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बच्चों को समझ नहीं आ रहा शिक्षकों का पढ़ाया
Shimla
Updated Wed, 27 Aug 2014 05:30 AM IST
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शिमला। सर्वशिक्षा अभियान में सतत समग्र शिक्षा प्रणाली के तहत बेशक स्कूली बच्चों को पढ़ाने के लिए कई टूल बनाए गए हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि शिक्षक जो पढ़ा रहे हैं वह बच्चों को समझ नहीं आ रहा है।
सर्वशिक्षा अभियान के रैंडम सर्वे में ये चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। सर्वे की टीम ने पहली से आठवीं के बच्चों से एक, दो और तीन दिन पहले पढ़ाए गए चैप्टर में से ही सवाल किए थे। इस दौरान बच्चों से पढ़ाई के बारे में भी पूछा गया तो कई बच्चों ने कहा कि उन्हें जो पढ़ाया जाता है वह उन्हें समझ ही नहीं आता है। इसके अलावा बच्चों ने शिक्षकों के पढ़ाने पर भी सवाल किए हैं। एसएसए के सर्वे के अनुसार इससे पहले पढ़ाए गए चैप्टरों के बारे में पूछा जाता तो सर्वे का रिजल्ट और भी निराशा जनक हो सकता था। मतलब जैसे-जैसे बच्चा अगली क्लास में जा रहा है शिक्षा का स्तर बढ़ने की बजाए घट रहा है।
बाक्स
क्या है सतत समग्र मूल्यांकन शिक्षा प्रणाली
इस प्रणाली के तहत बच्चों की ग्रेडिंग होगी। इसके तहत पहली से आठवीं तक के किसी भी बच्चे को फेल नहीं किया जा सकता। अगली कक्षा में जाने वाले विद्यार्थियों को ए से लेकर ई तक 10 तरह के ग्रेड दिए जाते हैं। हर माह मूल्यांकन होता है और इसके नंबर ग्रेड में जुड़ते हैं, जिन स्कूलों में शिक्षकों के पद खाली हैं, वहां पर यह मूल्यांकन कैसे होता है यह स्पष्ट नहीं है।
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इनसेट:
विदेशों में फेल हो चुकी है प्रणाली
विकसित देश सतत समग्र शिक्षा प्रणाली को नकार चुके हैं। विदेशों में यह प्रणाली फेल हो चुकी है। वर्ष 2008 में जब प्रदेश में इसे शुरू किया गया तो इसी आधार पर शिक्षकों की ओर से इसका विरोध किया गया। बावजूद इसके इस प्रणाली को प्रदेश में लागू किया गया। नतीजा यह है कि रैंडम सर्वे में 80 प्रतिशत बच्चों के ई और ई प्लस ग्रेड आए हैं।
कोट
जब से प्रदेश में सतत समग्र प्रणाली शुरू की है तब से शिक्षा का स्तर गिरा है। जब 9वीं तक कोई बच्चा फेल ही नहीं होगा और उस पर किसी तरह का चैक ही नहीं होगा तो रिजल्ट ऐसे ही आएंगे। पांच साल बाद प्रदेश में शिक्षा के भयानक परिणाम आने शुरू हो जाएंगं। हमने शुरू में ही इस प्रणाली का विरोध किया था। जब तक पांचवीं और आठवीं बोर्ड नहीं हो जाता और शिक्षकों से गैर शैक्षणिक कार्य करवाना बंद नहीं होता तब तक किसी भी तरह शिक्षा में सुधार नहीं आ सकता है। अधिकारियों को आफिसों से कुर्सी का मोह छोड़ना होगा, साल भर शिक्षकों की ट्रांसफर का जो दौर चलता है वह रोकना होगा और निरीक्षण व्यवस्था को मजबूत बनाना होगा।
- पीआर सांख्यान. अध्यक्ष, हिमाचल शिक्षा सुधार एवं विकास मंच एवं पूर्व प्रदेश अध्यक्ष हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ।
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सर्वशिक्षा अभियान के रैंडम सर्वे में ये चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। सर्वे की टीम ने पहली से आठवीं के बच्चों से एक, दो और तीन दिन पहले पढ़ाए गए चैप्टर में से ही सवाल किए थे। इस दौरान बच्चों से पढ़ाई के बारे में भी पूछा गया तो कई बच्चों ने कहा कि उन्हें जो पढ़ाया जाता है वह उन्हें समझ ही नहीं आता है। इसके अलावा बच्चों ने शिक्षकों के पढ़ाने पर भी सवाल किए हैं। एसएसए के सर्वे के अनुसार इससे पहले पढ़ाए गए चैप्टरों के बारे में पूछा जाता तो सर्वे का रिजल्ट और भी निराशा जनक हो सकता था। मतलब जैसे-जैसे बच्चा अगली क्लास में जा रहा है शिक्षा का स्तर बढ़ने की बजाए घट रहा है।
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क्या है सतत समग्र मूल्यांकन शिक्षा प्रणाली
इस प्रणाली के तहत बच्चों की ग्रेडिंग होगी। इसके तहत पहली से आठवीं तक के किसी भी बच्चे को फेल नहीं किया जा सकता। अगली कक्षा में जाने वाले विद्यार्थियों को ए से लेकर ई तक 10 तरह के ग्रेड दिए जाते हैं। हर माह मूल्यांकन होता है और इसके नंबर ग्रेड में जुड़ते हैं, जिन स्कूलों में शिक्षकों के पद खाली हैं, वहां पर यह मूल्यांकन कैसे होता है यह स्पष्ट नहीं है।
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विदेशों में फेल हो चुकी है प्रणाली
विकसित देश सतत समग्र शिक्षा प्रणाली को नकार चुके हैं। विदेशों में यह प्रणाली फेल हो चुकी है। वर्ष 2008 में जब प्रदेश में इसे शुरू किया गया तो इसी आधार पर शिक्षकों की ओर से इसका विरोध किया गया। बावजूद इसके इस प्रणाली को प्रदेश में लागू किया गया। नतीजा यह है कि रैंडम सर्वे में 80 प्रतिशत बच्चों के ई और ई प्लस ग्रेड आए हैं।
कोट
जब से प्रदेश में सतत समग्र प्रणाली शुरू की है तब से शिक्षा का स्तर गिरा है। जब 9वीं तक कोई बच्चा फेल ही नहीं होगा और उस पर किसी तरह का चैक ही नहीं होगा तो रिजल्ट ऐसे ही आएंगे। पांच साल बाद प्रदेश में शिक्षा के भयानक परिणाम आने शुरू हो जाएंगं। हमने शुरू में ही इस प्रणाली का विरोध किया था। जब तक पांचवीं और आठवीं बोर्ड नहीं हो जाता और शिक्षकों से गैर शैक्षणिक कार्य करवाना बंद नहीं होता तब तक किसी भी तरह शिक्षा में सुधार नहीं आ सकता है। अधिकारियों को आफिसों से कुर्सी का मोह छोड़ना होगा, साल भर शिक्षकों की ट्रांसफर का जो दौर चलता है वह रोकना होगा और निरीक्षण व्यवस्था को मजबूत बनाना होगा।
- पीआर सांख्यान. अध्यक्ष, हिमाचल शिक्षा सुधार एवं विकास मंच एवं पूर्व प्रदेश अध्यक्ष हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ।