{"_id":"68d507eb249fe5efa00f8da2","slug":"navratri-2025-kanya-pujan-significance-on-ashtami-and-navami-kanya-pujan-ka-mahatava-2025-09-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Navratri 2025: नवरात्रि पर अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या पूजन का ही महत्व क्यों ?","category":{"title":"Festivals","title_hn":"त्योहार","slug":"festivals"}}
Navratri 2025: नवरात्रि पर अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या पूजन का ही महत्व क्यों ?
Mon, 29 Sep 2025 11:06 AM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Mon, 29 Sep 2025 11:06 AM IST
सार
हिंदू धर्म में नवरात्रि के त्योहार पर अष्टमी और नवमी दोनों ही तिथियों का खास महत्व होता है। महाष्टमी को दुर्गाष्टमी भी कहते हैं और यह तिथि को दुर्गा पूजा का प्रमुख दिन माना जाता है। महाअष्टमी पर संधि पूजा होती है। यह पूजा अष्टमी और नवमी दोनों दिन चलती है।
विज्ञापन
शारदीय नवरात्रि अष्टमी और नवमी तिथि पूजा महत्व
- फोटो : Adobe Stock
विस्तार
Navratri 2025 Kanya Pujan Significance: आश्विन माह की प्रतिपदा तिथि से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत हो जाती है। हिंदू धर्म में नवरात्रि के पर्व का विशेष महत्व होता है, जिसे भारत में बड़े ही धूम-धाम के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष शारदीय नवरात्रि पर्व की शुरुआत 22 सितंबर से हो चुकी हैं और इसका समापन 02 अक्तूबर को दशहरा पर होगा। नवरात्रि के दिनों में माता दुर्गा का नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा होती है। जिसमें मां के भक्त नौ दिन तक व्रत रखते हुए पूजा उपासना और मंत्रोंचार किया जाता है। नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथि का विशेष महत्व होता है इसमें कन्या पूजा और हवन करने का विशेष महत्व होता है।
विज्ञापन
शारदीय नवरात्रि पर अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या पूजन और भोज कराते हुए व्रत का पारण किया जाता है। कुछ लोग अष्टमी तिथि पर कन्या पूजन और भोज कराते हुए पारण करते हैं, वहीं कुछ लोग नवमी तिथि पर कन्या पूजन और भोज कराते हुए नवमी को पारण करते हैं। नवरात्रि में कन्या पूजन करने पर मां दुर्गा बहुत ही प्रसन्न होती हैं अपने भक्तों को भरपूर आशीर्वाद देती हैं। इस तिथि पर मां दुर्गा की विशेष पूजा अर्चना करने के साथ व्रत का पारण किया जाता है। कुछ लोग अष्टमी तो कुछ नवमी तिथि पर कन्याओं को भोजन कराते हुए उनकी पूजन करते हैं। आइए जानते हैं नवरात्रि पर कब अष्टमी और कब नवमी तिथि पर कन्या पूजन करते हुए नवरात्रि का पारण किया जाए।
विज्ञापन
नवरात्रि अष्टमी और नवमी तिथि 2025 कब है ?
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 29 सितंबर को शाम 04 बजकर 31 मिनट पर आरंभ होगी, जिसका समापन 30 सितंबर को शाम 06 बजकर 06 मिनट पर होगी। अष्टमी तिथि के समापन के बाद नवमी तिथि की शुरुआत हो जाएगी, जो 01 अक्तूबर को रात 07 बजकर 01 मिनट पर होगी।
विज्ञापन
Maa Durga 108 Naam: नवरात्रि में करें देवी दुर्गा की अष्टोत्तर शतनामावली का जाप, घर आएगी सुख-समृद्धि
अष्टमी पर कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त
नवरात्रि पर माता के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करते हुए अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्याओं का पूजन और उन्हे भोजन कराते हुए व्रत का पारण किया जाता है। पंचांग के अनुसार अष्टमी के दिन कन्या पूजन के लिए पहला शुभ मुहूर्त सुबह 5 बजे से 6 बजकर 12 मिनट तक रहेगा। इसके बाद दूसरा मुहूर्त सुबह 10 बजकर 40 मिनट से 12 बजकर 10 मिनट तक का है।
Navratri Wishes 2025: मां कूष्मांडा को समर्पित है नवरात्रि का चौथा दिन, प्रियजनों को भेजें ये शुभकामना संदेश
नवमी तिथि कन्या पूजन शुभ मुहूर्त 2025
नवमी तिथि पर कन्या पूजन सुबह 4 बजकर 53 मिनट से 5 बजकर 41 मिनट तक है। इसके अलावा सुबह 8 बजकर 6 मिनट से 9 बजकर 50 मिनट के बीच आप कन्या पूजन और भोज करा सकते हैं।
नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथि का महत्व क्यों ?
इस वर्ष शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 22 सितंबर से शुरू होकर 02 अक्तूबर तक चलेगा। नवरात्रि पर अष्टमी और नवमी तिथि का विशेष महत्व होता है। महाष्टमी को दुर्गाष्टमी भी कहते हैं और यह तिथि को दुर्गा पूजा का प्रमुख दिन माना जाता है। महाअष्टमी पर संधि पूजा होती है। यह पूजा अष्टमी और नवमी दोनों दिन चलती है। हिंदू धर्म में नवरात्रि के त्योहार पर अष्टमी और नवमी दोनों ही तिथियों का खास महत्व होता है।
महाष्टमी दुर्गा पूजा और उपासना के लिए सबसे शुभ तिथि मानी गई है। इस तिथि पर देवी दुर्गा के सबसे शक्तिशाली रूप की पूजा होती है। महाष्टमी पर देवी दुर्गा के महागौरी स्वरूप और नवमी तिथि पर मां सिद्धिदात्री स्वरूप की पूजा होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महाष्टमी पर देवी दुर्गा ने महिषासुर दैत्य का वध करने के लिए महिषासुरमर्दिनी का स्वारूप धरा किया था। इसलिए इस दिन कन्या पूजन, हवन और मंत्रोचार करते हुए मां की उपसना, व्रत का पारण और फिर दशमी तिथि को दुर्गा पंडालों में विराजित मां की प्रतिमाओं का विसर्जन होता है।
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन