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Akshaya Tritiya 2024: अक्षय तृतीया पर मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए क्या करें क्या न करें

Wed, 08 May 2024 11:44 AM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Wed, 08 May 2024 11:44 AM IST
सार

अक्षय तृतीया का पावन पर्व वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। लोकभाषा में इसे आखातीज या वैशाख तीज भी कहा जाता है। यह पर्व इस बार 10 मई, शुक्रवार को है। त्रेता और सतयुग का आरम्भ भी इसी तिथि को हुआ था, इसलिए इसे कृतयुगादि तृतीया भी कहते हैं।

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Akshaya Tritiya 2024 Do’s and Don'ts To Follow Akshaya tritiya Par Kya Kare Or Kya Na Kare
Akshaya Tritiya 2024: शास्त्रों में अक्षय तृतीया तिथि को स्वयं सिद्ध अबूझ मुहूर्त माना गया है। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अक्षय तृतीया का पावन पर्व वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। लोकभाषा में इसे आखातीज या वैशाख तीज भी कहा जाता है। यह पर्व इस बार 10 मई, शुक्रवार को है। त्रेता और सतयुग का आरम्भ भी इसी तिथि को हुआ था, इसलिए इसे कृतयुगादि तृतीया भी कहते हैं। भविष्य पुराण के अनुसार इस दिन स्नान,दान,जप,होम,स्वाध्याय, तर्पण आदि जो भी कर्म किए जाते हैं,वे सब अक्षय हो जाते हैं। यह तिथि सम्पूर्ण पापों का नाश करने वाली और सभी सुखों को प्रदान करने वाली मानी गई है। आइए जानते हैं कि अक्षय तृतीया पर कौन से कार्य करने से जीवन में खुशहाली आती है।
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शुभ कार्य आरंभ
बिना पंचांग देखे भी इस दिन कोई भी शुभ मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश, घर, भूखंड या वाहन आदि की खरीदारी से सम्बंधित कार्य किए जा सकते हैं। व्यापार आरम्भ, गृह प्रवेश, वैवाहिक कार्य, सकाम अनुष्ठान, दान-पुण्य, पूजा-पाठ अक्षय रहता है अर्थात वह कभी नष्ट नहीं होता।
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सोना खरीदना है शुभ
धर्मग्रंथों के अनुसार स्वर्ण में देवी लक्ष्मी का वास माना गया है, इसलिए इस दिन सोने-चांदी के आभूषण खरीदना काफी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे पूरे साल घर में सुख और समृद्धि आती है।
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शिव-पार्वती की पूजा
इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करने से इनकी कृपा बरसती है। समृद्धि और जीवन धन-धान्य से भरपूर होता है और इनकी पूजा से मनुष्य को संतान सुख मिलता है।

वृक्ष लगाएं
इस दिन पीपल, आम, पाकड़, गूलर, बरगद, आंवला, बेल, जामुन व अन्य फलदार वृक्ष लगाने से प्राणी को सभी प्रकार के सुख प्राप्त होते हैं। जिस प्रकार अक्षय तृतीया को लगाए गए वृक्ष हरे-भरे होकर पल्लवित-पुष्पित होते हैं उसी प्रकार इस दिन वृक्षारोपण करने वाला व्यक्ति भी प्रगति पथ की ओर अग्रसर होता है।

सत्तू और नीम की कोपल
इस दिन भगवान श्रीकृष्ण को नैवेद्ध में गेहूं, जौ, चने का सत्तू, मिश्री, नीम की कोपल, ककड़ी और चने की भीगी दाल अर्पित की जाती है। मान्यता है कि इस दिन सत्तू अवश्य खाना चाहिए।

दान करें
अक्षय तृतीया के दिन जल से भरे घड़े, कुल्हड़, सकोरे, पंखे, पादुका, चटाई, छाता, चावल, नमक, घी, ख़रबूज़ा, ककड़ी, मिश्री, सत्तू आदि गर्मी में लाभकारी वस्तुओं का दान महापुण्यकारी माना गया है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन दान देने वाला प्राणी सूर्यलोक को जाता है। जो इस तिथि को उपवास करता है वह सुख-शांति, ऐश्वर्य और श्री से संपन्न हो जाता है।


ये न करें
अक्षय तृतीया वर्ष के श्रेष्ठतम मुहूर्तों में से एक है। इस दिन किया गया कोई भी शुभ-अशुभ कार्य निष्फल नहीं होता। इसलिए इस दिन कोई भी अप्रिय कार्य नहीं करना चाहिए यदि आप ऐसा करते हैं तो वह उसी रूप में उम्र भर आपका पीछा करता रहेगा।  यदि इस दिन महिलाएं उपवास करती हैं तो मान्यता के अनुसार उन्हें यह व्रत करते हुए नमक का पूरी तरह से त्याग करना चाहिए।

 
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