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Chhath Puja 2024 Kharna: छठ पूजा का दूसरा दिन खरना आज, जानिए इसके नियम

Wed, 06 Nov 2024 05:55 AM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: मेघा कुमारी Updated Wed, 06 Nov 2024 05:55 AM IST
सार

Chhath Puja 2024 Kharna: छठ पूजा का आरंभ कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से होता है, और सप्तमी तिथि पर इसका समापन किया जाता है। 

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Chhath Puja 2024 kharna puja significance know kharna rules in hindi
छठ पूजा 2024 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Chhath Puja 2024 Kharna: छठ पूजा का आरंभ कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से होता है, और सप्तमी तिथि पर इसका समापन किया जाता है। इस बार 05 नवंबर 2024 से छठ की शुरूआत हो चुकी है, जो 08 नवंबर तक चलेगा। इस दौरान महिलाएं संतान की तरक्की और लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं, जो लगभग 36 घंटे तक चलता है।

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पंचांग के अनुसार छठ पूजा का आरंभ कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को नहाय-खाय के साथ होता है। दूसरे दिन खरना की रस्म की जाती है। तीसरे दिन यानी कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि पर डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देने का विधान है। छठ के चौथे दिन यानी सप्तमी तिथि पर उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाता है। आज यानी 6 नवंबर बुधवार के दिन खरना है। इस दिन घरों में छठ का विशेष प्रसाद बनाया जाता है। ऐसे में आइए इस दिन के महत्व को जानते हैं।

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छठ पूजा के दूसरे दिन का महत्व
छठी मैया का समर्पित छठ पूजा का पर्व चार दिनों चक चलता है। पहले दिन से लेकर चौथे दिन तक माता की विधि अनुसार पूजा की जाती हैं। छठ का दूसरा दिन और भी खास माना जाता है। इस दिन महिलाएं छठ का प्रसाद बनाने का कार्य करती हैं। इस दिन घरों में खीर, ठेकुआ आदि का प्रसाद बनाया जाता है, जो देवताओं को अर्पित करने के बाद ही ग्रहण किया जाता ।
 
खरना के नियम

  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार खरना के दिन की साफ-सफाई का खास ध्यान रखना चाहिए।
  • इस दौरान छठ के लिए बनाए जाने वाले प्रसाद को हमेशा साफ बर्तनों व सामग्रियों के साथ बनाना चाहिए।
  • प्रसाद बनाते समय उसे चखने की भूल न करें।
  • छठ पर्व के दिनों में घर में प्याज और लहसुन का सेवन न करें। घर में भी इसका उपयोग न होने दें।
  • इस दौरान व्रती महिलाओं को पलंग या चारपाई पर नहीं सोना चाहिए। आप जमीन पर बिस्तर बिछाकर सोएं।


छठ मईया की आरती

जय छठी मईया ऊ जे केरवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए।
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए॥जय॥

ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय।
ऊ जे नारियर जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए॥जय॥

मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय॥जय॥

अमरुदवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए।
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए॥जय॥

ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय।
शरीफवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए॥जय॥

मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय॥जय॥

ऊ जे सेववा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए।
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए॥जय॥

ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय।
सभे फलवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए॥जय॥

मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय॥जय॥

 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

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