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Gopashtami 2024: इस शुभ मुहूर्त में करें गोपाष्टमी की पूजा, यहां जानें पूजा विधि और भोग
Sat, 09 Nov 2024 08:23 AM IST
श्वेता सिंह
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: श्वेता सिंह
Updated Sat, 09 Nov 2024 08:23 AM IST
सार
Gopashtami Puja Vidhi 2024: हिंदू कैलेंडर के अनुसार गोपाष्टमी कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। इस साल यह 9 नवंबर 2024 को मनाई जाएगी। आइए जानते हैं इस पर्व से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें।
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गोपाष्टमी कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है।
- फोटो : amar ujala
विस्तार
Gopashtami Date 2024: सनातन धर्म में गोपाष्टमी पर्व का बड़ा धार्मिक महत्व है। यह दिन भगवान कृष्ण की पूजा को समर्पित है। इस शुभ दिन पर, लोग गायों और बछड़ों की भी पूजा करते हैं क्योंकि वे भगवान कृष्ण को बहुत प्रिय हैं। यह दिन मुख्य रूप से मथुरा, वृन्दावन और ब्रज में मनाया जाता है।
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हिंदू कैलेंडर के अनुसार गोपाष्टमी कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। इस साल यह 9 नवंबर 2024 को मनाई जाएगी। आइए जानते हैं इस पर्व से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें।
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गोपाष्टमी 2024 शुभ मुहूर्त है
वैदिक पंचांग के अनुसार कार्तिक माह की अष्टमी तिथि शुक्ल पक्ष की शुरुआत 8 नवंबर को रात्रि 11:56 बजे से हो रही है। वहीं, अगले दिन 9 नवंबर को रात 10:45 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के अनुसार गोपाष्टमी का पर्व 09 नवंबर को मनाया जाएगा। इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:43 बजे से 12:26 बजे तक रहेगा।
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विजय मुहूर्त
दोपहर 01 बजकर 53 मिनट से 02 बजकर 37 मिनट तक। इस दौरान पूजा किसी भी प्रकार का शुभ कार्य किया जा सकता है।
भोग
गोपाष्टमी के दिन कान्हा जी को माखन और मिश्री का भोग लगाना चाहिए। वहीं गाय और बछड़ों को हरी घास खिलानी चाहिए।
गोपाष्टमी पर करें इन मंत्रों का जाप
गोपाष्टमी पर कान्हा जी को प्रसन्न करने के लिए आप नीचे दिए गये मन्त्रों का जाप भी कर सकते हैं।
सुरूपा बहुरूपाश्च विश्वरूपाश्च मातरः।
गावो मामुपतिष्ठन्तामिति नित्यं प्रकीर्तयेत्।।
सुरभि त्वं जगन्मातर्देवी विष्णुपदे स्थिता, सर्वदेवमये ग्रासं मया दत्तमिमं ग्रस,
तत: सर्वमये देवि सर्वदेवैरलड्कृते, मातर्ममाभिलाषितं सफलं कुरु नन्दिनी!!
गोपाष्टमी पूजा विधि
- भक्त सुबह जल्दी उठकर पूजा अनुष्ठान शुरू होने से पहले घर की सफाई करें।
- स्नान के बाद गाय माता की मूर्ति को भगवान कृष्ण के पास रखें।
- उन्हें गंगाजल से स्नान कराएं।
- कुमकुम, चंदन आदि से तिलक लगाएं।
- घी का दीपक जलाएं।
- फल, फूल, तुलसी के पत्ते और घर में बनी मिठाई अर्पित करें।
- वैदिक मंत्रों का जाप करें और श्रीकृष्ण के साथ गौ माता की पूजा करें।
- वहीं जिन लोगों के घर में गायें हैं उन्हें सबसे पहले उन्हें नहलाकर हल्दी, रोली, फूल, घंटी आदि से सजाना चाहिए।
- फिर उन्हें हरी घास, रोटी और गुड़ खिलाएं।
- इसके अलावा जिनके घर में गाय नहीं है, वे चाहें तो खलिहान में जाकर गायों की सेवा कर सकते हैं।
- शाम के समय न केवल भगवान श्रीकृष्ण की बल्कि गौ माता की भी पूजा करें।
- साथ ही भगवान कृष्ण के मंदिरों में भी जाएं और विशेष पूजा-अर्चना करें।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।