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Ganga Saptami 2024: आज है गंगा सप्तमी, जानिए कौन हैं देवी गंगा, पूजनविधि और महत्व
Tue, 14 May 2024 06:20 AM IST
विनोद शुक्ला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Tue, 14 May 2024 06:20 AM IST
सार
Maa Ganga Ki Utpatti Katha: आज गंगा सप्तमी के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग जैसे काफी शुभ योग का भी निर्माण हो रहा है। इस दिन पुष्य नक्षत्र भी रहने वाला है, जिसके कारण इस दिन का महत्व और भी ज्यादा बढ़ गया है।
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ganga saptami 2024: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गंगा पूजन और स्नान करने से समस्त पापों का क्षय होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
Ganga Saptami 2024: आज यानी 14 मई को गंगा सप्तमी मनाई जा रही है। सनातन धर्म में गंगा सप्तमी के दिन का बहुत महत्व है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन देवी गंगा की पूजा का विधान है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह त्योहार वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है। सप्तमी तिथि 13 मई, को शाम 5 बजकर 20 मिनट पर शुरू होगी, जो कि आज यानी 14 मई, शाम 6 बजकर 49 मिनट पर समाप्त होगी। आज गंगा सप्तमी पुष्य योग में मनाई जाएगी। साथ ही इस साल गंगा सप्तमी के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग जैसे काफी शुभ योग का भी निर्माण हो रहा है। इस दिन पुष्य नक्षत्र भी रहने वाला है, जिसके कारण इस दिन का महत्व और भी ज्यादा बढ़ गया है।
कौन हैं मां गंगा
पद्मपुराण के अनुसार आदिकाल में ब्रह्माजी ने सृष्टि की 'मूलप्रकृति' से कहा-''हे देवी ! तुम समस्त लोकों का आदिकारण बनो, मैं तुमसे ही संसार की सृष्टि प्रारंभ करूंगा''। ब्रह्मा जी के कहने पर मूल प्रकृति-गायत्री , सरस्वती, लक्ष्मी, उमादेवी, शक्ति बीजा, तपस्विनी और धर्मद्रवा इन सात स्वरूपों में प्रकट हुईं। इनमें से सातवीं 'पराप्रकृति धर्मद्रवा' अर्थात देवी गंगा को सभी धर्मों में प्रतिष्ठित जानकार ब्रह्माजी ने अपने कमण्डल में धारण कर लिया। एक अन्य कथा के अनुसार गंगा पर्वतों के राजा हिमवान और मैना की पुत्री हैं,इ स प्रकार से गंगा मैया देवी पार्वती की बहन हैं।
इस दिन शिव की जटाओं में पहुंची गंगा
उल्लेख मिलता है कि सतयुग राजा बलि के यज्ञ के समय वामन अवतार लिए जब भगवान विष्णु का एक पग आकाश और ब्रह्माण्ड को भेदकर ब्रह्मा जी के सामने स्थित हुआ, उस समय अपने कमण्डल के जल से ब्रह्माजी ने श्रीविष्णु के चरण का पूजन किया। चरण धोते समय श्रीविष्णु का चरणोदक हेमकूट पर्वत पर गिरा। वहां से भगवान शिव के पास पहुंचकर यह जल गंगा के रूप में उनकी जटाओं में समा गया। गंगा बहुत काल तक शिव की जटाओं में भ्रमण करती रहीं।
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इस दिन गंगा मैया के स्मरण, पूजन और स्नान से धन-सम्पत्ति, सुख और यश-सम्मान की प्राप्ति होती है तथा समस्त पापों का नाश होता है। ज्योतिषीय धारणा के अनुसार इस दिन गंगा पूजन से ग्रहों के अशुभ प्रभाव कम होते हैं। गंगा पूजन करना मोक्ष प्रदायक, अमोघ फलदायक माना गया है और इस दिन किया दान कई जन्मों के पुण्य के रूप में प्राणी को मिलता है।
ऐसे करें मां गंगा की पूजा
इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में अपने इष्ट देवी-देवताओं की पूजा करनी चाहिए। दाहिने हाथ में जल, पुष्प, फल, गंध व कुश लेकर गंगा सप्तमी व्रत का संकल्प लेना चाहिए। मां गंगा को धूप, दीप, पुष्प आदि नैवेद्य आदि अर्पित कर पूजा करनी चाहिए। श्रीगंगा स्तुति और श्रीगंगा स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। विशेष रूप से इस दिन दान-पुण्य करना बहुत फलदायी माना गया है। इसके साथ ही गंगाजी के वैदिक मंत्रों का जाप करें।
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कौन हैं मां गंगा
पद्मपुराण के अनुसार आदिकाल में ब्रह्माजी ने सृष्टि की 'मूलप्रकृति' से कहा-''हे देवी ! तुम समस्त लोकों का आदिकारण बनो, मैं तुमसे ही संसार की सृष्टि प्रारंभ करूंगा''। ब्रह्मा जी के कहने पर मूल प्रकृति-गायत्री , सरस्वती, लक्ष्मी, उमादेवी, शक्ति बीजा, तपस्विनी और धर्मद्रवा इन सात स्वरूपों में प्रकट हुईं। इनमें से सातवीं 'पराप्रकृति धर्मद्रवा' अर्थात देवी गंगा को सभी धर्मों में प्रतिष्ठित जानकार ब्रह्माजी ने अपने कमण्डल में धारण कर लिया। एक अन्य कथा के अनुसार गंगा पर्वतों के राजा हिमवान और मैना की पुत्री हैं,इ स प्रकार से गंगा मैया देवी पार्वती की बहन हैं।
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इस दिन शिव की जटाओं में पहुंची गंगा
उल्लेख मिलता है कि सतयुग राजा बलि के यज्ञ के समय वामन अवतार लिए जब भगवान विष्णु का एक पग आकाश और ब्रह्माण्ड को भेदकर ब्रह्मा जी के सामने स्थित हुआ, उस समय अपने कमण्डल के जल से ब्रह्माजी ने श्रीविष्णु के चरण का पूजन किया। चरण धोते समय श्रीविष्णु का चरणोदक हेमकूट पर्वत पर गिरा। वहां से भगवान शिव के पास पहुंचकर यह जल गंगा के रूप में उनकी जटाओं में समा गया। गंगा बहुत काल तक शिव की जटाओं में भ्रमण करती रहीं।
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गंगा पूजन का महत्वइस दिन गंगा मैया के स्मरण, पूजन और स्नान से धन-सम्पत्ति, सुख और यश-सम्मान की प्राप्ति होती है तथा समस्त पापों का नाश होता है। ज्योतिषीय धारणा के अनुसार इस दिन गंगा पूजन से ग्रहों के अशुभ प्रभाव कम होते हैं। गंगा पूजन करना मोक्ष प्रदायक, अमोघ फलदायक माना गया है और इस दिन किया दान कई जन्मों के पुण्य के रूप में प्राणी को मिलता है।
ऐसे करें मां गंगा की पूजा
इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में अपने इष्ट देवी-देवताओं की पूजा करनी चाहिए। दाहिने हाथ में जल, पुष्प, फल, गंध व कुश लेकर गंगा सप्तमी व्रत का संकल्प लेना चाहिए। मां गंगा को धूप, दीप, पुष्प आदि नैवेद्य आदि अर्पित कर पूजा करनी चाहिए। श्रीगंगा स्तुति और श्रीगंगा स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। विशेष रूप से इस दिन दान-पुण्य करना बहुत फलदायी माना गया है। इसके साथ ही गंगाजी के वैदिक मंत्रों का जाप करें।