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Mauni Amavasya 2025: शुभ योग में मौनी अमावस्या, पितरों को प्रसन्न करने के लिए करें ये एक काम

Tue, 21 Jan 2025 01:51 PM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: मेघा कुमारी Updated Tue, 21 Jan 2025 01:51 PM IST
सार

Mauni Amavasya 2025: ज्योतिष गणना के अनुसार माघ माह की अमावस्या तिथि को मौनी अमावस्या मनाई जाती है, इसे माघी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है

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Mauni Amavasya 2025 date and shubh yog amrit snan time know pitra stotra path benefits
पंचागं के मुताबिक इस साल 29 जनवरी 2025 को मौनी अमावस्या पड़ रही है, इस दिन महाकुंभ में दूसरा अमृत स्नान भी किया जाएगा - फोटो : freepik

विस्तार

Mauni Amavasya 2025: ज्योतिष गणना के अनुसार माघ माह की अमावस्या तिथि को मौनी अमावस्या मनाई जाती है, इसे माघी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है, इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और जरूरतमंदों का दान करने से साधक के भाग्य में वृद्धि होती हैं, साथ ही पितरों का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है। धार्मिक ग्रंथों में मौनी अमावस्या को पितरों का श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण करने के लिए उत्तम माना गया है। इस दिन भगवान विष्णु और गणेश जी की आराधना करने से सभी दुखों का नाश होता है।

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पंचागं के मुताबिक इस साल 29 जनवरी 2025 को मौनी अमावस्या पड़ रही है, इस दिन महाकुंभ में दूसरा अमृत स्नान भी किया जाएगा, वहीं इस तिथि पर उत्तराषाढ़ा नक्षत्र और सिद्ध योग का निर्माण भी हो रहा है, जो पितरों को प्रसन्न करने के लिए कल्याणकारी है। इस संयोग में पितृ स्त्रोत का पाठ करने से जाने-अनजाने में किए गए पाप से मुक्ति प्राप्त होती है, साथ ही सभी ग्रह दोष समाप्त हो सकते हैं। ऐसे में आइए इस पाठ के बारे में जानते हैं।

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1. अर्चितानाममूर्तानां पितृणां दीप्ततेजसाम् ।
नमस्यामि सदा तेषां ध्यानिनां दिव्यचक्षुषाम् ।।

2. इन्द्रादीनां च नेतारो दक्षमारीचयोस्तथा ।
सप्तर्षीणां तथान्येषां तान् नमस्यामि कामदान् । ।

3. मन्वादीनां च नेतार: सूर्याचन्दमसोस्तथा ।
तान् नमस्यामहं सर्वान् पितृनप्युदधावपि ।।

4. नक्षत्राणां ग्रहाणां च वाय्वग्न्योर्नभसस्तथा ।
द्यावापृथिवोव्योश्च तथा नमस्यामि कृताञ्जलि: ।।

5. देवर्षीणां जनितृंश्च सर्वलोकनमस्कृतान् ।
अक्षय्यस्य सदा दातृन् नमस्येहं कृताञ्जलि: ।।

6. प्रजापते: कश्पाय सोमाय वरुणाय च ।
योगेश्वरेभ्यश्च सदा नमस्यामि कृताञ्जलि: ।।

7. नमो गणेभ्य: सप्तभ्यस्तथा लोकेषु सप्तसु ।
स्वयम्भुवे नमस्यामि ब्रह्मणे योगचक्षुषे ।।

8. सोमाधारान् पितृगणान् योगमूर्तिधरांस्तथा ।
नमस्यामि तथा सोमं पितरं जगतामहम् ।।

9. अग्रिरूपांस्तथैवान्यान् नमस्यामि पितृनहम् ।
अग्रीषोममयं विश्वं यत एतदशेषत: ।।

10. ये तु तेजसि ये चैते सोमसूर्याग्रिमूर्तय: ।
जगत्स्वरूपिणश्चैव तथा ब्रह्मस्वरूपिण: ।।
तेभ्योखिलेभ्यो योगिभ्य: पितृभ्यो यतामनस: ।
नमो नमो नमस्तेस्तु प्रसीदन्तु स्वधाभुज ।।




डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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