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Chhath Puja 2024: आज से शुरू छठ का निर्जला व्रत, जानें खरना का प्रसाद ग्रहण करने का शुभ समय
Wed, 06 Nov 2024 12:31 PM IST
ज्योति मेहरा
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: ज्योति मेहरा
Updated Wed, 06 Nov 2024 12:31 PM IST
सार
6 नवंबर को यानी आज खरना है, जो सबसे अहम दिन होता है। इस दिन से ही 36 घंटे के निर्जला उपवास का आरंभ होता है। छठ महापर्व में खरना का विशेष महत्व होता है। आइए जानते हैं इसका शुभ मुहूर्त...
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छठ पूजा 2024 खरना शुभ मुहूर्त
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
Chhath Puja 2024: 5 नवंबर 2024 को नहाय खाय के साथ ही चार दिवसीय छठ महापर्व की शुरुआत हो चुकी है। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से सप्तमि तिथि तक मनाए जाने वाले छठ पर्व में छठी मईया और सूर्य देव की पूजा की जाती है। 6 नवंबर को यानी आज खरना है, जो सबसे अहम दिन होता है। इस दिन से ही 36 घंटे के निर्जला उपवास का आरंभ होता है। छठ महापर्व में खरना का विशेष महत्व होता है। इस दिन छठ का विशेष प्रसाद बनाया और खिलाया जाता है।
छठ पूजा के दूसरे दिन रोटी, गुड़ की खीर और फल का भोग लगाया जाता है। इसे छठ का महाप्रसाद कहा जाता है। खरना वाले दिन भगवान का विशेष प्रसाद व्रती ही तैयार करते हैं और शाम के समय भगवान को अर्पित करने के बाद इस प्रसाद को ग्रहण किया जाता है। खरना से ही छठ का उपवास आरंभ होता है, जिसका पारण सप्तमी तिथि के दिन अर्घ्य देने के बाद किया जाता है।
खरना पूजा विधि
छठ महापर्व के दूसरे दिन खरना का प्रसाद खाया जाता है, जिसे महाप्रसाद कहा जाता है। इस दिन घर की साफ-सफाई और शुद्धता का ध्यान रखा जाता है। इस दिन व्रती स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनकर खरना का प्रसाद बनाते हैं। इस दौरान वह उपवास में रहते हैं। खरना का प्रसाद मिट्टी के चूल्हे में आम की लकड़ी जलाकर तैयार किया जाता है। प्रसाद के रूप में दूध, चावल और गुड़ की खीर बनती है। शाम को देवी देवताओं, छठी मैया और सूर्यदेव को प्रसाद अर्पित करने के बाद व्रती इस प्रसाद को ग्रहण करता है। इसके बाद पूरा परिवार यह प्रसाद खाता है। इस महाप्रसाद को ज्यादा से ज्यादा लोगों को खिलाया जाता है। मान्यता है कि जितने ज्यादा लोगों को खरना का प्रसाद खिलाने का सौभाग्य मिलता है उतना ही अधिक पुण्य मिलता है।
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खरना शुभ मुहूर्त
खरना के दिन व्रती पूरे दिन उपवास रहती है और खरना का प्रसाद बनाती हैं। शाम में शुभ मुहूर्त पर में खीर और रोटी का भोग लगाया जाता है। इसके बाद इसे व्रती ग्रहण कर निर्जला व्रत की शुरुआत करते हैं। आज 6 नवंबर को खरना के दिन कई शुभ योग बना रहे हैं। इस दौरान खरना पूजा का शुभ मुहूर्त सुर्यास्त के बाद होगा। इस समय खरना का प्रसाद ग्रहण कर सकते हैं।
खरना 2024 का शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त- 04:59 बजे से 05:52 बजे तक
सूर्योदय- सुबह 06:45 बजे पर
सूर्यास्त- शाम 09:26 बजे पर
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छठ पूजा के दूसरे दिन रोटी, गुड़ की खीर और फल का भोग लगाया जाता है। इसे छठ का महाप्रसाद कहा जाता है। खरना वाले दिन भगवान का विशेष प्रसाद व्रती ही तैयार करते हैं और शाम के समय भगवान को अर्पित करने के बाद इस प्रसाद को ग्रहण किया जाता है। खरना से ही छठ का उपवास आरंभ होता है, जिसका पारण सप्तमी तिथि के दिन अर्घ्य देने के बाद किया जाता है।
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खरना पूजा विधि
छठ महापर्व के दूसरे दिन खरना का प्रसाद खाया जाता है, जिसे महाप्रसाद कहा जाता है। इस दिन घर की साफ-सफाई और शुद्धता का ध्यान रखा जाता है। इस दिन व्रती स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनकर खरना का प्रसाद बनाते हैं। इस दौरान वह उपवास में रहते हैं। खरना का प्रसाद मिट्टी के चूल्हे में आम की लकड़ी जलाकर तैयार किया जाता है। प्रसाद के रूप में दूध, चावल और गुड़ की खीर बनती है। शाम को देवी देवताओं, छठी मैया और सूर्यदेव को प्रसाद अर्पित करने के बाद व्रती इस प्रसाद को ग्रहण करता है। इसके बाद पूरा परिवार यह प्रसाद खाता है। इस महाप्रसाद को ज्यादा से ज्यादा लोगों को खिलाया जाता है। मान्यता है कि जितने ज्यादा लोगों को खरना का प्रसाद खिलाने का सौभाग्य मिलता है उतना ही अधिक पुण्य मिलता है।
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खरना शुभ मुहूर्त
खरना के दिन व्रती पूरे दिन उपवास रहती है और खरना का प्रसाद बनाती हैं। शाम में शुभ मुहूर्त पर में खीर और रोटी का भोग लगाया जाता है। इसके बाद इसे व्रती ग्रहण कर निर्जला व्रत की शुरुआत करते हैं। आज 6 नवंबर को खरना के दिन कई शुभ योग बना रहे हैं। इस दौरान खरना पूजा का शुभ मुहूर्त सुर्यास्त के बाद होगा। इस समय खरना का प्रसाद ग्रहण कर सकते हैं।
खरना 2024 का शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त- 04:59 बजे से 05:52 बजे तक
सूर्योदय- सुबह 06:45 बजे पर
सूर्यास्त- शाम 09:26 बजे पर
Chhath Puja Kharna 2024 Wishes: इन संदेशों के जरिए महापर्व छठ की खरना पूजा पर अपनों को भेजें शुभकामनाएं
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।