{"_id":"132-54903","slug":"Shimla-54903-132","type":"story","status":"publish","title_hn":"आठ सप्ताह में नए बीआरसीसी नियुक्त करने के आदेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आठ सप्ताह में नए बीआरसीसी नियुक्त करने के आदेश
Shimla
Updated Tue, 22 Jul 2014 05:30 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शिमला। हिमाचल हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार की उस नीति को पूरी तरह संवैधानिक करार दिया है, जिसके तहत बीआरसीसी (खंड समन्वयक) की नियुक्ति की जाती है। साथ में हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग में बीआरसीसी (खंड समन्वयक) के पद पर नियुक्त शिक्षकों की उन याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने गुहार लगाईं थी कि उन्हें दस साल का कार्यकाल पूरा होने तक बीआरसीसी पद से न हटाया जाए। हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दिए हैं कि आठ सप्ताह के भीतर बीआरसीसी भर्ती प्रक्रिया शुरू करे। बीआरसीसी पद पर कम से कम नियुक्ति तीन साल के लिए हो।
वादियों ने कहा था कि उन्हें वर्ष 2000-2001 में सर्व शिक्षा अभियान के तहत बीआरसीसी पद पर दस साल के लिए नियुक्त किया गया था। सरकार ने 31 अक्तूबर, 2013 को बीआरसीसी शिक्षकों की नियुक्ति पॉलिसी बनाकर नियुक्ति की अवधि एक वर्ष कर दी। पॉलिसी में प्रावधान किया गया कि अगर किसी शिक्षक की सेवाएं अति संतोषजनक हों तो नियुक्ति अवधि दो साल तक बढ़ाए जा जा सकती है। वादियों ने इस नीति को चुनौती देते हुए इसे रद करने की मांग की थी। उनकी गुहार थी जब उनकी नियुक्ति दस साल के लिए की गई है तो उन्हें तब तक बीआरसीसी के पद पर रहने दिया जाए जब तक सर्व शिक्षा अभियान का प्रोजेक्ट बंद न हो जाए।
अदालत ने कहा कि बीआरसीसी को बदलने का निर्णय नीतिगत है क्योंकि बदलते समय के अनुसार शिक्षा में गुणवत्ता लाना अति आवश्यक है। यदि इन बीआरसीसी शिक्षकों को लंबे अरसे तक इसी पद पर रहने दिया जाता है तो नए शिक्षक जिन्होंने दस साल की सेवा अवधि पूरी कर ली है, उन्हें बीआरसीसी के पद पर नियुक्त नहीं किया जा सकता। अदालत ने बीआरसीसी की याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि बीआरसीसी के पद पर नियुक्त किए गए शिक्षकों का कार्यकाल तीन साल से कम नहीं होना चाहिए ताकि सर्व शिक्षा अभियान के उद्देश्य पर विपरीत प्रभाव न पड़े । अदालत ने राज्य सरकार को आदेश दिए कि वह बीआरसीसी के पदों को भरने हेतु प्रक्रिया आठ सप्ताह के भीतर शुरू करे।
विज्ञापन
विज्ञापन
वादियों ने कहा था कि उन्हें वर्ष 2000-2001 में सर्व शिक्षा अभियान के तहत बीआरसीसी पद पर दस साल के लिए नियुक्त किया गया था। सरकार ने 31 अक्तूबर, 2013 को बीआरसीसी शिक्षकों की नियुक्ति पॉलिसी बनाकर नियुक्ति की अवधि एक वर्ष कर दी। पॉलिसी में प्रावधान किया गया कि अगर किसी शिक्षक की सेवाएं अति संतोषजनक हों तो नियुक्ति अवधि दो साल तक बढ़ाए जा जा सकती है। वादियों ने इस नीति को चुनौती देते हुए इसे रद करने की मांग की थी। उनकी गुहार थी जब उनकी नियुक्ति दस साल के लिए की गई है तो उन्हें तब तक बीआरसीसी के पद पर रहने दिया जाए जब तक सर्व शिक्षा अभियान का प्रोजेक्ट बंद न हो जाए।
विज्ञापन
अदालत ने कहा कि बीआरसीसी को बदलने का निर्णय नीतिगत है क्योंकि बदलते समय के अनुसार शिक्षा में गुणवत्ता लाना अति आवश्यक है। यदि इन बीआरसीसी शिक्षकों को लंबे अरसे तक इसी पद पर रहने दिया जाता है तो नए शिक्षक जिन्होंने दस साल की सेवा अवधि पूरी कर ली है, उन्हें बीआरसीसी के पद पर नियुक्त नहीं किया जा सकता। अदालत ने बीआरसीसी की याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि बीआरसीसी के पद पर नियुक्त किए गए शिक्षकों का कार्यकाल तीन साल से कम नहीं होना चाहिए ताकि सर्व शिक्षा अभियान के उद्देश्य पर विपरीत प्रभाव न पड़े । अदालत ने राज्य सरकार को आदेश दिए कि वह बीआरसीसी के पदों को भरने हेतु प्रक्रिया आठ सप्ताह के भीतर शुरू करे।
विज्ञापन