{"_id":"132-53849","slug":"Shimla-53849-132","type":"story","status":"publish","title_hn":"एचपीयू में एमबीबीएस काउंसलिंग पर विवाद, हंगामा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एचपीयू में एमबीबीएस काउंसलिंग पर विवाद, हंगामा
Shimla
Updated Sat, 21 Jun 2014 05:36 AM IST
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शिमला। एचपीयू में एमबीबीएस काउंसलिंग पर विवाद हो गया है। काउंसलिंग 200 सीटों के लिए हुई, लेकिन प्रवेश पत्र केवल 115 सीटों के लिए जारी होंगे। शुक्रवार को विवि परिसर में इसका पता चलने पर अभिभावकों और छात्रों ने यहां हंगामा कर दिया। गुस्साए अभिभावकों ने इस फरमान पर कोर्ट जाने की धमकी दे दी है। उन्होंने इसे छात्रों से धोखा करार देते कहा कि विभाग लगातार सीटों के मामले में उन्हें गुमराह करता रहा। सरकार और स्वास्थ्य विभाग काउंसलिंग शुरू होने तक असमंजस में रहा कि कितनी सीटों पर काउंसलिंग करवाई जानी है।
तय हुआ कि काउंसलिंग के बाद आईजीएमसी की 65 और टांडा की 50 सीटों के लिए प्रवेश पत्र जारी किए जाएंगे। एमसीआई ने इसी साल हिमाचल में एमबीबीएस की 85 सीटों को कम दिया है। सवाल है कि जब 115 सीटें ही भरी जानी थी तो काउंसलिंग 200 के लिए क्यों करवाई गई? इससे मेरिट में आए छात्रों के भविष्य पर सवाल खड़ा हो गया है। स्वास्थ्य विभाग ने केंद्र से सीटों की संख्या को 200 ही रखने की अपील की है, लेकिन ऐसा होगा या नहीं, ये साफ नहीं है। अब सवाल ये है कि एमसीआई की सीटें काटने की सिफारिश के बाद से काउंसलिंग की डेट के बीच निदेशक चिकित्सा शिक्षा ने सारी स्थिति साफ क्यों नहीं की?
इनसेट
सरकार ने कहा, 200 सीटें भरो
अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) ने शुक्रवार को विवि को पत्र जारी कर कहा कि वह 200 सीटों के लिए ही काउंसलिंग करे। लेकिन विवि ने साफ कर दिया है कि सिर्फ मान्यता प्राप्त 115 सीटों के लिए ही प्रवेश पत्र जारी करेगा। 200 सीटों को मान्यता मिलने तक छात्रों को इंतजार करना पड़ेगा। तब तक मेरिट में आए छात्र बाहरी राज्यों और निजी कालेजों की काउंसलिंग में भी हिस्सा नहीं ले पाएंगे।
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इनसेट
विवि ने किया इंकार
विवि के परीक्षा नियंत्रक डा. नरेंद्र अवस्थी ने कहा कि अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) की ओर से आए आदेशों के मुताबिक काउंसलिंग दोनों कालेजों की सौ-सौ सीटों के लिए करवाई जा रही है। लेकिन हम मान्यता प्राप्त 115 सीटों के लिए ही काउंसलिंग के बाद प्रवेश पत्र जारी कर सकते हैं। शेष सीटों पर फैसला मान्यता पर निर्भर करेगा। प्रोस्पेक्टस में भी सारी स्थिति साफ की गई थी।
---
नरेंद्र कंवर
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तय हुआ कि काउंसलिंग के बाद आईजीएमसी की 65 और टांडा की 50 सीटों के लिए प्रवेश पत्र जारी किए जाएंगे। एमसीआई ने इसी साल हिमाचल में एमबीबीएस की 85 सीटों को कम दिया है। सवाल है कि जब 115 सीटें ही भरी जानी थी तो काउंसलिंग 200 के लिए क्यों करवाई गई? इससे मेरिट में आए छात्रों के भविष्य पर सवाल खड़ा हो गया है। स्वास्थ्य विभाग ने केंद्र से सीटों की संख्या को 200 ही रखने की अपील की है, लेकिन ऐसा होगा या नहीं, ये साफ नहीं है। अब सवाल ये है कि एमसीआई की सीटें काटने की सिफारिश के बाद से काउंसलिंग की डेट के बीच निदेशक चिकित्सा शिक्षा ने सारी स्थिति साफ क्यों नहीं की?
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सरकार ने कहा, 200 सीटें भरो
अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) ने शुक्रवार को विवि को पत्र जारी कर कहा कि वह 200 सीटों के लिए ही काउंसलिंग करे। लेकिन विवि ने साफ कर दिया है कि सिर्फ मान्यता प्राप्त 115 सीटों के लिए ही प्रवेश पत्र जारी करेगा। 200 सीटों को मान्यता मिलने तक छात्रों को इंतजार करना पड़ेगा। तब तक मेरिट में आए छात्र बाहरी राज्यों और निजी कालेजों की काउंसलिंग में भी हिस्सा नहीं ले पाएंगे।
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विवि ने किया इंकार
विवि के परीक्षा नियंत्रक डा. नरेंद्र अवस्थी ने कहा कि अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) की ओर से आए आदेशों के मुताबिक काउंसलिंग दोनों कालेजों की सौ-सौ सीटों के लिए करवाई जा रही है। लेकिन हम मान्यता प्राप्त 115 सीटों के लिए ही काउंसलिंग के बाद प्रवेश पत्र जारी कर सकते हैं। शेष सीटों पर फैसला मान्यता पर निर्भर करेगा। प्रोस्पेक्टस में भी सारी स्थिति साफ की गई थी।
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नरेंद्र कंवर