संयोग, जरूर करें ये छोटा सा काम

Mon, 09 Sep 2024 08:04 AM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: मेघा कुमारी Updated Mon, 09 Sep 2024 08:04 AM IST
सार

Radha Ashtami 2024: भादों माह में राधा-कृष्ण की पूजा करने से परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। इस माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को जहां जन्माष्टमी होती है, वहीं शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा अष्टमी मनाई जाती है। 

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Radha Ashtami 2024 date puja vidhi and shubh muhurat know radha rani ki aarti
Radha Ashtami 2024 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Radha Ashtami 2024: भादों माह में राधा-कृष्ण की पूजा करने से परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। इस माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को जहां जन्माष्टमी होती है, वहीं शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा अष्टमी मनाई जाती है। इन दोनों तिथियों पर राधा कृष्ण की पूजा का विधान है। हिंदू धर्म में राधा और कृष्ण की जोड़ी को प्रेम का प्रतीक माना जाता है। उनकी आराधना करने से प्रेम जीवन में खुशियों का वास होता है।

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इस साल 11 सितंबर 2024 को राधा अष्टमी मनाई जाएगी। इस दिन प्रीति योग बन रहा है, जो रात 11 बजकर 54 मिनट पर समाप्त होगा। इस दौरान ज्येष्ठा नक्षत्र का संयोग भी बन रहा है, जो सभी के लिए लाभदायक होने वाला है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो लोग जन्माष्टमी का उपवास रखते हैं, उन्हें राधा अष्टमी पर भी व्रत रखना चाहिए। ऐसा करने से कृष्ण जन्माष्टमी के व्रत का भी संपूर्ण फल मिलता है। इस दिन व्रत के साथ-साथ लाडली राधा की पूजा संपूर्ण विधि से करनी चाहिए। इस दौरान उनकी आरती करने से मनचाहे परिणामों की प्राप्ति होती हैं। ऐसे में आइए राधा रानी की आरती के बारे में जानते हैं।

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श्री राधा रानी जी की आरती

श्री राधारानी की आरती
आरती राधाजी की कीजै।

कृष्ण संग जो कर निवासा, कृष्ण करे जिन पर विश्वासा।

आरती वृषभानु लली की कीजै। आरती

कृष्णचन्द्र की करी सहाई, मुंह में आनि रूप दिखाई।

उस शक्ति की आरती कीजै। आरती

नंद पुत्र से प्रीति बढ़ाई, यमुना तट पर रास रचाई।

आरती रास रसाई की कीजै। आरती

प्रेम राह जिनसे बतलाई, निर्गुण भक्ति नहीं अपनाई।

आरती राधाजी की कीजै। आरती

दुनिया की जो रक्षा करती, भक्तजनों के दुख सब हरती।

आरती दु:ख हरणीजी की कीजै। आरती

दुनिया की जो जननी कहावे, निज पुत्रों की धीर बंधावे।

आरती जगत माता की कीजै। आरती

निज पुत्रों के काज संवारे, रनवीरा के कष्ट निवारे।

आरती विश्वमाता की कीजै। आरती राधाजी की कीजै ।
 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

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