{"_id":"132-56424","slug":"Shimla-56424-132","type":"story","status":"publish","title_hn":"एचपीयू ने जारी किया एससीए मनोनयन का संविधान ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एचपीयू ने जारी किया एससीए मनोनयन का संविधान
Shimla
Updated Thu, 11 Sep 2014 05:32 AM IST
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शिमला। विवि कार्यकारी परिषद के आदेशों पर बनाई उच्च स्तरीय कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर तैयार मनोनयन से विवि और कॉलेजों की एससीए गठित करने को बनाए संविधान को घोषित कर दिया है। एससीए और सीएससीए के मुख्य चार पदों पर मेरिट में अव्वल छात्रों का मनोनयन होगा। विश्वविद्यालय में पीजी कक्षाओं की मेरिट में टॉप करने वाले छात्रों के अलावा खेल और अन्य गतिविधियों में अव्वल छात्रों के लिए भी निर्धारित पद रहेंगे। विवि और कॉलेजों के लिए बनाए गए संविधान में बदलाव करने के साथ ही मनोनयन प्रक्रिया को पूरी करने को विवि में अधिष्ठाता अध्ययन और कॉलेज में प्राचार्य की अध्यक्षता में एडवाइजरी कमेटी गठित होगी। विश्वविद्यालय में अधिष्ठाता छात्र कल्याण और कॉलेजों में प्राचार्य केंद्रीय छात्र संघ के मुख्य सलाहकार होंगे।
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विश्वविद्यालय एससीए का प्रारूप
विश्वविद्यालय की एससीए में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद पर तीसरे और पांचवें सत्र से मेरिट आधार पर अलग-अलग विभाग से प्रतिनिधि चुने जाएंगे। सचिव और महासचिव पद के लिए पहले सत्र से पिछली कक्षा की मेरिट के आधार पर अलग-अलग विभागों के छात्र मनोनीत किए जाएंगे। इसमें डीएसडब्लू की अनुशंसा पर सांस्कृतिक कोटे से दो प्रतिनिधि, खेल से निदेशक शारीरिक शिक्षा अनुशंसा पर दो छात्र प्रतिनिधि मनोनीत होंगे। इसके अलावा अकादमिक मेरिट के आधार प्रथम सत्र से एक, तीसरे और पांचवें सत्र से एक-एक, पिछले सत्र का परिणाम घोषित न होने की स्थिति में उससे पिछले सत्र की मेरिट आधार होगी। एलएलएम और एमफिल से रेगुलर छात्रों में से मेरिट आधार पर एक एक प्रतिनिधि, पंजीकरण की तिथि के हिसाब से वरिष्ठतम पीएचडी छात्र को भी एससीए को मनोनीत किया जाएगा।
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डीएसडब्ल्यू होंगे एससीए के मुख्य सलाहकार
विश्वविद्यालय की एससीए में चार पदाधिकारियों, मनोनीत छात्र प्रतिनिधियों के अलावा डीएसडब्ल्यू मुख्य सलाहकार, चीफ वार्डन शारीरिक शिक्षा विभाग निदेशक और पांच कुलपति की ओर से मनोनीत शिक्षक सदस्य होंगे। मनोनीत एससीए का कार्यकाल तीस जून 2015 तक चलेगा। इसके अलावा एचपीयू का एससीए संविधान की सभी शर्तें लागू रहेंगी। मनोनयन की प्रक्रिया के को संचालित को पूरा करने को डीएस की अध्यक्षता में डीएसडब्ल्यू तीन वरिष्ठ शिक्षकों की कमेटी हल करेगी।
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कॉलेज एससीए का यह होगा प्रारूप
कॉलेजों में एससीए में मुख्य चार पदों पर मनोनीत किए छात्रों में से मेरिट में टॉप छात्र को अध्यक्ष, उससे कम मेरिट के दूसरे विभाग और कक्षा के छात्र को उपाध्यक्ष, इससे कम वाले को सचिव और उसके बाद सह सचिव मनोनीत किया जाएगा। संविधान में रोवर एंड रेंजर में से मेरिट आधार पर एक-एक छात्र और छात्रा, एनएसएस से दो, एनसीसी से एक छात्र और छात्रा, सांस्कृतिक गतिविधियों में अव्वल दो, खेल में दो, क्लब और सोसाइटी में दो अव्वल रहने वाले छात्र मनोनीत होंगे। कला, वाणिज्य, विज्ञान संकाय में से तीन-तीन मेरिट वाले छात्रों का मनोनयन होगा। इनमें प्रथम सेमेस्टर से जमा दो के परिणाम के आधार पर एक, तीसरे सत्र और द्वितीय वर्ष से एक, तृतीय वर्ष से पिछली मेरिट के आधार पर एक एक सदस्य मनोनीत किया जाएगा। बीबीए और बीसीए से प्रथम ईयर/ सत्र से एक, द्वितीय वर्ष और तीसरे सत्र से एक, फाइनल ईयर से एक छात्र का पिछली मेरिट के आधार पर मनोनयन होगा। कॉलेज की गठित की जाने वाली एससीए का कार्यकाल 31 मार्च तक होगा। मनोनयन प्रक्रिया को पूरा करने के लिए प्राचार्य की अध्यक्षता में तीन वरिष्ठ शिक्षकों और एक सदस्य सचिव की कमेटी गठित की जाएगी।
कहीं भारी न पड़ जाए चूक
विश्वविद्यालय ने इस मनोनयन की प्रक्रिया में किसी मेरिट वाले छात्र के मनोनीत करने पर एससीए का पद लेने से इनकार करने की स्थिति में क्या विकल्प रहेगा, इस पर कोई विचार नहीं किया है। ऐसे में छात्र संगठनों का दबाव पड़ने पर एससीए के नई प्रक्रिया के गठन में अड़चन पैदा हो सकती है। कुलपति प्रो. बाजपेयी ने भी माना कि इस पर अभी कुछ सोचा ही नहीं है।
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विश्वविद्यालय एससीए का प्रारूप
विश्वविद्यालय की एससीए में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद पर तीसरे और पांचवें सत्र से मेरिट आधार पर अलग-अलग विभाग से प्रतिनिधि चुने जाएंगे। सचिव और महासचिव पद के लिए पहले सत्र से पिछली कक्षा की मेरिट के आधार पर अलग-अलग विभागों के छात्र मनोनीत किए जाएंगे। इसमें डीएसडब्लू की अनुशंसा पर सांस्कृतिक कोटे से दो प्रतिनिधि, खेल से निदेशक शारीरिक शिक्षा अनुशंसा पर दो छात्र प्रतिनिधि मनोनीत होंगे। इसके अलावा अकादमिक मेरिट के आधार प्रथम सत्र से एक, तीसरे और पांचवें सत्र से एक-एक, पिछले सत्र का परिणाम घोषित न होने की स्थिति में उससे पिछले सत्र की मेरिट आधार होगी। एलएलएम और एमफिल से रेगुलर छात्रों में से मेरिट आधार पर एक एक प्रतिनिधि, पंजीकरण की तिथि के हिसाब से वरिष्ठतम पीएचडी छात्र को भी एससीए को मनोनीत किया जाएगा।
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डीएसडब्ल्यू होंगे एससीए के मुख्य सलाहकार
विश्वविद्यालय की एससीए में चार पदाधिकारियों, मनोनीत छात्र प्रतिनिधियों के अलावा डीएसडब्ल्यू मुख्य सलाहकार, चीफ वार्डन शारीरिक शिक्षा विभाग निदेशक और पांच कुलपति की ओर से मनोनीत शिक्षक सदस्य होंगे। मनोनीत एससीए का कार्यकाल तीस जून 2015 तक चलेगा। इसके अलावा एचपीयू का एससीए संविधान की सभी शर्तें लागू रहेंगी। मनोनयन की प्रक्रिया के को संचालित को पूरा करने को डीएस की अध्यक्षता में डीएसडब्ल्यू तीन वरिष्ठ शिक्षकों की कमेटी हल करेगी।
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कॉलेज एससीए का यह होगा प्रारूप
कॉलेजों में एससीए में मुख्य चार पदों पर मनोनीत किए छात्रों में से मेरिट में टॉप छात्र को अध्यक्ष, उससे कम मेरिट के दूसरे विभाग और कक्षा के छात्र को उपाध्यक्ष, इससे कम वाले को सचिव और उसके बाद सह सचिव मनोनीत किया जाएगा। संविधान में रोवर एंड रेंजर में से मेरिट आधार पर एक-एक छात्र और छात्रा, एनएसएस से दो, एनसीसी से एक छात्र और छात्रा, सांस्कृतिक गतिविधियों में अव्वल दो, खेल में दो, क्लब और सोसाइटी में दो अव्वल रहने वाले छात्र मनोनीत होंगे। कला, वाणिज्य, विज्ञान संकाय में से तीन-तीन मेरिट वाले छात्रों का मनोनयन होगा। इनमें प्रथम सेमेस्टर से जमा दो के परिणाम के आधार पर एक, तीसरे सत्र और द्वितीय वर्ष से एक, तृतीय वर्ष से पिछली मेरिट के आधार पर एक एक सदस्य मनोनीत किया जाएगा। बीबीए और बीसीए से प्रथम ईयर/ सत्र से एक, द्वितीय वर्ष और तीसरे सत्र से एक, फाइनल ईयर से एक छात्र का पिछली मेरिट के आधार पर मनोनयन होगा। कॉलेज की गठित की जाने वाली एससीए का कार्यकाल 31 मार्च तक होगा। मनोनयन प्रक्रिया को पूरा करने के लिए प्राचार्य की अध्यक्षता में तीन वरिष्ठ शिक्षकों और एक सदस्य सचिव की कमेटी गठित की जाएगी।
कहीं भारी न पड़ जाए चूक
विश्वविद्यालय ने इस मनोनयन की प्रक्रिया में किसी मेरिट वाले छात्र के मनोनीत करने पर एससीए का पद लेने से इनकार करने की स्थिति में क्या विकल्प रहेगा, इस पर कोई विचार नहीं किया है। ऐसे में छात्र संगठनों का दबाव पड़ने पर एससीए के नई प्रक्रिया के गठन में अड़चन पैदा हो सकती है। कुलपति प्रो. बाजपेयी ने भी माना कि इस पर अभी कुछ सोचा ही नहीं है।