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महिलाओं का सम्मान सरकार का मकसद : सीएम
Shimla
Updated Thu, 24 Jul 2014 05:30 AM IST
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शिमला। महिलाएं समाज की महत्वपूर्ण स्तंभ हैं और उन्हें आदर और सम्मान प्राप्त करने का अधिकार है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने यह बात बुधवार को राष्ट्रीय और राज्य महिला आयोग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित एक दिवसीय सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए कही। कहा कि प्रदेश सरकार ने महिलाओं को पुरुष वर्ग के बराबर दर्जा देने के लिए विभिन्न कदम उठाए हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक परिवेश में सम्मानजनक स्थान देने के मकसद से कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रदेश सरकार ने पंचायती राज संस्थानों तथा शहरी स्थानीय निकाय में इन्हें 50 प्रतिशत के आरक्षण की सुविधा प्रदान की है। इनकी समस्याओं और संबंधित मुद्दों पर विचार के लिए अगस्त 2013 में महिला कल्याण बोर्ड का गठन किया है। मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के अंतर्गत दी जाने वाली सहायता राशि को 21 हजार से बढ़ाकर 25 हजार किया गया है। महिलाओं को लघु उद्योग के लिए दिए जाने वाले ऋण 35 हजार की धनराशि पर 4 प्रतिशत की दर से ब्याज वसूला जाएगा और इससे अधिक ऋण राशि 6 प्रतिशत की ब्याज दर पर दी जाएगी। 66,054 महिलाओं को विभिन्न श्रेणियों में मासिक पेंशन दी जा रही है, हिंसा पीडि़त महिलाओं को 50 हजार से 5 लाख की सहायता राशि उपलब्ध करवाई जा रही है। प्रदेश में 14 कामकाजी महिला होस्टलों का निर्माण किया गया है। महिलाओं के उत्थान के लिए कार्य कर रही गैर सरकारी संस्थाओं को बढ़ावा देने के लिए ‘हिल विकास प्रोत्साहन योजना’ चल रही है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ाकर 3450 रुपये, सहायिकाओं का 1800 और मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ाकर 2625 रुपये किया गया है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. कर्नल धनी राम शांडिल ने कहा कि समाज में महिलाओं के प्रति अब सोच बदल रही है, जिससे महिलाओं और पुरुषों के बीच अंतर समाप्त हो रहा है। राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष ममता शर्मा ने अपने विचार रखते हुए महिलाओं की शिक्षा पर जोर दिया। सम्मेलन में प्रधान सचिव सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता आरडी धीमान, राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य हेमलता खरिया और नमिता रोशन, प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष जैनब चंदेल, खंड कांग्रेस समिति की अध्यक्ष अनीता शर्मा, श्यामा डोगरा आदि मौजूद रहीं।
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