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Hartalika Teej 2024: शुभ योग से भरा है हरतालिका तीज का त्योहार, इस आरती से करें शिव-पार्वती की पूजा

Tue, 03 Sep 2024 07:18 AM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: मेघा कुमारी Updated Tue, 03 Sep 2024 07:18 AM IST
सार

Hartalika Teej 2024: भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज का व्रत रखा जाता है। इस वर्ष 6 सितंबर 2024 को हरतालिका तीज है। 

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Hartalika Teej 2024 puja vidhi shubh muhurat know bhagwan shiv aarti and mantra
Hartalika Teej 2024 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Hartalika Teej 2024: भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज का व्रत रखा जाता है। इस वर्ष 6 सितंबर 2024 को हरतालिका तीज है। पंचांग के अनुसार भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर शुक्ल योग बन रहा है, जो रात 10 बजकर 14 मिनट तक रहेगा। इस दिन गर, वणिज करण के साथ हस्त नक्षत्र का संयोग बनेगा। इस दौरान चंद्रमा तुला राशि में रहेंगे। ऐसे में पूजा पाठ से जुड़े कार्य करने पर मनचाहे परिणामों की प्राप्ति होती हैं। 

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पौराणिक मान्यताओं के अनुसार हरतालिका तीज का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बहुत खास होता है। इस दिन शिव-पार्वती की पूजा का विधान है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, तरक्की और सुखी दांपत्य जीवन के लिए निर्जला उपवास रखती हैं। ये व्रत करवा चौथ से भी अधिक कठिन होता है, क्योंकि इसका पारण अगले दिन ब्रह्म मुहूर्त में किया जाता है। 

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हरतालिका तीज पर पूजा में जहां सामग्रियों का महत्व होता है, वहीं आरती और मंत्रों की भी खास भूमिका होती है। मान्यता है कि शिव-पार्वती की पूजा में आरती मंत्रों को शामिल करने से पूजा का सपूंर्ण फल मिलता है। साथ ही जीवन में सुख-समृद्धि का वास बना रहता है। ऐसे में आइए आरती और मंत्र के बारे में जान लेते हैं। 

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शिव जी की आरती 

ओम जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव अर्द्धांगी धारा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे। हंसानन गरूड़ासन
वृषवाहन साजे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
मधु कैटव दोउ मारे, सुर भयहीन करे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
लक्ष्मी, सावित्री पार्वती संगा।
पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
पर्वत सोहें पार्वतू, शंकर कैलासा।
भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
जया में गंग बहत है, गल मुण्ड माला।
शेषनाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवान्छित फल पावे।।
ओम जय शिव ओंकारा।। ओम जय शिव ओंकारा।।


महामृत्युंजय मंत्र
ऊँ हौं जूं स: ऊँ भुर्भव: स्व: ऊँ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। 
ऊर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ऊँ भुव: भू: स्व: ऊँ स: जूं हौं ऊँ।।

शिव जी का मूल मंत्र
ऊँ नम: शिवाय।।

भगवान शिव के प्रभावशाली मंत्र
ओम साधो जातये नम:।। ओम वाम देवाय नम:।।
ओम अघोराय नम:।। ओम तत्पुरूषाय नम:।।
ओम ईशानाय नम:।। ॐ ह्रीं ह्रौं नमः शिवाय।।

शिव के प्रिय मंत्र
ॐ नमः शिवाय।
नमो नीलकण्ठाय।
ॐ पार्वतीपतये नमः।

मां पार्वती की आरती 
जय पार्वती माता, जय पार्वती माता.
ब्रह्म सनातन देवी, शुभ फल की दाता..
जय पार्वती माता...
अरिकुल पद्मा विनासनी जय सेवक त्राता.
जग जीवन जगदम्बा हरिहर गुण गाता.
जय पार्वती माता...
सिंह को वाहन साजे कुंडल है साथा.
देव वधु जहं गावत नृत्य कर ताथा..
जय पार्वती माता...
सतयुग शील सुसुन्दर नाम सती कहलाता.
हेमांचल घर जन्मी सखियन रंगराता..
जय पार्वती माता...
शुम्भ-निशुम्भ विदारे हेमांचल स्याता.
सहस भुजा तनु धरिके चक्र लियो हाथा..
जय पार्वती माता...
सृष्टि रूप तुही जननी शिव संग रंगराता.
नंदी भृंगी बीन लाही सारा मदमाता.
जय पार्वती माता...
देवन अरज करत हम चित को लाता.
गावत दे दे ताली मन में रंगराता..
जय पार्वती माता...
श्री प्रताप आरती मैया की जो कोई गाता.
सदा सुखी रहता सुख संपति पाता..
जय पार्वती माता...।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। इस लेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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