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Govardhan Puja 2024: गोवर्धन पूजा पर करें इस कथा का पाठ, मिलेगा श्रीकृष्ण का आशीर्वाद

Fri, 01 Nov 2024 03:22 PM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ज्योति मेहरा Updated Fri, 01 Nov 2024 03:22 PM IST
सार

गोवर्धन पूजा के दौरान इस कथा का पाठ करना बेहद जरूरी होता है। इसके बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। आइए जानते हैं गोवर्धन कथा, जिसके पाठ से कृष्ण जी की कृपा प्राप्त होती है। 

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Govardhan Puja 2024 shudh muhurat govardhan puja ki katha in hindi
Govardhan Puja 2024 - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

Govardhan Puja 2024: गोवर्धन पूजा का हिंदू धर्म में बड़ा महत्व है। इसे अन्नकूट के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान कृष्ण की पूजा की जाती है। वैदिक पंचांग के अनुसार यह पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है। इस साल गोवर्धन पूजा 2 नवंबर 2024 को मनाई जा रही है। पांच दिवसीय दीपोत्सव पर्व का यह चौथा दिन होता है,  जिसका लोग बेसब्री से इंतजार करते हैं। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की विधि-विधान के साथ पूजा की जाती है। इस दिन गोवर्धन महाराज की भी पूजा की जाती है और उनकी परिक्रमा की जाती है। इस दिन पूजा के दौरान गोवर्धन कथा का पाठ करना भी बेहद जरूरी होता है। इसके बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। आइए जानते हैं गोवर्धन कथा, जिसके पाठ से कृष्ण जी की कृपा प्राप्त होती है। 

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गोवर्धन पूजा 2024 तिथि और पूजा मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि की शुरुआत 01 नवंबर को शाम 06:16 बजे से होगी और इस तिथि का समापन 02 नवंबर रात 08:21 बजे होगा। ऐसे में उदयातिथि के मुताबिक गोवर्धन पूजा का पर्व 02 नवंबर को ही मनाया जाएगा। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 06:34 बजे से 08:46 तक रहेगा।
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गोवर्धन पूजा मुहूर्त
2 नवंबर 2024 को गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त प्रात: काल 6 बजे से लेकर 8 बजे तक है। इसके बाद दोपहर 03:23 बजे से लेकर 05:35 बजे के बीच भी गोवर्धन की पूजा की जा सकती है।
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गोवर्धन पूजा की कथा 
हिंदू धर्म में गोवर्धन पूजा का खास महत्व है। इस दिन भगवान कृष्ण की पूजा का विधान है। इस शुभ दिन से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं हैं। हिंदू धर्मग्रंथ, भागवत पुराण के अनुसार एक कथा ऐसी है, जिसमें बताया गया है कि एक समय की बात है, जब गोकुलवासी इंद्र देव की पूजा करते थे, लेकिन फिर एक दिन भगवान कृष्ण ने उन्हें भगवान इंद्र की बजाए गोवर्धन पर्वत की पूजा करने के लिए कहा, क्योंकि गोवर्धन पर्वत ही गाव के लोगों का अन्न, और उनके पशुओं के लिए चारे का श्रोत था।   


ऐसे में सभी लोगों ने श्रीकृष्ण की बात मान ली और अन्नकूट की पूजा प्रारंभ कर दी। इस बात से भगवान इंद्र क्रोधित हो गए और उन्होंने मूसलाधार बारिश शुरू कर दी, जिससे गोकुल में कोहराम मच गया। तभी भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठा लिया और सभी गोकुलवासी इस पर्वत के नीचे आकर सुरक्षित हो गए। यह देखते ही श्रीकृष्ण की दिव्य शक्तियों को पहचानकर इंद्र देव शांत हो गए और उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ। इसके लिए देवराज इंद्र ने क्षमा मांगी और बारिश बंद कर दी। तभी से इस दिन गोवर्धन पर्वत और भगवान कृष्ण की पूजा की परंपरा शुरू हो गई। 



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
 
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