गणेश चतुर्थी 2020: जानें गणेश स्थापना मंत्र, और पूरे गणेश उत्सव में पढ़े क्षमा मंत्र
22 अगस्त को गणेश चतुर्थी का त्योहार है। इस दिन लोग धूमधाम के साथ गणेश जी को अपने घर लेकर आएंगे और स्थापना करेंगे, और पूरे गणेश उत्सव में विधि-विधान के साथ उनकी पूजा अर्चना करेंगे। लेकिन गणेश जी को स्थापित करते समय स्थापना मंत्र का उच्चारण अवश्य करना चाहिए, उसके बाद विधि-विधान से बप्पा को विराजमान करना चाहिए। इसी तरह से गणपति बप्पा को विराजमान करने के बाद गणेश उत्सव के दिनों में प्रतिदिन पूजा की जाएगी, पूजा में जाने अनजाने हुई भूल की क्षमा मांगने के लिए रोज पूजा के अंत में क्षमा याचना मंत्र पढ़ना चाहिए, तभी पूजा संपन्न होती है। पूजा का पूर्ण फल तभी प्राप्त होता है जब पूजा के अंत में पूजा के दौरान हुई किसी भी त्रुटि के लिए क्षमायाचना मंत्र का उच्चारण किया जाए, आइए जानते हैं कि गणपति को स्थापित करते समय कौन सा मंत्र पढ़ना चाहिए और क्या है क्षमा याचना मंत्र...
गणपति बप्पा का स्थापना मंत्र
चतुर्थी के दिन बप्पा को स्थापित करते समय इस मंत्र का जाप करें।
अस्य प्राण प्रतिषठन्तु अस्य प्राणा: क्षरंतु च।
श्री गणपते त्वम सुप्रतिष्ठ वरदे भवेताम।।
जब आप अपने घर में गणपति को स्थापित करने के बाद प्रतिदिन पूजा करें, तो अंत में आरती के बाद गणपति जी के समक्ष हाथ जोड़कर परिक्रमा करते हुए, इस मंत्र का जाप करें एवं गणपति बप्पा का क्षमा-प्रार्थना मंत्र बोले एवं क्षमा मांगे। इससे पूजा में हुई भूल-चूक से क्षमा मिलती है और पूजा पूर्ण होती है।
गणेशपूजने कर्म यत् न्यूनमधिकम कृतम।
तेन सर्वेण सर्वात्मा प्रसन्न अस्तु गणपति सदा मम।।
इस तरह आप अपने घर पर पूरे गणेश उत्सव के दिनों में विधि विधान से बप्पा की स्थापना करने के साथ उनकी पूजा अर्चना करें, अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश जी को धूमधाम के साथ विदा करें, बप्पा आपकी हर विघ्न बाधा को दूर करके मनोकामना पूर्ण करेगें।