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जमीन लापता होने के मामले में जांच के आदेश
Shimla
Updated Sat, 19 Jul 2014 05:30 AM IST
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शिमला। हिमुडा की 109 बीघा जमीन के दस्तावेज गायब होने के मामले में प्रदेश सरकार ने जांच के आदेश दिए हैं। सरकार ने इस लापरवाही के लिए हिमुडा अधिकारियों को जिम्मेवार ठहराया है। महकमे से लीज की फाइल गुम होना और लीज को राजस्व रिकार्ड में न चढ़ाने के मामले को सरकार ने गंभीर मामला बताया है। 10 दिन के भीतर हिमुडा अधिकारियों को रिकार्ड ढूंढने को कहा है। अगर इस बीच फाइल नहीं मिली तो अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
जमीन के कागज न मिलना गंभीर मामला
शहरी आवासीय मंत्री सुधीर शर्मा ने कहा कि लीज की फाइल न मिलना और इसे राजस्व रिकार्ड में न चढ़ाना गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है। हिमुडा अधिकारियों को लीज फाइल ढूंढने में लगाया है। उन्होंने कहा कि वन विभाग, पांवटा पटवार सर्कल या फिर डीसी के पास इस लीज का रिकार्ड हो सकता है। उन्होंने कहा कि कहीं न कहीं महकमे में लीज के दस्तावेज जरूर मिलेंगे।
ये है मामला
प्रदेश सरकार ने वर्ष 1974 में हिमुडा को पांवटा में जमीन लीज पर दी थी। कुछ समय तक हिमुडा इस जमीन पर टायल फैक्टरी चलता रहा लेकिन बाद में इसे बंद कर दिया गया। हिमुडा के ध्यान में मामला उस वक्त आया जब पांवटा में इस जमीन पर फ्लैट बनाने के लिए कालोनी बनाने का फैसला लिया गया। हिमुडा के मुख्य कार्यालय में लीज का रिकार्ड न मिलने पर टीम को पांवटा भेजा गया। लेकिन यहां पता चला कि राजस्व रिकार्ड में भी इस जमीन को रिकार्ड पर नहीं चढ़ाया गया है। जो सरासर हिमुडा के अधिकारी गलती है। अगर जमीन राजस्व विभाग में चढ़ी होती तो आज हिमुडा को भटकने की जरूरत नहीं पड़नी थी।
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जमीन के कागज न मिलना गंभीर मामला
शहरी आवासीय मंत्री सुधीर शर्मा ने कहा कि लीज की फाइल न मिलना और इसे राजस्व रिकार्ड में न चढ़ाना गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है। हिमुडा अधिकारियों को लीज फाइल ढूंढने में लगाया है। उन्होंने कहा कि वन विभाग, पांवटा पटवार सर्कल या फिर डीसी के पास इस लीज का रिकार्ड हो सकता है। उन्होंने कहा कि कहीं न कहीं महकमे में लीज के दस्तावेज जरूर मिलेंगे।
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ये है मामला
प्रदेश सरकार ने वर्ष 1974 में हिमुडा को पांवटा में जमीन लीज पर दी थी। कुछ समय तक हिमुडा इस जमीन पर टायल फैक्टरी चलता रहा लेकिन बाद में इसे बंद कर दिया गया। हिमुडा के ध्यान में मामला उस वक्त आया जब पांवटा में इस जमीन पर फ्लैट बनाने के लिए कालोनी बनाने का फैसला लिया गया। हिमुडा के मुख्य कार्यालय में लीज का रिकार्ड न मिलने पर टीम को पांवटा भेजा गया। लेकिन यहां पता चला कि राजस्व रिकार्ड में भी इस जमीन को रिकार्ड पर नहीं चढ़ाया गया है। जो सरासर हिमुडा के अधिकारी गलती है। अगर जमीन राजस्व विभाग में चढ़ी होती तो आज हिमुडा को भटकने की जरूरत नहीं पड़नी थी।
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