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Hindi News ›   Spirituality ›   Festivals ›   Chaitra Navratri 2025 Maa Durga Aarti Lyrics Ambe Tu Hai Jagdambe Kali In Hindi

Ambe Mata Ki Aarti: ‘अंबे तू है जगदंबे काली…’ नवरात्रि में सुबह-शाम रोजाना करें माता रानी की ये आरती

Tue, 01 Apr 2025 11:39 AM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: मेघा कुमारी Updated Tue, 01 Apr 2025 11:39 AM IST
सार

Ambe Tu Hai Jagdambe Kali Aarti Lyrics: चैत्र नवरात्रि हिंदू नववर्ष का पहला पर्व है, जिसकी शुरुआत चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है। इसका समापन नवमी तिथि पर कन्या पूजन के साथ किया जाता है। इस वर्ष 30 मार्च 2025 से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो चुकी है, जिसका समापन 6 अप्रैल 2025 को रामनवमी के दिन है। 

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Chaitra Navratri 2025 Maa Durga Aarti Lyrics Ambe Tu Hai Jagdambe Kali In Hindi
Ambe Tu Hai Jagdambe Kali Aarti Lyrics - फोटो : freepik

विस्तार

Ambe Tu Hai Jagdambe Kali Aarti Lyrics: चैत्र नवरात्रि हिंदू नववर्ष का पहला पर्व है, जिसकी शुरुआत चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है। इसका समापन नवमी तिथि पर कन्या पूजन के साथ किया जाता है। इस वर्ष 30 मार्च 2025 से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो चुकी है, जिसका समापन 6 अप्रैल 2025 को रामनवमी के दिन है। ये सभी दिन मां दुर्गा की पूजा-अर्चना को समर्पित है। मान्यता है कि इस अवधि में देवी का आगमन पृथ्वी लोक पर होता है, इसलिए उनकी उपासना से साधक के सभी दुखों का निवारण होता है, इतना ही नहीं देवी दुर्गा की कृपा से सभी गृह दोष की समाप्ति भी होती है। इस दौरान देवी को प्रसन्न करने के लिए जहां पूरे नौ दिन उपवास किया जाता है, वहीं विशेष कृपा प्राप्ति के लिए आरती भी की जाती है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार नवरात्रि में मां दुर्गा की आरती करने से न केवल परिवार में सुख-समृद्धि बल्कि पूजा का संपूर्ण फल भी प्राप्त होता है। ऐसे में आइए इस आरती के बारे में जानते हैं... 

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अंबे जी की आरती 

अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली,
तेरे ही गुण गावें भारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती।
तेरे भक्त जनो पर माता भीर पड़ी है भारी।
दानव दल पर टूट पड़ो मां करके सिंह सवारी॥
सौ-सौ सिहों से बलशाली, है अष्ट भुजाओं वाली,
दुष्टों को तू ही ललकारती।
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥

माँ-बेटे का है इस जग में बड़ा ही निर्मल नाता।
पूत-कपूत सुने है पर ना माता सुनी कुमाता॥
सब पे करूणा दर्शाने वाली, अमृत बरसाने वाली,
दुखियों के दुखड़े निवारती।
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥

नहीं मांगते धन और दौलत, न चांदी न सोना।
हम तो मांगें तेरे चरणों में छोटा सा कोना॥
सबकी बिगड़ी बनाने वाली, लाज बचाने वाली,
सतियों के सत को संवारती।
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥

चरण शरण में खड़े तुम्हारी, ले पूजा की थाली।
वरद हस्त सर पर रख दो माँ संकट हरने वाली॥
माँ भर दो भक्ति रस प्याली, अष्ट भुजाओं वाली,
भक्तों के कारज तू ही सारती।
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥
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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

 

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