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Holika Dahen 2021 Shubh Muhurat: 28 मार्च को होलिका दहन, जानें शुभ मुहूर्त, महत्व और पौराणिक कथा

Thu, 18 Mar 2021 07:47 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रुस्तम राणा Updated Thu, 18 Mar 2021 07:47 AM IST
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Holika Dahen 2021 Date muhurat timing significance and story of Holi
होलिका दहन 2021 - फोटो : अमर उजाला

होलिका दहन 28 मार्च को है। यह होली के एक दिन पहले किया जाता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, प्रति वर्ष होलिका दहन फाल्गुन पूर्णिमा के दिन शुभ मुहूर्त में किया जाने का विधान है। यह अच्छाई पर बुराई की जीत का प्रतीक पर्व है। आइए जानते है होलिका दहन का शुभ मुहूर्त और इस पर्व से जुड़ी पौराणिक कथा।

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Holika Dahen 2021 Date muhurat timing significance and story of Holi
होलिका दहन 2021 शुभ मुहूर्त - फोटो : अमर उजाला

फाल्गुन पूर्णिमा 2021
पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ – मार्च 28, 2021 को 03:27 बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त – मार्च 29, 2021 को 00:17 बजे
होलिका दहन 2021
होलिका दहन मुहूर्त – 18:37 से 20:56
अवधि – 02 घंटे 20 मिनट
होली 2021
भद्रा पूंछ -10:13 से 11:16
भद्रा मुख – 11:16 से 13:00

Holika Dahen 2021 Date muhurat timing significance and story of Holi
प्रहलाद कथा - फोटो : अमर उजाला

होली से जुड़ी पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, प्रहलाद जन्म से ही ब्रह्मज्ञानी थे और हरपल भगवत भक्ति में लीन रहते थे, उन्हें सभी नौ प्रकार की भक्ति प्राप्त थी। भक्ति मार्ग के इस चरम सोपान को प्राप्त कर लेने के बाद प्राणी परमात्मा को प्राप्त कर लेता है। प्रहलाद भी इसी चरम पर पहुंच गये थे जिसका उनके पिता हिरण्यकश्यपु अति विरोध करते थे किंतु, जब प्रहलाद को नारायण भक्ति से विमुख करने के उनके सभी उपाय निष्फल होने लगे तो, उन्होंने प्रह्लाद को फाल्गुन शुक्ल पक्ष अष्टमी को बंदी बना लिया और मृत्यु हेतु तरह तरह की यातनायें देने लगे, किन्तु प्रहलाद विचलित नहीं हुए। प्रतिदिन प्रहलाद को मृत्यु देने के अनेकों उपाय किये जाने लगे किन्तु भगवत भक्ति में लीन होने के कारण प्रहलाद हमेशा जीवित बच जाते।

इसी प्रकार सात दिन बीत गये आठवें दिन अपने भाई हिरण्यकश्यपु की परेशानी देख उनकी बहन होलिका (जिसे ब्रह्मा द्वारा अग्नि से न जलने का वरदान था) ने प्रहलाद को अपनी गोद में लेकर अग्नि में भस्म करने का प्रस्ताव रखा जिसे हिरण्यकश्यपु ने स्वीकार कर लिया। परिणाम स्वरूप होलिका जैसे ही अपने भतीजे प्रहलाद को गोद में लेकर जलती आग में बैठीं तो, वे स्वयं जलने लगीं और प्रहलाद पुनः जीवित बच गए क्योंकि उनके लिए अग्निदेव शीतल हो गए थे। तभी से भक्ति पर आघात हो रहे इन आठ दिनों को होलाष्टक के रूप में मनाया जाता है।

भक्ति पर जिस-जिस तिथि-वार को आघात होता उस दिन और तिथियों के स्वामी भी हिरण्यकश्यपु से क्रोधित हो उग्र हो जाते थे, इसीलिए इन आठ दिनों में क्रमश: अष्टमी को चंद्रमा, नवमी को सूर्य, दशमी को शनि, एकादशी को शुक्र, द्वादशी को गुरु, त्रयोदशी को बुध एवं चतुर्दशी को मंगल तथा पूर्णिमा को राहु उग्र रूप लिए माने जाते हैं तभी से इन दिनों में गर्भाधान, विवाह, पुंसवन, नामकरण, चूड़ाकरन, विद्यारम्भ, गृह प्रवेश व निर्माण सकाम अनुष्ठान आदि अशुभ माने गये हैं। 

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Holika Dahen 2021 Date muhurat timing significance and story of Holi
होलाष्टक के दौरान शादी, विवाह, वाहन खरीदना या घर खरीदना एवं अन्य मंगल कार्य नहीं किए जाते हैं। - फोटो : istock
होलाष्टक 2021
होली से लगभग आठ दिन पहले होलाष्टक लग जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से होलाष्टक शुरू हो जाएगा। इस साल होलाष्टक 21 मार्च से 28 मार्च तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, होलाष्टक के दौरान शादी, विवाह, वाहन खरीदना या घर खरीदना एवं अन्य मंगल कार्य नहीं किए जाते हैं। हालांकि इस दौरान पूजा पाठ करने और भगवान का स्मरण भजन करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है।
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