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Hindi News ›   Spirituality ›   Festivals ›   Chaitra Navratri 2024 Maa Durga Aarti Lyrics Ambe Tu Hai Jagdambe Kali

Chaitra Navratri 2024: ‘अंबे तू है जगदंबे काली…’ चैत्र नवरात्रि में रोजाना करें मां दुर्गा की ये आरती

Tue, 09 Apr 2024 05:47 AM IST
आशिकी पटेल धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: आशिकी पटेल Updated Tue, 09 Apr 2024 05:47 AM IST
सार

Maa Durga Aarti Lyrics: मान्यता है कि नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा पृथ्वी पर निवास करती हैं और अपने भक्तों की मनोकामनाओं को जल्द सुनती हैं, इसलिए कहा जाता है कि नवरात्रि में की गई पूजा का लाभ भी जल्दी ही मिलता है। ऐसे में यदि आप माता रानी को प्रसन्न करना चाहते हैं नवरात्रि के नौ दिनों में रोजाना अंबे जी की आरती करें। 

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Chaitra Navratri 2024 Maa Durga Aarti Lyrics Ambe Tu Hai Jagdambe Kali
अंबे जी की आरती - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Chaitra Navratri 2024: 9 अप्रैल से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो रही है। इसका समापन 17 अप्रैल को राम नवमी वाले दिन होगा। जगत जननी मां जगदंबे की उपासना का पावन पर्व नवरात्रि बहुत ही खास माना जाता है। वैसे तो सालभर माता रानी की पूजा की जाती है, लेकिन नवरात्रि के दिनों में इनकी पूजा का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। मान्यता है कि नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा पृथ्वी पर निवास करती हैं और अपने भक्तों की मनोकामनाओं को जल्द सुनती हैं, इसलिए कहा जाता है कि नवरात्रि में की गई पूजा का लाभ भी जल्दी ही मिलता है। ऐसे में यदि आप माता रानी को प्रसन्न करना चाहते हैं नवरात्रि के नौ दिनों में रोजाना अंबे जी की आरती करें। इस लेख में 'अम्बे तू है जगदम्बे काली...' आरती लिरिक्स दी जा रही है, यहां से आप रोजाना मां अंबे की आरती कर सकते हैं- 

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अंबे जी की आरती 

अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली,
तेरे ही गुण गावें भारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती।
तेरे भक्त जनो पर माता भीर पड़ी है भारी।
दानव दल पर टूट पड़ो मां करके सिंह सवारी॥
सौ-सौ सिहों से बलशाली, है अष्ट भुजाओं वाली,
दुष्टों को तू ही ललकारती।
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥

माँ-बेटे का है इस जग में बड़ा ही निर्मल नाता।
पूत-कपूत सुने है पर ना माता सुनी कुमाता॥
सब पे करूणा दर्शाने वाली, अमृत बरसाने वाली,
दुखियों के दुखड़े निवारती।
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥

नहीं मांगते धन और दौलत, न चांदी न सोना।
हम तो मांगें तेरे चरणों में छोटा सा कोना॥
सबकी बिगड़ी बनाने वाली, लाज बचाने वाली,
सतियों के सत को संवारती।
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥

चरण शरण में खड़े तुम्हारी, ले पूजा की थाली।
वरद हस्त सर पर रख दो माँ संकट हरने वाली॥
माँ भर दो भक्ति रस प्याली, अष्ट भुजाओं वाली,
भक्तों के कारज तू ही सारती।
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥

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