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Bhai Dooj 2023: अगर भाई हैं दूर तो न हों परेशान, ऐसे करें तिलक और पूजा, रिश्तों में आएगी मिठास
Wed, 15 Nov 2023 07:14 AM IST
मेघा कुमारी
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: मेघा कुमारी
Updated Wed, 15 Nov 2023 07:14 AM IST
सार
कार्तिक मास में हिंदू धर्म के बहुत त्योहार पड़ते हैं। जिसमें करवाचौथ, धनतेरस, दिवाली, गोवर्धन, भाई दूज से लेकर छठ पूजा आदि शामिल है।
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Bhai Dooj 2023
- फोटो : Amarujala
विस्तार
Bhai Dooj 2023 Puja Vidhi: कार्तिक मास में हिंदू धर्म के बहुत त्योहार पड़ते हैं। जिसमें करवाचौथ, धनतेरस, दिवाली, गोवर्धन, भाई दूज से लेकर छठ पूजा आदि शामिल है। इन सभी त्योहारों की तैयारियां महिने भर पहले ही शुरू कर दी जाती है। इस दौरान मनाई जाने वाली भाई दूज का भी विशेष महत्व है। ये त्योहार भाई और बहन के प्यार और रक्षा का प्रतीक होता है। ये रक्षाबंधन की तरह खास होता है। इस दिन बहनें रोली और अक्षत से भाई का टीका करती हैं। साथ ही उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दिन यदि विधि-विधान से पूजा की जाए, तो भाई-बहनों के ऊपर से अकाल मृत्यु का संकट टल जाता है।
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भाई दूज के दिन बहनें भाई के लिए उनका मनपसंद भोजन भी तैयार करती हैं। वहीं भाई भी शगुन के रूप में बहन को उपहार भेंट देते हैं। लेकिन, अगर आपके भाई आपसे दूर हैं, तो निराश होने की आवश्यकता नहीं है। आप दूर से भी भाई दूज के नियमों का पालन करते हुए पूजा का पूर्ण फल पा सकती हैं। आइए जानते हैं कि, कैसे भाई से दूर रहने के बाद बहनें भाई दूज की पूजा कर सकती हैं।
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Bhai Dooj 2023
- फोटो : iStock
भाई दूर है तो ऐसे करें भाई दूज की पूजा
- भाई दूज के दिन सूर्योदय से पहले स्नान कर लें। साथ ही मंदिर के सभी समानों को भी अच्छें से साफ कर लें।
- आपके जितने भी भाई आपसे दूर हैं उतनी संख्या में गोले लेकर आएं। फिर चौकी पर पीले रंग के वस्त्र को चढ़ाकर वहां पर उन गोलों को स्थापित कर दें।
- फूल के उपर चावल रखकर उस पर गोले को रख दें। बाद में गोले को गंगाजल से स्नान कराकर रोली व चावल से तिलक करें। पूजा के बाद मिठाई का भोग लगाएं। बाद में उन नारियल के गोलों की आरती उतारें।
- आरती के बाद उन्हें पीले रंग के कपड़े से ढक कर शाम तक छोड़ दें। पूजा के बाद अपने भाई की लंबी आयु और कष्टों से मुक्ति के लिए यमराज से प्रार्थना करें।
- अगले दिन नारियल के उन गोलों को पूजा स्थल से उठाकर अपने पास सुरक्षित रख लें। अगर संभव हो तो गोलों को भाई के पास भेज दें।