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जांच रिपोर्ट से सामने आया एसएलडीसी का खेल

Fri, 20 Jun 2014 05:33 AM IST
Shimla
Shimla Updated Fri, 20 Jun 2014 05:33 AM IST
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शिमला। लारजी हादसे पर मंडलायुक्त की रिपोर्ट में स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर (एसएलडीसी) का खेल सामने आ गया है। डिवीजनल कमीश्नर ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि जब लारजी प्रोजेक्ट को बंद करने के लिए एसएलडीसी ने मौखिक निर्देश दिए थे, तब राज्य के प्राइवेट पावर प्रोजेक्टों में क्षमता से अधिक बिजली बनाई गई। निजी क्षेत्र में चल रहे बिजली प्रोजेक्टों को लोड शेडिंग के निर्देश नहीं थे, जबकि सरकारी क्षेत्र के लारजी और भावा प्रोजेक्टों में उत्पादन घटाया गया।
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इससे लारजी प्रोजेक्ट के बांध से अचानक ज्यादा पानी छोड़ना पड़ा और इससे होने वाले नुकसान पर प्रोजेक्ट अथॉरिटी ने कोई ऐहतियाती कदम नहीं उठाए। इस लापरवाही से ये हादसा हुआ। ‘अमर उजाला’ ने 11 और 12 जून के अंकों में ये मामला उठाया था कि पानी छोड़ने के पीछे कोई और खेल तो नहीं? लेकिन तब राज्य सरकार और बिजली बोर्ड ने इस पर आंखें मूंद ली। यहां तक कि राज्य सरकार की स्टेटस रिपोर्ट में भी लोड डिस्पैच सेंटर को जांच के दायरे में नहीं लिया गया।
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जबकि हकीकत ये थी जब लारजी प्रोजेक्ट को दो टरबाइन बंद करने को कहा गया, उस समय जेपी के कड़छम वांगतू प्रोजेक्ट ने 1000 मेगावाट की जगह 1187 मेगावाट और मलाणा-2 प्रोजेक्ट ने 100 की जगह 105 और नाथपा झाकड़ी ने 1500 के बजाय 1602 मेगावाट बिजली बनाई थी। इसका सबसे बड़ा कारण ये है कि एसएलडीसी लोड शेडिंग के लिए निर्धारित प्रोटोकाल को फालो नहीं करता। माकपा नेता एवं डिप्टी मेयर टिकेंद्र पंवर ने भी इस गोलमाल पर जांच अधिकारी और मुख्य न्यायाधीश को लिखित शिकायत की थी। अब देखना है कि सरकार एसएलडीसी पर क्या कार्रवाई करती है।
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