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Margashirsha Amavasya 2024: मार्गशीर्ष अमावस्या कब है? जानें सही तिथि, पूजा विधि और महत्व

Sat, 23 Nov 2024 05:58 AM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ज्योति मेहरा Updated Sat, 23 Nov 2024 05:58 AM IST
सार

हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि को विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व दिया जाता है। यह दिन पूजा, पाठ, और व्रत के लिए शुभ माना जाता है, जो साधक को विशेष फल प्रदान करता है। आइए जानते हैं इस साल मार्गशीर्ष अमावस्या कब है और इस दिन क्या विशेष पूजा-अनुष्ठान किए जाते हैं।

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Margashirsha Amavasya 2024 date pooja shubh muhurat and vidhi/
Margashirsha Amavasya 2024 - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

Margashirsha Amavasya 2024: हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि को विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व दिया जाता है। यह दिन पूजा, पाठ, और व्रत के लिए शुभ माना जाता है, जो साधक को विशेष फल प्रदान करता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, मार्गशीर्ष माह भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है। इस माह में आने वाली अमावस्या तिथि को मार्गशीर्ष अमावस्या के रूप में मनाया जाता है। यह तिथि धार्मिक अनुष्ठान, व्रत, और पितरों के तर्पण के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। आइए जानते हैं इस साल मार्गशीर्ष अमावस्या कब है और इस दिन क्या विशेष पूजा-अनुष्ठान किए जाते हैं।

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मार्गशीर्ष अमावस्या का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन भगवान विष्णु, शिवजी, और माता गंगा की पूजा करने से विशेष फल मिलता है। इस दिन पवित्र नदी में स्नान करना और पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस तिथि पर महिलाएं यदि सच्चे मन से व्रत रखती हैं, तो उन्हें देवी-देवताओं का आशीर्वाद मिलता है। साथ ही पति की लंबी आयु का वरदान भी मिलता है। यह दिन न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि पितरों के प्रति श्रद्धा प्रकट करने के लिए भी बहुत अहम माना जाता है।
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मार्गशीर्ष अमावस्या 2024 तिथि और समय
वैदिक पंचांग के अनुसार 2024 में मार्गशीर्ष अमावस्या की तिथि 30 नवंबर को सुबह 10:29 बजे प्रारंभ होगी और 1 दिसंबर को सुबह 11:50 बजे इसका समापन होगा। ऐसे में उदयातिथि के आधार पर, मार्गशीर्ष अमावस्या का व्रत 1 दिसंबर 2024 को ही रखा जाएगा।
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मार्गशीर्ष अमावस्या 2024 के शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 05:08 से 06:02
अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:49 से दोपहर 12:31
विजय मुहूर्त: दोपहर 01:55 से 02:37
गोधूलि मुहूर्त: शाम 05:21 से 05:48
निशिता मुहूर्त: देर रात 11:43 से 12:38 (2 दिसंबर)

मार्गशीर्ष अमावस्या की पूजा विधि

  • व्रत के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठना चाहिए। इसके बाद किसी पवित्र नदी या जलाशय में स्नान करना चाहिए।
  • इस दिन सूर्य देव को जल अर्पित करें और व्रत का संकल्प लें। साथ ही भगवान विष्णु और शिवजी की विधिपूर्वक पूजा करें।
  • इस खास दिन पर पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण करें और दिनभर व्रत रखने के बाद शाम को दीपदान करें।
  • मार्गशीर्ष अमावस्या आत्मा की शुद्धि, पितरों के प्रति कृतज्ञता, और ईश्वर की कृपा प्राप्त करने का विशेष दिन है। इस दिन सच्चे मन से पूजा-अनुष्ठान करने से सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।



 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

 

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