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Budhwa Mangal 2024: कब है बुढ़वा मंगल? जानें तिथि, महत्व और पौराणिक कथा

Fri, 17 May 2024 06:46 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता सिंह Updated Fri, 17 May 2024 06:46 AM IST
सार

ज्येष्ठ माह के मंगल को बजरंगबली की पूजा अर्चना करने से सभी प्रकार के दुख कष्ट दूर होते हैं, और घर में सुख समृद्धि का वास होता है। व्यक्ति पर विशेष कृपा होती है। आइए जानते हैं किस किस तिथि को पड़ेंगे ज्येष्ठ माह के बुढ़वा मंगल।

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Budhwa Mangal Date Time importance and Pauranik Katha
बड़ा मंगल 2024 - फोटो : amar ujala

विस्तार

Bada Mangal 2024 Kab Hai: 24 मई 2024, शुक्रवार से ज्येष्ठ माह आरंभ हो रहा है। हिंदू धर्म में ज्येष्ठ मास का विशेष महत्व है। इस महीने में हनुमान जी की पूजा का विशेष महत्व है। इस महीने के प्रत्येक मंगल को बुढ़वा मंगल या बड़ा मंगल कहा जाता है। ज्येष्ठ माह के मंगल को बजरंगबली की पूजा अर्चना करने से सभी प्रकार के दुख कष्ट दूर होते हैं, और घर में सुख समृद्धि का वास होता है। व्यक्ति पर विशेष कृपा होती है। आइए जानते हैं किस किस तिथि को पड़ेंगे ज्येष्ठ माह के बुढ़वा मंगल। जानिए पूजा विधि, तिथि और महत्व। 

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ज्येष्ठ माह कब से आरंभ? 
प्रतिपदा तिथि आरंभ: 23 मई, गुरुवार, सायं 07:23  बजे से 
प्रतिपदा तिथि समाप्त: 24 मई, शुक्रवार सायं 07: 25 तक 
ऐसे में उदया तिथि के अनुसार ज्येष्ठ माह 24 मई से आरंभ हो रहा है। 

कब कब पड़ेंगे बुढ़वा मंगल 
ज्येष्ठ माह में पहला बुढ़वा मंगल 28 मई, दूसरा मंगल 4 जून , तीसरा मंगल 11 जून और चौथा बड़ा मंगल 18 जून को पड़ेगा। 

यह है बड़े मंगल का महत्व
ज्येष्ठ माह में पड़ने वाले मंगल का विशेष महत्व है। इस दिन  हनुमान चालीसा, बजरंगबाण का पाठ करने और सुंदरकांड को पढ़ने से भक्तों को हनुमानजी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यदि आपकी कोई मनोकामना अधूरी है तो बुढ़वा मंगल के दिन हनुमानजी के मंदिर में चोला चढ़ाने से आपकी सारी अधूरी इच्छाएं पूर्ण होंगी और आपको पुण्य की प्राप्ति होगी।
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क्यों होती है बूढ़े हनुमान जी की आराधना?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार बुढ़वा मंगल महाभारत काल और रामायण काल से जुड़ा हुआ माना जाता है। महाभारत काल की कथा के अनुसार भीम को अपनी शक्तियों का काफी घमंड हो गया था। भीम का घमंड चूर-चूर करने के लिए हनुमानजी ने मंगलवार को बूढ़े बंदर का रूप धारण किया और भीम को हरा दिया। तभी से इस दिन को बूढ़ा मंगल के नाम से मनाया जाने लगा।
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वहीं रामायण काल में एक बार सीता मां को खोजते हुए जब हनुमानजी लंका पहुंचे तो रावण ने बंदर कहकर उनका अपमान किया। रावण के घमंड को चकनाचूर करने के लिए भी हनुमानजी ने वृद्ध वानर का रूप धारण किया था। बजरंगबली ने विराट रूप धारण किया था और अपनी पूंछ से लंका को जलाकर लंकापति रावण का घमंड चकनाचूर किया था।

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