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महादेव और माता पार्वती के मिलन का दिन है हरियाली तीज

Mon, 13 Aug 2018 01:22 PM IST
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Updated Mon, 13 Aug 2018 01:22 PM IST
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hariyali teej 2018 know importance of vrat and pujan
shiv parvati

श्रावण मास में लड़कियों और महिलाओं के कई व्रत और त्योहार आते हैं। इनमें सुहागिनों के बीच हरियाली तीज का अपना ही महत्व है। साल में कुल चार तीज मनाई जाती हैं, जिनमें हरियाली तीज का विशेष महत्व है।राजस्थान, हरियाणा, बिहार और उत्तर भारत के कई हिस्सों में इस त्योहार को बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। 

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सुहागिनों की पूरी होती है हर कामना 
हरियाली तीज श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है। तीज के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की शादी रचाई जाती है। इस दिन सुहागिनें अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं। वहीं कई जगहों पर कुवांरी लड़कियां अच्छे पति की कामना में इस व्रत को रखती हैं। मान्यता है कि तीज का व्रत रखने से विवाहित स्त्रियों के पति की उम्र लंबी होती है और अविवाहित लड़कियों को मनचाहा जीवनसाथी मिलता है। 
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हरियाली तीज का शुभ मुहूर्त 
हरियाली तीज की तिथि 13 अगस्त की सुबह 8 बजकर 38 मिनट पर शुरू होगी। दूसरे दिन 14 अगस्त की सुबह 5 बजकर 46 मिनट पर हरियाली तीज समाप्त हो जाएगी। 

कैसे मनाते हैं हरियाली तीज 
हरियाली तीज के दिन सुहागिन महिलाएं दिन भर व्रत रखती हैं। इस दिन महिलाएं सोलह श्रृंगार कर हाथों में मेहंदीख् हरे रंग के कपड़े और हरी चूड़ियां पहनती हैं। दिन-भर स्त्रियां तीज के गीत गाती हैं और नाचती हैं। सावन में झूला झूलने का भी महत्व है, इसलिए इस दिन महिलाएं मिलकर झूला भी झूलती हैं। शाम के समय भगवान शिव और माता पार्वती के पूजन के बाद चंद्रमा की पूजा की जाती है। इस दिन सुहागिन स्त्रियों को घर के बड़े-बुजुर्ग या सास-ससुर श्रृंगार दान देते हैं। 
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पूजन विधि 
प्रात: स्नान के पश्चात् व्रत का संकल्प लें। घर के मंदिर में भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश की मूर्ति स्थापित करें। अब इन मूर्तियों की विधि-विधान से पूजा करें। फिर माता पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित करें। इसके बाद भगवान शिव को बेल पत्र और पीला वस्त्र चढ़ाएं। तीज की कथा पढ़ने के बाद आरती करें। अगले दिन सुबह माता पार्वती को सिंदूर अर्पित कर भोग चढ़ाएं। प्रसाद ग्रहण करने के बाद व्रत का पारण करें। 

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