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Happy Holi 2021: होली आज ,जानिए इससे जुड़ी रोचक कहानियां

Mon, 29 Mar 2021 12:04 AM IST
विनोद शुक्ला अनीता जैन, वास्तुविद
अनीता जैन, वास्तुविद Published by: विनोद शुक्ला Updated Mon, 29 Mar 2021 12:04 AM IST
सार

  • होली का त्योहार राधा-कृष्ण के पवित्र प्रेम से भी जुड़ा हुआ है।
  • होली भगवान शिव-पार्वती विवाह और कामदेव के भस्म होने की कथा से जुड़ी है।

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holi 2021 celebration of holi interesting story lord shiva parvati love kamadeva radha krishna and holi story
holi 2021: होली भारतीय समाज में लोकजनों की भावनाओं को अभिव्यक्त करने का आइना है। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिंदू धर्म में प्रत्येक मास की पूर्णिमा का बड़ा ही महत्व है और यह किसी न किसी उत्सव के रूप में मनाई जाती है। उत्सव के इसी क्रम में होली,वसंतोत्सव के रूप में फाल्गुन मास की पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। इससे आठ दिन पूर्व होलाष्टक लग जाते हैं। अष्टमी से लेकर पूर्णिमा तक के समय में कोई शुभ कार्य या नया कार्य आरम्भ करना शास्त्रों के अनुसार वर्जित माना गया है। होलाष्टक के आठ दिनों में नवग्रह भी उग्र रूप में होते हैं, इसलिए इन दिनों में किए गए शुभ कार्यों में अमंगल होने की आशंका रहती है।

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होली का अर्थ
होली शब्द का संबंध होलिका दहन से भी है और इस शब्द का अर्थ यह भी इशारा करता है कि जो होना था हो गया अर्थात पिछले वर्ष की गलतियां एवं बैर-भाव  को भुलाकर आज के दिन एक दूसरे को रंग लगाकर,गले मिलकर रिश्तों को नए सिरे से आरम्भ किया जाए। इस प्रकार होली भाईचारे,आपसी प्रेम एवं सद्भावना का त्यौहार है। होली भारतीय समाज में लोकजनों की भावनाओं को अभिव्यक्त करने का आइना है।
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परिवार को समाज से जोड़ने के लिए होली जैसे पर्व महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। रीति-रिवाज़ों और परम्पराओं के अनुसार होली उत्तर प्रदेश में 'लट्ठमार होली' के रूप में,असम में 'फगवाह' या 'देओल',बंगाल में 'ढोलपूर्णिमा' और नेपाल आदि में 'फागु' नामों से लोकप्रिय है।
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मुगलकाल में होली
मुगल साम्राज्य के समय में होली की तैयारियां कई दिन पहले ही प्रारम्भ हो जाती थी। मुगलों के द्वारा होली खेलने के संकेत कई ऐतिहासिक पुस्तकों में मिलते हैं। जिसमें अकबर,हुमायूँ,जहांगीर,शाहजहां और बहादुरशाह जफ़र मुख्य बादशाह थे,जिनके समय में होली खेली जाती थी। होलिका दहन बुराइयों के अंत एवं अच्छाइयों की विजय के पर्व के रूप में मनाया जाता है। होली यह संदेश लेकर आती है कि जीवन में आनंद,प्रेम,सतोष एवं दिव्यता होनी चाहिए। जब मनुष्य इन सबका अनुभव करता है तो उसके अंतःकरण में उत्सव का भाव पैदा होता है,जिससे जीवन स्वाभाविक रूप से रंगमय हो जाता हैं।रंगों का पर्व यह भी सिखाता है कि काम,क्रोध,मद,मोह एवं लोभ रुपी दोषों को त्यागकर ईश्वर भक्ति में मन लगाना चाहिए।

होली से जुड़ी पौराणिक कथाएं
हिन्दू धर्म के अनुसार होलिका दहन मुख्य रूप से भक्त प्रह्लाद की याद में किया जाता है। भक्त प्रह्लाद राक्षस कुल में जन्मे थे परन्तु वे भगवान नारायण के अनन्य भक्त थे। उनके पिता हिरण्यकश्यप को उनकी ईश्वर भक्ति अच्छी नहीं लगती थी इसलिए हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को अनेकों प्रकार के जघन्य कष्ट दिए। उनकी बुआ होलिका जिसको ऐसा वस्त्र वरदान में मिला हुआ था जिसको पहनकर आग में बैठने से उसे आग नहीं जला सकती थी। होलिका भक्त प्रह्लाद को मारने के लिए वह वस्त्र पहनकर उन्हें गोद में लेकर आग में बैठ गई। भक्त प्रह्लाद की विष्णु भक्ति के फलस्वरूप होलिका जल गई और प्रह्लाद का बाल भी बांका नहीं हुआ। 

एक अन्य कथा के अनुसार होली का त्योहार राधा-कृष्ण के पवित्र प्रेम से भी जुड़ा हुआ है। पौराणिक समय में श्री कृष्ण और राधा की बरसाने की होली के साथ ही होली के उत्सव की शुरुआत हुई। आज भी बरसाने और नंदगाव की लट्ठमार होली विश्व विख्यात है।

 शिवपुराण की कथा के अनुसार,हिमालय की पुत्री पार्वती शिव से विवाह हेतु कठोर तपस्या कर रहीं थीं और शिव भी तपस्या में लीन थे। इंद्र का भी शिव-पार्वती विवाह में स्वार्थ छिपा था कि ताड़कासुर का वध शिव-पार्वती के पुत्र द्वारा होना था। इसी वजह से इंद्र ने कामदेव को शिवजी की तपस्या भंग करने भेजा परन्तु शिव ने क्रोधित होकर कामदेव को भस्म कर दिया। शिवजी की तपस्या भंग होने के बाद देवताओं ने शिवजी को पार्वती से विवाह के लिए राजी कर लिया।


कामदेव की पत्नी रति को अपने पति के पुनर्जीवन का वरदान और शिवजी का पार्वती से विवाह का प्रस्ताव स्वीकार करने की खुशी में देवताओं ने इस दिन को उत्सव की तरह मनाया। यह दिन फाल्गुन पूर्णिमा का ही दिन था। इस प्रसंग के आधार पर काम की भावना को प्रतीकात्मक रूप से जला कर सच्चे प्रेम की विजय का उत्सव मनाया जाता है।

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