Mahashivratri 2020: 21 को महाशिवरात्रि, जानिए भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह की कहानी
भगवान शिव और माता पार्वती विवाह की कहानी
माता पार्वती भगवान शिव से विवाह करना चाहती और सभी देवता भी यही चाहते थे कि पर्वत राजकन्या पार्वती का विवाह भगवान शिव से हो जाए। देवताओं ने माता पार्वती से विवाह का प्रस्ताव लेकर कन्दर्प को भगवान शिव के पास भेजा, जिसे शिव ने ठुकरा दिया और उसे अपनी तीसरी आंख से भस्म कर दिया। माता पार्वती ने तो भोलेनाथ को अपना वर मान ही लिया था। माता पार्वती ने शिव को अपना वर बनाने के लिए कठोर तपस्या शुरू कर दी। उनकी तपस्या से सभी जगह हाहाकार मच गया। बड़े-बड़े पर्वतों की नींव भी डगमगाने लगी। तब भोले बाबा ने अपनी आंख खोली और माता पार्वती से कहा कि वो किसी राजकुमार से शादी कर लें क्योंकि उनके साथ रहना आसान नहीं है।
लेकिन माता पार्वती ने कहां कि अगर वो विवाह करेंगी तो सिर्फ भगवान शिव से ही करेंगी। पार्वती का प्रेम देख भोलेनाथ उनसे विवाह करने के लिए तैयार हो गए।
भगवान शिव जब माता पार्वती से वेिवाह करने गए तब उनके साथ डाकिनियां,भूत-प्रेत और चुड़ैलों साथ में गए। डाकिनियों और चुड़ैलों ने भगवान शिव को भस्म से सजाया और हड्डियों की माला पहना दी।
जब भगवान शिव की अनोखी बारात माता पार्वती के घर पहुंची तब सभी देवता हैरान हो देखते रह गए और वहां भी डर कर भाग गई. भगवान शिव को इस विचित्र रूप में पार्वती की मां स्वीकार नहीं कर पाई और उन्होंने अपनी बेटी का हाथ देने से मना कर दिया।
स्थितियां बिगड़ती देख पार्वती ने शिव से प्राथना की वो उनके रीति रिवाजों के मुताबिक तैयार होकर आंए. शिव ने उनकी प्राथना स्वीकार की और सभी देवताओं को फरमान दिया कि वो उनको खूबसूरत रूप से तैयार करें. ये सुन सभी देवता हरकत में आ गए और उन्हें तैयार करने में जुट गए. भगवान शिव को दैवीय जल से नहलाया गया और रेशम के फूलों से सजाया गया।
जब भगवान शिव इस दिव्य रूप में पहुंचे, पार्वती की मां ने उन्हें तुरंत स्वीकार कर लिया और ब्रह्मा जी की उपस्थिति में विवाह समारोह शुरू हो गया. माता पार्वती और भोलेबाबा ने एक दूसरे को वर माला पहनाई और ये विवाह संपन हुआ।