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बसंत पंचमी का त्योहार क्यों मनाया जाता है? जानिए कैसे हुई इसे मनाने की शुरुआत

Tue, 30 Jan 2024 07:42 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता सिंह Updated Tue, 30 Jan 2024 07:42 AM IST
सार

बसंत पंचमी को श्रीपंचमी, ज्ञान पंचमी भी कहा जाता है। यह त्योहार माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को पड़ता है। इस साल बसंत पंचमी 14 फरवरी 2024 को मनाया जाएगा। आइए जानते हैं क्यों मानई जाती है बसंत पंचमी और कब इस पर्व को मनाने की हुई शुरुआत। 

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Basant Panchami Date why people celebrated vasant panchami in hindi
बसंत पंचमी 2024 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Why Basant Panchami Is Celebrated: बसंत पंचमी एक हिंदू त्योहार है, जो आमतौर पर फरवरी में वसंत ऋतु के दौरान मनाया जाता है। इस शुभ दिन पर देवी सरस्वती की पूजा की जाती है, जो ज्ञान, संगीत और शिक्षा की देवी हैं। बसंत पंचमी को श्रीपंचमी, ज्ञान पंचमी भी कहा जाता है। यह त्योहार माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को पड़ता है। हिंदू परंपराओं के अनुसार पूरे वर्ष को छह ऋतुओं में बांटा गया है, जिसमें बसंत ऋतु, ग्रीष्म ऋतु, वर्षा ऋतु, शरद ऋतु, हेमंत ऋतु और शिशिर ऋतु शामिल हैं। इन ऋतुओं में से बसंत ऋतु को सभी ऋतुओं का राजा कहा जाता है और इसी कारण जिस दिन से बसंत ऋतु की शुरुआत होती है, उस दिन को बसंत पंचमी के पर्व के रूप में मनाया जाता है। इस साल बसंत पंचमी 14 फरवरी 2024 को मनाया जाएगा। आइए जानते हैं क्यों मानई जाती है बसंत पंचमी और कब इस पर्व को मनाने की हुई शुरुआत। 

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बसंत पंचमी 2024
क्यों मनाई जाती है बसंत पंचमी?
बसंत पंचमी (जिसे वसंत पंचमी भी कहा जाता है) जीवन में नई चीजें शुरू करने का एक शुभ दिन है। बहुत से लोग इस दिन "गृहप्रवेश" के दिन नए घर में  प्रवेश करते हैं, कोई नया व्यवसाय शुरू करते हैं या महत्वपूर्ण परियोजनाएं शुरू करते हैं। इस त्योहार को अक्सर समृद्धि और सौभाग्य से जोड़ा जाता है। बसंत पंचमी के साथ, यह माना जाता है कि वसंत ऋतु की शुरुआत होती है, जो फसलों और कटाई के लिए एक अच्छा समय है। कड़ाके की ठंड के बाद, इस त्योहार को वसंत का पहला दिन, फसल काटने का समय माना जाता है। चूंकि भारत मुख्य रूप से एक कृषि प्रधान देश है, इसलिए यह समझ में आता है कि यह त्योहार भारतीयों के दिलों में काफी महत्वपूर्ण स्थान रखता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन माता सरस्वती प्रकट हुई थीं इसलिए इस दिन बसंत पंचमी के दिन सरस्वती माता की विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है। मां सरस्वती को विद्या एवं बुद्धि की देवी माना जाता है। बसंत पंचमी के दिन माता सरस्वती से विद्या, बुद्धि, कला एवं ज्ञान का वरदान माना जाता है इसलिए लोगों को इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनने चाहिए और पीले फूलों से देवी सरस्वती की पूजा करनी चाहिए। 
 
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बसंत पंचमी 2024 - फोटो : अमर उजाला

कैसे हुई बसंत पंचमी को मनाने की शुरुआत?
हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, ऐसा माना जाता है कि भगवान ब्रह्मा ने इसी दिन ब्रह्मांड का निर्माण किया था। सृष्टि की रचना करके जब उन्होंने संसार में देखा तो उन्हें चारों ओर सुनसान निर्जन ही दिखाई दिया। वातावरण बिल्कुल शांत लगा जैसे किसी की वाणी ही न हो।  यह सब देखने के बाद ब्रह्मा जी संतुष्ट नहीं थे तब ब्रह्मा जी ने भगवान विष्णु जी से अनुमति लेकर अपने कमंडल से पृथ्वी पर जल छिड़का। जल छिड़कने के बाद एक देवी प्रकट हुई। देवी के हाथ में वीणा थी। भगवान ब्रह्मा ने उनसे कुछ बजाने का अनुरोध किया ताकि पृथ्वी पर सब कुछ शांत न हो। परिणामस्वरूप, देवी ने कुछ संगीत बजाना शुरू कर दिया। तभी से उस देवी को वाणी और ज्ञान की देवी देवी सरस्वती के नाम से जाना जाने लगा। उन्हें वीणा वादिनी के नाम से भी जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि देवी सरस्वती ने वाणी, बुद्धि, बल और तेज प्रदान किया।

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