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पुरी रथ यात्रा 2019 : भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा, जानिए तीनों रथों की खास बातें
Thu, 04 Jul 2019 01:44 PM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Thu, 04 Jul 2019 01:44 PM IST
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भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा
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हर साल आषाढ मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ की भव्य निकाली जाती है। इस बार यह रथ यात्रा 4 जुलाई से निकाली जाएगी। भगवान जगन्नाथ की यह यात्रा 11 दिनों तक चलेगी इसके बाद इनकी वापसी होगी। इस रथ यात्रा में भगवान जगन्नाथ के साथ उनके बड़े भाई बलराम और बहन सुभद्रा भी अलग-अलग रथ में शामिल होंगी। इस रथ यात्रा की तैयारी बहुत पहले से होने लगती है। तीनों का रथ उनकी मौसी के घर गुंडीचटा मंदिर तक ले जाया जाएगा। पुरी की यह रथ यात्रा देखने लायक ही बनती है।
पुरी की रथ यात्रा में भगवान जगन्नाथ के रथ को नंदीघोष और गरुड़ध्वज कहा जाता है। वहीं बड़े भाई बलराम के रथ को तालध्वज कहते हैं। जबकि छोटी बहन देवी सुभद्रा के रथ को दर्पदलन कहते हैं। भगवान के रथ को नीम की लकड़ी से तैयार किया जाता है।आइए जानते हैं पुरी रथ यात्रा 2019 से जुड़ी तीनों रथों के बारे में कुछ खास जानकारियां....
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भगवान जगन्नाथ का रथ
- पुरी रथ यात्रा में भगवान जगन्नाथ का रथ सबसे पीछे चलता है। भगवान जगन्नाथ के इस रथ को गरुड़ध्वज, कपिध्वज या नंदीघोष कहा जाता है। इस रथ की ऊंचाई 45 फीट होती है। रथ में 16 पहिए लगे होते हैं। भगवान जगन्नाथ का रथ लाल और पीले रंग के कपड़ों से ढका होता है।
- भगवान जगन्नाथ का रथ बनाने का काम अक्षय तृतीया के दिन से शुरू हो जाता है। इस रथ में लकड़ी के 332 टुकड़ों का प्रयोग किया जाता है। भगवान जगन्नाथ का रथ में हनुमानजी और नृसिंह देव की प्रतिमा लगी होती है। भगवान जगन्नाथ के रथ के साथ 8 ऋषि भी चलते हैं।
- भगवान जगन्नाथ के रथ का सारथी दारुक होते है। रथ में सारथी के अलावा दो द्वारपाल जय और विजय भी होते हैं।
- भगवान के रथ को जिस रस्सी से खींचा जाता है, वह शंखचूड़ नाम से जानी जाती है। ऐसी मान्यता है भगवान जगन्नाथ के रथ को जो व्यक्ति खींचता उसे इसी जन्म में मुक्ति मिल जाती है। इसलिए भगवान के रथ खींचने में लोगों की भारी भीड़ एकत्रित हो जाती है।
बलराम जी का रथ
- बलराम जी के रथ को तालध्वज कहते हैं। रथ यात्रा में यह सबसे आगे रहता है। इनके रथ की ऊंचाई 44 फीट और इसमें 14 पहिए होते हैं। इस रथ को हरे रंग के कपड़ों से सजाया जाता है।
- इनके रथ में काले रंग के 4 घोड़े होते हैं। रथ में नंद और सुनंद नाम के 2 द्वारपाल होते हैं। रथ पर हल और मुसल भी होते हैं। इसको खिंचने के लिए वासुकी नाग के रूप में रस्सी का प्रयोग किया जाता है।
छोटी बहन सुभद्रा का रथ
- बहन सुभद्रा के रथ को दर्पदलन कहते हैं। इनका रथ बड़े भाई बलराम और भगवान जगन्नाथ के बीच में चलता है। इस रथ की ऊंचाई 43 फीट होती है। इस रथ को सजाने में काले और लाल रंग का प्रयाोग किया जाता है। इसमें 12 पहिए लगे हुए होते हैं।
-रथ के सारथी अर्जुन और रक्षक जयदुर्गा होते हैं। इस रथ की द्वारपाल गंगा और यमुना होती हैं। इनके रथ की ध्वजा का नाम नदंबिका है। रथ में लाल रंग के 4 घोड़े होते हैं। इस रथ को खींचने वाली रस्सी को स्वर्णचुड़ा कहते हैं।
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पुरी की रथ यात्रा में भगवान जगन्नाथ के रथ को नंदीघोष और गरुड़ध्वज कहा जाता है। वहीं बड़े भाई बलराम के रथ को तालध्वज कहते हैं। जबकि छोटी बहन देवी सुभद्रा के रथ को दर्पदलन कहते हैं। भगवान के रथ को नीम की लकड़ी से तैयार किया जाता है।आइए जानते हैं पुरी रथ यात्रा 2019 से जुड़ी तीनों रथों के बारे में कुछ खास जानकारियां....
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भगवान जगन्नाथ का रथ
- पुरी रथ यात्रा में भगवान जगन्नाथ का रथ सबसे पीछे चलता है। भगवान जगन्नाथ के इस रथ को गरुड़ध्वज, कपिध्वज या नंदीघोष कहा जाता है। इस रथ की ऊंचाई 45 फीट होती है। रथ में 16 पहिए लगे होते हैं। भगवान जगन्नाथ का रथ लाल और पीले रंग के कपड़ों से ढका होता है।
- भगवान जगन्नाथ का रथ बनाने का काम अक्षय तृतीया के दिन से शुरू हो जाता है। इस रथ में लकड़ी के 332 टुकड़ों का प्रयोग किया जाता है। भगवान जगन्नाथ का रथ में हनुमानजी और नृसिंह देव की प्रतिमा लगी होती है। भगवान जगन्नाथ के रथ के साथ 8 ऋषि भी चलते हैं।
- भगवान जगन्नाथ के रथ का सारथी दारुक होते है। रथ में सारथी के अलावा दो द्वारपाल जय और विजय भी होते हैं।
- भगवान के रथ को जिस रस्सी से खींचा जाता है, वह शंखचूड़ नाम से जानी जाती है। ऐसी मान्यता है भगवान जगन्नाथ के रथ को जो व्यक्ति खींचता उसे इसी जन्म में मुक्ति मिल जाती है। इसलिए भगवान के रथ खींचने में लोगों की भारी भीड़ एकत्रित हो जाती है।
बलराम जी का रथ
- बलराम जी के रथ को तालध्वज कहते हैं। रथ यात्रा में यह सबसे आगे रहता है। इनके रथ की ऊंचाई 44 फीट और इसमें 14 पहिए होते हैं। इस रथ को हरे रंग के कपड़ों से सजाया जाता है।
- इनके रथ में काले रंग के 4 घोड़े होते हैं। रथ में नंद और सुनंद नाम के 2 द्वारपाल होते हैं। रथ पर हल और मुसल भी होते हैं। इसको खिंचने के लिए वासुकी नाग के रूप में रस्सी का प्रयोग किया जाता है।
छोटी बहन सुभद्रा का रथ
- बहन सुभद्रा के रथ को दर्पदलन कहते हैं। इनका रथ बड़े भाई बलराम और भगवान जगन्नाथ के बीच में चलता है। इस रथ की ऊंचाई 43 फीट होती है। इस रथ को सजाने में काले और लाल रंग का प्रयाोग किया जाता है। इसमें 12 पहिए लगे हुए होते हैं।
-रथ के सारथी अर्जुन और रक्षक जयदुर्गा होते हैं। इस रथ की द्वारपाल गंगा और यमुना होती हैं। इनके रथ की ध्वजा का नाम नदंबिका है। रथ में लाल रंग के 4 घोड़े होते हैं। इस रथ को खींचने वाली रस्सी को स्वर्णचुड़ा कहते हैं।