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Mahalaya 2024: कब है महालया? जानिए क्या है इसका धार्मिक महत्व

Tue, 24 Sep 2024 02:46 PM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ज्योति मेहरा Updated Tue, 24 Sep 2024 02:46 PM IST
सार

महालया पितृ पक्ष श्राद्ध की अवधि का 16वां दिन है। महालया 16 दिवसीय पितृ पक्ष के अंत का प्रतीक है। महालया मां दुर्गा का धरती पर आगमन का दिन होता है। माना जाता है कि इस दिन देवी दुर्गा अपनी मायके (पृथ्वी) की ओर यात्रा प्रारंभ करती हैं।

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mahalaya 2024 date and time shubh muhurat Durga Puja kab se hai
mahalaya 2024 - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

Mahalaya 2024: हिंदू धर्म को नवरात्रि बेहद महत्वपूर्ण पर्व है, जो मां दुर्गा को समर्पित है। मुख्य तौर पर इस पर्व को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। इस त्योहार की शुरुआत महालया से होती है और दुर्गा पूजा विजयादशमी पर समाप्त होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल 2 अक्तूबर को महालया के साथ पर्व का प्रारंभ होगा और 3 अक्तूबर को पहली पूजा की जाएगी। वहीं 12 अक्तूबर को विजयादशमी के साथ संपन्न हो जाएगा।

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महालया का महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार, महालया पितृ पक्ष श्राद्ध की अवधि का 16वां दिन है। महालया 16 दिवसीय पितृ पक्ष के अंत का प्रतीक है। महालया मां दुर्गा का धरती पर आगमन का दिन होता है। माना जाता है कि देवी दुर्गा अपनी मायके (पृथ्वी) की ओर यात्रा प्रारंभ करती हैं। यह दिन को दुर्गा पूजा की शुरुआत का प्रतीक भी माना जाता है। इस साल पितृ पक्ष का आखिरी दिन 2 अक्तूबर है। इसलिए महालया 2 अक्तूबर को ही है। इसे महालया अमावस्या या सर्व पितृ अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। इसके अगले दिन ही शारदीय नवरात्रि की कलश स्थापना की जाती है।
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शारदीय नवरात्र 2024 कैलेंडर
महालया-(2 अक्टूबर, सोमवार) मां दुर्गा का आगमन
पहला दिन- (3 अक्टूबर, मंगलवार) मां शैलपुत्री की पूजा
दूसरा दिन- (4 अक्टूबर, बुधवार) मां ब्रह्मचारिणी की पूजा
तीसरा दिन- (5 अक्टूबर गुरुवार) मां चंद्रघंटा की पूजा
चौथा दिन- (6 अक्टूबर शुक्रवार) मां कूष्मांडा की पूजा
पांचवा दिन-(7 अक्टूबर, शनिवार) मां स्कंदमाता की पूजा
छठा दिन- (8 अक्टूबर, रविवार) मां कात्यायनी की पूजा
सातवां दिन- (9 अक्टूबर सोमवार) मां कालरात्रि की पूजा
आठवां दिन-10 अक्टूबर मंगलवार मां महागौरी की पूजा
नौवां दिन- (11 अक्टूबर बुधवार) मां सिद्धिदात्री की पूजा
दसवां दिन-12 अक्टूबर गुरुवार विजयादशमी या दशहरा

माना जाता है कि ब्रह्मा, विष्णु और महेश्वर ने राक्षस राज महिषासुर को हराने के लिए मां दुर्गा की रचना की थी। राक्षस राजा को एक वरदान मिला था, इसलिए उसे कोई भी देवता या मनुष्य नहीं मार सकता। ऐसे में जब देवता राक्षस राजा से हार गए, तो उन्होंने आदि शक्ति से मदद मांगी और माँ दुर्गा ने राक्षस राजा महिषासुर को हरा दिया। बताया जाता है कि लड़ाई के दौरान, देवी को लड़ने के लिए देवताओं द्वारा कई हथियार दिए गए थे। इसलिए, मां दुर्गा को शक्ति की देवी कहा जाता है।
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दुर्गा पूजा के नौ दिनों में लोग मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। माता रानी का पहला रूप मां शैलपुत्री, दूसरा रूप मां बह्मचारिणी, तीसरा रूप मां चंद्रघंटा, चौथा रूप मां कूष्मांडा, पांचवां रूप मां स्कंदमाता, छठा रूप मां कात्यायनी, सातवां रूप मां कालरात्रि, आठवां रूप मां महागौरी, नौवां रूप मां सिद्धिदात्री है। कई तस्वीरों और प्रतिमाओं में माता दुर्गा को 10 भुजाओं के साथ देखा जाता है।


 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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