कालाष्टमी के दिन भगवान शिव का विग्रह रूप माने जाने वाले कालभैरव की पूजा का विशेष महत्व है। उन्हें शिव का पांचवा अवतार माना गया है। इनके दो रूप है पहला बटुक भैरव जो भक्तों को अभय देने वाले सौम्य रूप में प्रसिद्ध है तो वहीं काल भैरव अपराधिक प्रवृतियों पर नियंत्रण करने वाले भयंकर दंडनायक है। भगवान भैरव के भक्तों का अनिष्ट करने वालों को तीनों लोकों में कोई शरण नहीं दे सकता। काल भी इनसे भयभीत रहता है इसलिए इन्हें काल भैरव एवं हाथ में त्रिशूल, तलवार और डंडा होने के कारण इन्हें दंडपाणि भी कहा जाता है। भगवान भैरव की शक्ति का नाम 'भैरवी गिरिजा' है, जो अपने भैरव भक्तों की अभीष्ट दायिनी हैं।
कालभैरव अष्टमी के मौके पर भगवान भैरव को प्रसन्न करने वाले चमत्कारिक उपायों को जानने के लिए आगे की स्लाइड क्लिक करें —
तंत्र-मंत्र के साधकों के अनुसार भगवान भैरव को परम शक्तिशाली रुद्र बताया गया है। कालभैरव अष्टमी के दिन उनकी पूजा करने से सभी प्रकार के टोने-टोटके से मुक्ति मिल जाती है। कालाष्टमी के दिन भगवान भैरव को प्रसन्न करने के लिए उड़द की दाल या इससे निर्मित मिष्ठान, दूध-मेवा आदि का भोग लगाएं।
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यदि आप बाबा काल भैरव की कृपा चाहते है तो कालाष्टमी के दिन बाबा कालभैरव के मंदिर में जाकर उनकी प्रतिमा पर सिंदूर और तेल चढ़ाए और मूर्ति के सामने बैठकर काल भैरव मंत्र का जाप करें।
यदि आपके घर के पास कोई काल भैरव का मंदिर नहीं है तो आप कालाष्टमी के दिन भगवान शिव की पूजा कर उनका आशीर्वाद पा सकत हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि भगवान भैरव की उत्पत्ति भगवान शिव के अंश के रूप में हुई थी। कालाष्टमी के दिन 21 बिल्वपत्रों पर चंदन से 'ॐ नम: शिवाय' लिखकर शिवलिंग पर चढ़ाएं। इस विधि से पूजन करने पर भगवान भैरव प्रसन्न होंगे और आपकी मनोकामनाएं पूरी होंगी।
शत्रु या कार्य में आ रही किसी बाधा को दूर करने के लिए कालाष्टमी के दिन भगवान भैरव को सवा सौ ग्राम काला तिल, सवा सौ ग्राम काली उड़द और सवा ग्यारह रुपये एक काले कपड़े में बांधकर भगवान भैरव को चढ़ाएं। इस उपाय को करने से शत्रुओं पर विजय और जीवन में छाया काला अंधकार दूर होता है।